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विश्व बैंक ने भूटान की 1,125 मेगावाट की दोरजिलुंग जलविद्युत परियोजना के लिए दीर्घकालिक वित्त पोषण को मंजूरी दी

विश्व बैंक ने भूटान की 1,125 मेगावाट की दोरजिलुंग जलविद्युत परियोजना के लिए दीर्घकालिक वित्त पोषण को मंजूरी दी
  • प्रतिवर्ष 4,500 GWh से अधिक स्वच्छ बिजली का होगा उत्पादन, जिसका लगभग 80% हिस्सा भारत को आपूर्ति किया जाएगा।

  • यह परियोजना दक्षिण एशिया के स्वच्छ ऊर्जा अभियान में क्षेत्रीय सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

  • पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत विकसित होने वाली भूटान की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना।

नेशनल : विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने 1,125 मेगावाट की दोरजिलुंग जलविद्युत परियोजना (DHPL) के लिए दीर्घकालिक वित्त पोषण को मंजूरी दे दी है। डीएचपीएल (DHPL) एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जिसका स्वामित्व संयुक्त रूप से भूटान की 'ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन' (60%) और भारत की सबसे बड़ी निजी एकीकृत बिजली कंपनी 'टाटा पावर' (40%) के पास है। यह परियोजना भारत और भूटान के बीच स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देगी और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित होने वाली यह भूटान की अब तक की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। इससे भूटान की स्थापित ऊर्जा क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा के एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में भूटान की स्थिति और मजबूत होगी। इस परियोजना से उत्पादित होने वाली कुल बिजली का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा भारत को निर्यात किया जाएगा। टाटा पावर की सहायक कंपनी, 'टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड', भारत में बिजली आयात करने और इसके वितरण के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगी।

वित्त पोषण का विवरण: विश्व बैंक द्वारा स्वीकृत इस वित्तीय पैकेज में अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (IDA) से $150 मिलियन का अनुदान और $150 मिलियन का ऋण शामिल है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (IBRD) से डीजीपीसी (भूटान सरकार) को $15 मिलियन का ऋण, और डीएचपीएल (DHPL) को आईबीआरडी से $200 मिलियन व अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) से $300 मिलियन का ऋण प्रदान किया जाएगा। शेष आवश्यक धन की व्यवस्था अन्य बाजार भागीदारों से की जाएगी।

विश्व बैंक की यह स्वीकृति परियोजना की तकनीकी और वित्तीय नींव में उनके विश्वास को दर्शाती है। यह दोरजिलुंग परियोजना न केवल दक्षिण एशिया के स्वच्छ ऊर्जा परिदृश्य को आगे बढ़ाती है, बल्कि भूटान के मोंग़र और ल्हुंतसे जिलों में रोजगार के अवसर पैदा कर स्थानीय आजीविका को भी समर्थन देगी।

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