मुंबई : एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने अपनी नवीनतम 'इकोवैप' (Ecowrap) रिपोर्ट में वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर विकास पथ का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7.2% रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर 7.5% रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि 'हाई-फ्रीक्वेंसी एक्टिविटी डेटा' आर्थिक गतिविधियों में लचीलेपन का संकेत देता है। इस विकास का एक प्रमुख कारण ग्रामीण खपत में मजबूती है, जिसे कृषि और गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा, राजकोषीय प्रोत्साहन उपायों के कारण शहरी खपत में भी निरंतर बढ़त देखी गई है। आगामी वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए एसबीआई रिसर्च ने 6.6% की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान लगाया है।
विकास के आंकड़ों के अलावा, रिपोर्ट भारत द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है। इसमें स्वास्थ्य सेवा और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई-आधारित उत्पादकता लाभ प्राप्त करने के लिए ठोस नीतियां बनाने का आह्वान किया गया है। शोध में चेतावनी दी गई है कि यदि सॉफ्टवेयर उद्योग एआई और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) के साथ तालमेल नहीं बिठाता है, तो उसे 'SaaSpocalypse' (सॉफ्टवेयर उद्योग के लिए संकट) जैसे क्षणों का सामना करना पड़ सकता है।
डॉ. सौम्य कांति घोष, समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार, एसबीआई ने कहा: "विकास दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन अब समय आ गया है कि देश एआई-आधारित प्रतिस्पर्धात्मकता पर ध्यान केंद्रित करे। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए एआई को अपनी उत्पादकता प्रणाली में एकीकृत करना अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता है।"