एसीसीए (ACCA) के नवीनतम ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार, अमेरिकी आयात शुल्कों में अनुमान से अधिक वृद्धि के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने शानदार लचीलापन दिखाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.2% की दर से बढ़ी है, जिसमें मजबूत उपभोक्ता खर्च ने मुख्य भूमिका निभाई है। इसकी तुलना में, वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस वर्ष लगभग 3% की स्थिर लेकिन सामान्य गति से बढ़ने की उम्मीद है, जिसे आसान मौद्रिक नीति, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय प्रोत्साहन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बूम से समर्थन मिलेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था को कम मुद्रास्फीति, वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती, मौद्रिक नीति में ढील और सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे में किए जा रहे भारी निवेश से निरंतर लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, निर्यात के सहयोग से सेवा क्षेत्र की वृद्धि भी मजबूत बनी रहने की संभावना है। श्रम बाजार और दिवाला कानूनों (bankruptcy laws) में हालिया नीतिगत सुधारों से आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन में और सुधार हो सकता है। अमेरिका के साथ किसी भी संभावित व्यापार समझौते और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कम कीमतों को भारत के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, हालांकि घरेलू खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है।
एसीसीए के इंडिया डायरेक्टर, मो. साजिद खान ने कहा, "यह अत्यंत उत्साहजनक है कि अमेरिकी आयात शुल्कों में वृद्धि के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली साबित हुई है। हमारी रिपोर्ट बताती है कि भारत 2026 में भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा और हालिया सुधार इसके दीर्घकालिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।"
एसीसीए के मुख्य अर्थशास्त्री और रिपोर्ट के लेखक, जोनाथन ऐशवर्थ ने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 2026 में स्थिर विस्तार जारी रखेगी, जिसमें अमेरिका G7 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था हो सकता है। हालांकि, उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता और व्यापार तनाव बढ़ने के जोखिमों के प्रति आगाह भी किया है। रिपोर्ट में तीन महत्वपूर्ण विषयों की पहचान की गई है जो इस वर्ष वैश्विक परिदृश्य को आकार देंगे: एआई (AI) में निवेश से उत्पादकता में वृद्धि, उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बॉन्ड बाजारों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार पर अमेरिकी शुल्कों का निरंतर प्रभाव। रिपोर्ट निष्कर्ष निकालती है कि इस अस्थिर और अप्रत्याशित दुनिया में आर्थिक, भू-राजनीतिक और तकनीकी कारकों के बीच तालमेल को समझना व्यवसायों और नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण होगा।