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हिंदुस्तान जिंक संसाधन विस्तार और महत्वपूर्ण खनिजों पर दे रही है विशेष ध्यान: प्रिया अग्रवाल हेब्बार

 हिंदुस्तान जिंक संसाधन विस्तार और महत्वपूर्ण खनिजों पर दे रही है विशेष ध्यान: प्रिया अग्रवाल हेब्बार

हिंदुस्तान जिंक की अध्यक्ष (चेयरपर्सन) प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में कहा कि कंपनी अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) से जुड़ी सहयोगी कंपनियों के ज़रिए धीरे-धीरे अपने संसाधान पदचिह्न का विस्तार कर रही है और जस्ता (जिंक), सीसा (लेड) और चांदी (सिल्वर) के मुख्य पोर्टफोलियो से परे महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल) की ओर कदम बढ़ा रही है।

प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने हिंदुस्तान जिंक की कम लागत पर उत्पादन के लिहाज़ से नेतृत्व, तीसरी तिमाही के दौरान शानदार परिचालन तथा वित्तीय प्रदर्शन, और कीमत में तेज़ी के बीच कुल मुनाफे में चांदी के बढ़ते योगदान पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित जिंक पार्क जैसी पहल, टंग्स्टन के अन्वेषण के लाइसेंस के साथ क्रिटिकल मिनरल में हिंदुस्तान जिंक का नपा-तुला प्रवेश, और सुरक्षा तथा दक्षता बढ़ाने में टेक्नोलॉजी की भूमिका, हर कुछ प्रगति पर है।

हिंदुस्तान जिंक ने तीसरी तिमाही में भूमिगत खनन को अपनाने (अंडरग्राउंड ट्रांज़िशन) के बाद से अब तक किसी भी तीसरी तिमाही के मुकाबले सबसे अधिक का खनन आधारित धातु का उत्पादन किया है। साथ ही तीसरी तिमाही के लिहाज़ से रिकॉर्ड रिफाइंड धातु उत्पादन भी दर्ज हुआ। कंपनी ने 276 केटी खनन आधारित धातु का उत्पादन किया और रिकॉर्ड 270 केटी रिफाइंड मेटल हासिल किया।

उन्होंने कहा, "हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार, किसी तिमाही के दौरान आय (रेवेन्यू) ₹10,000 करोड़ को पार कर गई, और पिछली तिमाही के मुकाबले 28% बढ़कर ₹10,980 करोड़ तक पहुंच  गई।"

उन्होंने कहा, "हमारा एबिट्डा 55% मार्जिन के साथ 16,087 करोड़ के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, और कर पश्चात मुनाफा 13,916 करोड़ हो गया, जो तिमाही-दर-तिमाही के स्तर पर 48% और साल-दर-साल के आधार पर 46% अधिक है। यह परिणाम हमारे एकीकृत परिचालन मॉडल की ताकत और कारोबार के अनुशासित प्रबंधन में हमारे भरोसे को दृढ़ता प्रदान करता है।"

प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने चांदी में लागत के लिहाज़ से नेतृत्व बनाए रखने के लिए हिंदुस्तान जिंक के मौजूदा प्रयासों पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा "मुझे इस बात पर विशेष गर्व है कि हमने यह सब अपनी उत्पादन लागत को साल-दर-साल के आधार पर लगभग 10% कम करते हुए हासिल किया। हमारी जिंक उत्पादन लागत लगभग 940 डॉलर प्रति टन है, जो विश्व भर में सबसे कम है। आज के अनिश्चितता के दौर में, यह अनुशासन हमें मज़बूती प्रदान करता है।"

उन्होंने कहा, "चांदी की इस तिमाही के दौरान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण में इसके बढ़ती मांग ज़ाहिर होती है। हिंदुस्तान जिंक ने तीसरी तिमाही के दौरान 158 मीट्रिक टन चांदी का उत्पादन किया और चांदी कीमत में शानदार बढ़ोतरी के बीच कंपनी के कुल मुनाफे में इसका योगदान बढ़कर 44% हो गया।"

हिंदुस्तान जिंक टेक्नोलॉजी पर विशेष रूप से ध्यान दे रही है, जिससे कंपनी को अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने कहा, "स्वचालन, वास्तविक समय के आधार पर निगरानी और डाटा-आधारित फैसले लेने से हमारी खानों और स्मेल्टरों में सुरक्षा, संसाधन दक्षता और पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार को लगातार समर्थन मिला। ये सिर्फ टूल नहीं हैं, बल्कि ये हमें अपने कर्मचारियों और समुदायों से किए गए वादों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं।"

हिंदुस्तान जिंक सक्रियता से, मुख्य तौर पर जिंक-चांदी का कारोबार करने वाली कंपनी से विविधीकृत विभिन्न धातुओं (मल्टी-मेटल) और महत्वपूर्ण खनिज का खनन और उत्पादन करने वाली  कंपनी बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा, "इस तिमाही में अस्थिर बाज़ार और बदलते वैश्विक माहौल में कंपनी की उस ताकत की परीक्षा हुई, और मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हिंदुस्तान जिंक इस चुनौती का सामना करने में सफल रही। इस प्रक्रिया में जो उभर कर सामने आया वह था, हिंदुस्तान जिंक का स्पष्ट दृष्टिकोण यानी अगले औद्योगिक युग के लिए निर्मित, परिचालन उत्कृष्टता पर आधारित और उद्देश्य से प्रेरित विभिन्न किस्म के धातुओं में कारोबार करने वाला उपक्रम।"

 

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