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मई 2026 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.93% हुई; एसबीआई रिसर्च को अगस्त में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं

मई 2026 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.93% हुई; एसबीआई रिसर्च को अगस्त में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं
  • ईंधन की कीमतों और आपूर्ति में बाधाओं के कारण हेडलाइन मुद्रास्फीति अप्रैल के 3.48% से बढ़कर मई 2026 में 3.93% पर पहुंची

  • परिवहन (ट्रांसपोर्ट) मुद्रास्फीति 176 बेसिस पॉइंट बढ़कर 1.8% हुई; एलपीजी की कमी से रेस्तरां और आवास सेवाओं की महंगाई दर 5.7% पर पहुंची

  • आयाती मुद्रास्फीति (इंपोर्टेड इन्फ्लेशन) बढ़कर 7.23% हुई; विनिमय दर के उतार-चढ़ाव से घरेलू कीमतें प्रभावित

  • शहरी क्षेत्रों (3.53%) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर (4.25%) अधिक दर्ज, परिवहन और खाद्य उत्पाद मुख्य कारण

  • तेलंगाना 6.15% महंगाई दर के साथ देश में सबसे ऊपर; देश के 13 राज्यों में मुद्रास्फीति राष्ट्रीय औसत से अधिक

  • जून की शुरुआत में मानसून में 27% की कमी से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होने की आशंका; अक्टूबर में चरम पर पहुंच सकती है महंगाई

मुंबई : भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति मई 2026 में बढ़कर 3.93% हो गई, जो अप्रैल 2026 में 3.48% थी। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नवीनतम इकोरैप रिपोर्ट (इश्यू नंबर 12, वित्त वर्ष 27)—जिसका शीर्षक "CPI Inflation Still Below 4% But Expected to Peak in October; No Rate Cut Expected in August As of Now" है—के अनुसार, खुदरा मूल्य में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ईंधन की ऊंची कीमतों और आपूर्ति-श्रृंखला (सप्लाई-साइड) में आई बाधाओं के कारण हुई है। हालांकि कुल मुद्रास्फीति अभी भी रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित दायरे में है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा कीमतों, विनिमय दर के उतार-चढ़ाव और मानसून की स्थिति को देखते हुए एसबीआई रिसर्च को आगामी अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों (ब्याज दर) में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है

मई के आंकड़ों में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर देखा गया है, जिससे परिवहन क्षेत्र की मुद्रास्फीति में 176 बेसिस पॉइंट (bps) की भारी बढ़त दर्ज की गई और यह अप्रैल के 0.0% से बढ़कर 1.8% पर पहुंच गई। इसके साथ ही, एलपीजी (LPG) की मामूली कमी के कारण रेस्तरां और आवास सेवाओं (होटल) की मुद्रास्फीति 154 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.7% हो गई, जो अप्रैल में 4.2% थी। सोने और चांदी की कीमतों में आए आंशिक उछाल से पर्सनल केयर खंड की महंगाई दर में भी लगभग 80 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हुई है। खाद्य और ईंधन को छोड़कर तैयार होने वाली कोर सीपीआई (Core CPI) भी मई 2026 में थोड़ी बढ़कर 3.84% दर्ज की गई है

आयाती मुद्रास्फीति में वृद्धि और वस्तुओं का विश्लेषण

रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि बाहरी झटके और विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) के उतार-चढ़ाव अब भारत के घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अपनी जगह बना रहे हैं। कुल सीपीआई में 21.84% का महत्व रखने वाली आयाती मुद्रास्फीति (इंपोर्टेड इन्फ्लेशन) अप्रैल के 6.34% से उल्लेखनीय रूप से बढ़कर मई 2026 में 7.23% हो गई है। कुल खुदरा महंगाई में इसका योगदान भी लगभग 100 बेसिस पॉइंट बढ़कर 2.43% पर पहुंच गया है। राज्यों के स्तर पर देखें तो तेलंगाना में आयाती मुद्रास्फीति मई में 13% के स्तर को छू चुकी है, जबकि राजस्थान, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में यह 10% के आसपास बनी हुई है

वस्तुओं के स्तर पर देखें तो मई 2026 में चांदी के आभूषणों ने खुदरा महंगाई में सबसे अधिक 56 बेसिस पॉइंट का योगदान दिया, जो अप्रैल में 52 बेसिस पॉइंट था। इसके बाद सोने का योगदान 30 बेसिस पॉइंट रहा, जो पिछले महीने के बराबर ही है। विश्व बैंक की 'पिंक शीट' के वैश्विक कमोडिटी आंकड़े भी यही दर्शाते हैं कि मई में सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में अधिक तेजी रही है। इसके अलावा, कुल महंगाई में पेट्रोल का योगदान बढ़कर 14 बेसिस पॉइंट हो गया, जबकि एलपीजी की किल्लत से पके हुए मांस (कुक्ड मीट) और पके हुए स्नैक्स के दाम बढ़ गए। मूल्य वृद्धि दर्ज करने वाली अन्य वस्तुओं में रिफाइंड तेल, सरसों का तेल, मछली/झींगा, दूध, चिकन और मटन शामिल रहे

ग्रामीण बनाम शहरी अंतर और क्षेत्रीय असमानता

महंगाई का दबाव देश के ग्रामीण इलाकों में अधिक देखा गया, जहाँ खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल के 3.73% से बढ़कर मई में 4.25% हो गई। इसके मुकाबले शहरी क्षेत्रों में यह बढ़त अपेक्षाकृत कम रही और आंकड़ा 3.16% से बढ़कर 3.53% पर पहुंचा

  • मुख्य कारक: ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में महंगाई बढ़ाने में परिवहन (ग्रामीण में 179 bps और शहरी में 173 bps की वृद्धि) तथा रेस्तरां व आवास सेवाओं (ग्रामीण में 164 bps और शहरी में 148 bps की वृद्धि) की मुख्य भूमिका रही

  • खाद्य उत्पाद: खाद्य और पेय पदार्थों (Food and Beverages) की महंगाई दर शहरों के 4.38% के मुकाबले गांवों में अधिक यानी 4.64% दर्ज की गई। हालांकि, शहरों में रेस्तरां और होटल सेवाएं काफी महंगी रहीं, जहाँ इस खंड की दर 5.99% पर थी

इकोरैप की रिपोर्ट राज्यों के स्तर पर उपभोक्ता मुद्रास्फीति में एक बड़ी क्षेत्रीय असमानता को उजागर करती है। देश के कुल 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 13 राज्य ऐसे हैं जहाँ महंगाई दर राष्ट्रीय औसत (3.93%) से अधिक है। तेलंगाना में जनवरी 2026 से ही देश के सभी राज्यों की तुलना में सबसे अधिक मुद्रास्फीति दर्ज की जा रही है, जो मई में 6.15% पर पहुंच गई। इसका कारण ईंधन पर अधिक राज्य कर, ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि और बाहरी राज्यों से आने वाले ताजे कृषि उत्पादों पर निर्भरता माना जा रहा है। प्रमुख राज्यों में आंध्र प्रदेश (4.90%), असम, और ओडिशा (4.54%) ने जनवरी-मई 2026 के दौरान महंगाई में 2% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि केवल 1.19% रही है। हालांकि, देश के अधिकांश राज्यों (24 राज्यों) में महंगाई का दायरा 2% से 4% के बीच ही सीमित बना हुआ है

कमजोर मानसून से भविष्य की चिंताएं

आगे की राह को लेकर एसबीआई रिसर्च ने रेखांकित किया है कि देश में आगामी महंगाई का रुख काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रसार पर निर्भर करेगा। जून 2026 के पहले 11 दिनों के दौरान, भारत में सामान्य से 27% कम बारिश दर्ज की गई है। इसमें मध्य भारत में 48% और पूर्वी व उत्तरी भारत में 38% की भारी बारिश की कमी देखी जा रही है

यदि मानसून की यह सुस्ती आगे भी जारी रहती है, तो इससे ग्रामीण आजीविका प्रभावित होने के साथ-साथ धान (चावल), कपास, सोयाबीन और दालों जैसी खरीफ (गर्मी में बोई जाने वाली) फसलों की बुआई में देरी हो सकती है। यही वजह है कि भले ही वर्तमान महंगाई नियंत्रण में दिख रही हो, लेकिन कमजोर शुरुआती बारिश, वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए अक्टूबर 2026 में खुदरा महंगाई के चरम (पीक) पर पहुंचने की आशंका है, जिसके चलते नीति निर्माता ब्याज दरों में कटौती को लेकर फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं

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