• सोने की बढ़ती कीमतों के कारण गोल्ड लोन में तेज बढ़ोतरी हुई, जिससे त्योहारों के बाद रिटेल क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही
• पहली बार लोन लेने वाले युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ी, खासकर कंज्यूमर ड्यूरेबल और पर्सनल लोन में
• जीएसटी दरों में बदलाव के बाद रिटेल क्रेडिट ग्रोथ स्थिर हुई, खासकर त्योहारों के दूसरे महीने से
मुंबई – दिसंबर 2025
तिमाही में भारत का क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर (CMI) साल-दर-साल और पिछली तिमाही दोनों आधार पर बढ़ा। इसकी मुख्य वजह सोने की वैश्विक कीमतों में तेजी के चलते गोल्ड लोन में मजबूत वृद्धि रही। हालांकि, त्योहारों के बाद रिटेल क्रेडिट सप्लाई सामान्य स्तर पर आ गई। जीएसटी में बदलाव से जो तेजी आई थी, वह धीरे-धीरे कम हो गई और 2024 के अंत जैसे स्तर पर लौट आई। इससे यह संकेत मिलता है कि कम समय के लिए मांग में थोड़ी कमी आई है, जो आमतौर पर मौसमी होती है।
ट्रांसयूनियन सिबिल की मार्च 2026 क्रेडिट मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, कंज्यूमर क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर (CMI) दिसंबर 2025
तिमाही में बढ़कर 102 हो गया, जो दिसंबर 2024
की तिमाही में 97 था। यह सितंबर 2025 की पिछली तिमाही के 100 से भी 2 अंक ज्यादा है।
दिसंबर 2025 की तिमाही लगातार तीसरी तिमाही रही, जिसमें CMI में सुधार देखा गया। कंज्यूमर क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर दरअसल एक समग्र सूचकांक है, जो हर महीने अलग-अलग आंकड़ों के आधार पर क्रेडिट मार्केट की स्थिति को मापता है। इसे चार मुख्य हिस्सों में बांटा जाता है—डिमांड (मांग), सप्लाई (आपूर्ति), उपभोक्ता व्यवहार और प्रदर्शन। इन सभी को मिलाकर एक कुल सीएमआई स्कोर तैयार होता है। अगर सीएमआई ज्यादा होता है, तो इसका मतलब है कि क्रेडिट मार्केट की स्थिति बेहतर हो रही है, और अगर यह कम होता है, तो स्थिति कमजोर मानी जाती है।
ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ श्री भावेश जैन ने कहा, “रिटेल क्रेडिट ग्रोथ के रुझान में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अब बढ़त सिर्फ गोल्ड लोन जैसे सुरक्षित लोन तक सीमित नहीं है, बल्कि पहली बार लोन लेने वाले और युवा ग्राहकों की बढ़ती खपत मांग भी इसे आगे बढ़ा रही है। त्योहारों के बाद क्रेडिट सप्लाई में आई थोड़ी कमी मौसमी है, लेकिन कुल मिलाकर क्रेडिट परफॉर्मेंस में सुधार भारत के क्रेडिट मार्केट की मजबूती और परिपक्वता को दर्शाता है।”
चार्ट 1: क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर (CMI), दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025
छोटे शहरों और ग्रामीण भारत ने बढ़ाई कर्ज की मांग; ऑटो लोन में भी उछाल
दिसंबर 2025 की तिमाही में डिमांड (मांग) का सीएमआई बढ़कर 96 हो गया है, जो दिसंबर 2024 की तिमाही में 92 था। मांग में इस बढ़त का मुख्य कारण अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं का उत्साह रहा है। कुल रिटेल कर्जदारों में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़कर 54% हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में 3% की वृद्धि दर्शाती है। इसके साथ ही, पहली बार कर्ज लेने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी भी 1% बढ़कर अब कुल कर्जदारों का 15% हो गई है।
त्योहारी सीजन के बाद की अवधि में, ऑटो लोन (वाहन ऋण) की संख्या में पिछले साल के स्तर के अनुरूप सुधार देखा गया। इसका मुख्य श्रेय किफायती मिड-सेगमेंट कारों (₹5–10 लाख) की बाजार में बढ़ती उपलब्धता को जाता है। 2024 की तुलना में, 2025 में त्योहारी सीजन के बाद ऑटो लोन की औसत दैनिक आपूर्ति में 10% की वृद्धि दर्ज की गई।
चार्ट 2: डिमांड के लिए CMI, दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025
“नॉन-मेट्रो और अर्ध-शहरी बाजारों में क्रेडिट मांग का लगातार बढ़ना यह दिखाता है कि भारत के लोन बाजार में एक बड़ा बदलाव हो रहा है। अब पारंपरिक बड़े शहरों से आगे बढ़कर ज्यादा लोगों तक औपचारिक क्रेडिट पहुंच रहा है, जिससे उधार लेने वालों का दायरा भी भौगोलिक रूप से बढ़ रहा है। यह बदलाव बढ़ती क्रेडिट जागरूकता, लेंडर्स की बेहतर पहुंच और इन क्षेत्रों के लिए बनाए गए खास प्रोडक्ट्स की वजह से हो रहा है, जो मिलकर एक ज्यादा समावेशी और संतुलित क्रेडिट सिस्टम बना रहे हैं,” श्री जैन ने कहा।
गोल्ड लोन के सहारे बढ़ी क्रेडिट सप्लाई
दिसंबर 2025 तिमाही में सप्लाई के लिए क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर
बढ़कर 98 हो गया, जो दिसंबर 2024 में 91 था। यह बढ़त मुख्य रूप से गोल्ड लोन की संख्या और कुल राशि दोनों में तेज वृद्धि के कारण आई।
सोने की बढ़ती कीमतों का फायदा उठाने के लिए लोगों ने बड़े अमाउंट के गोल्ड लोन लिए, जिससे यह ग्रोथ और तेज हुई। मार्च 2023 के बाद से गोल्ड लोन का औसत टिकट साइज 1.8 गुना बढ़ गया है, जिससे कुल लोन वैल्यू में भी तेजी आई।
दिसंबर 2025 तिमाही में (मार्च 2023 के आधार पर) गोल्ड लोन का इंडेक्स्ड औसत टिकट साइज 189 तक पहुंच गया, जबकि दिसंबर 2024 में यह 132 था। दिसंबर 2025 तक के तीन महीनों में औसत टिकट साइज लगभग ₹1.9 लाख रहा। अब गोल्ड लोन रिटेल लोन कैटेगरी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं—वॉल्यूम के हिसाब से 36% और वैल्यू के हिसाब से 39%। यानी कुल रिटेल लोन सप्लाई का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा गोल्ड लोन का है। बकाया राशि के मामले में भी गोल्ड लोन अब सिर्फ होम लोन के बाद दूसरे स्थान पर हैं।
भौगोलिक और जनसांख्यिकीय नजरिए से देखें तो गोल्ड लोन अब सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उत्तर और पश्चिम भारत में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, दिसंबर 2025 तक गोल्ड लोन की सबसे ज्यादा सालाना वृद्धि वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश (96%), मध्य प्रदेश (80%) और राजस्थान (79%) शामिल हैं।
इसके अलावा,
54% गोल्ड लोन प्राइम और उससे ऊपर के ग्राहकों द्वारा लिए जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि अब अलग-अलग तरह के ग्राहक इस प्रोडक्ट को अपना रहे हैं। यह ट्रेंड बताता है कि गोल्ड लोन अब एक मुख्यधारा के रिटेल क्रेडिट प्रोडक्ट बनते जा रहे हैं।
चार्ट 3: सप्लाई के लिए सीएमआई, दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025
खपत आधारित क्रेडिट से पहली बार लोन लेने वालों में फिर आई तेजी
दिसंबर 2025 की तिमाही में, पहली बार कर्ज लेने वाले (FTB) ग्राहकों के वर्ग में पिछले साल के मुकाबले 7% की वृद्धि देखी गई। इस बढ़त का मुख्य कारण उपभोग के लिए हासिल किए जाने वाले लोन रहे। पर्सनल लोन में सालाना 20% की बढ़ोतरी हुई, जबकि दिसंबर 2024 की तिमाही में इसमें 3% की गिरावट देखी गई थी। कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में पिछले साल की 11% की गिरावट के मुकाबले, इस बार इसमें 22% का जोरदार उछाल आया है। युवा कर्जदारों का दबदबा रहा। 35 वर्ष से कम आयु के कर्जदारों की संख्या में सालाना 17% की वृद्धि हुई है। अब पहली बार कर्ज लेने वाले कुल ग्राहकों में इस आयु वर्ग की हिस्सेदारी 58% है, जो इस सेगमेंट की ग्रोथ का मुख्य आधार हैं।
परफॉर्मेंस के लिए सीएमआई में 6 अंकों की बढ़त
मुख्य लोन कैटेगरी में 90+ दिनों से बकाया (DPD) मामलों में सुधार के कारण परफॉर्मेंस के लिए सीएमआई 6
अंक बढ़कर दिसंबर 2025 में 107
हो गया, जो दिसंबर 2024
में 101
था। हालांकि, प्रॉपर्टी के खिलाफ माइक्रो लोन (LAP) सेगमेंट में थोड़ा दबाव देखा गया, जहां 90+ DPD डिलिंक्वेंसी 35 बेसिस पॉइंट बढ़कर 3.1% हो गई। इसके बावजूद, यह स्तर पिछले तिमाही से कुल मिलाकर स्थिर बना हुआ है।
श्री जैन ने आगे कहा: “भारत का रिटेल क्रेडिट बाजार लगातार मजबूत और स्थिर बना हुआ है। खपत आधारित मांग और बेहतर क्रेडिट परफॉर्मेंस के बीच संतुलन इसकी बड़ी वजह है। होम, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि लोग अब एसेट-बेस्ड लोन की ओर बढ़ रहे हैं। साथ ही, औसत लोन साइज का बढ़ना और प्राइम व उससे ऊपर के ग्राहकों की हिस्सेदारी बढ़ना यह दर्शाता है कि लेंडर्स भरोसेमंद ग्राहकों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
इसके साथ ही, पहली बार लोन लेने वाले, युवा ग्राहकों और नॉन-मेट्रो क्षेत्रों की बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि देश में औपचारिक क्रेडिट का दायरा बढ़ रहा है और फाइनेंशियल इंक्लूजन मजबूत हो रहा है। जैसे-जैसे यह सिस्टम आगे बढ़ेगा, क्रेडिट अनुशासन और रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि लंबी अवधि में स्थिर और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके।”