उदयपुर : दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 चांदी उत्पादकों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (BSE:
500188 एवं NSE: HINDZINC), ने 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही और वित्तीय वर्ष के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा की। कंपनी ने दक्षता-आधारित वृद्धि, मजबूत परिचालन निष्पादन और निरंतर लागत अनुशासन के आधार पर रिकॉर्ड वार्षिक प्रदर्शन दर्ज किया। यह वर्ष रिकॉर्ड उत्पादन, संरचनात्मक रूप से प्रतिस्पर्धी लागत आधार और अनुकूल कमोडिटी परिस्थितियों से चिह्नित रहा, जिसने लाभप्रदता, नकदी सृजन और रिजर्व मजबूती में उल्लेखनीय वृद्धि की तथा कंपनी को विकास के अगले चरण के लिए मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में हिंदुस्तान जिंक ने अब तक का सबसे अधिक ₹40,844 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% ज्यादा रहा। कंपनी का एबिटडा (EBITDA) भी ₹22162 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जिसमें 27% की सालाना बढ़ोतरी हुई। 54% का एबिटडा मार्जिन यह दिखाता है कि कंपनी ने लागत को अच्छी तरह नियंत्रित किया और मजबूत परिचालन लाभ हासिल किया। सालभर का शुद्ध लाभ ₹13,832 करोड़ रहा, जो 34% की वृद्धि के साथ अब तक का सबसे अधिक रहा। इसके साथ ₹13,337 करोड़ का मजबूत फ्री कैश फ्लो (ग्रोथ कैपेक्स से पहले) भी दर्ज किया गया, जिससे शेयरधारकों के लिए लगातार मूल्य निर्माण की क्षमता और मजबूत हुई। चौथी तिमाही में कंपनी का एबिटडा ₹7,747 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही से 61% अधिक था। वहीं कर पश्चात लाभ (PAT) बढ़कर रिकॉर्ड ₹5,033 करोड़ हो गया, जो 68% की सालाना वृद्धि दर्शाता है।
परिचालन स्तर पर, कंपनी ने 1,114 Kt खनित धातु उत्पादन के साथ अब तक का सबसे बड़ा उत्पादन हासिल किया, जबकि 1,048 Kt परिष्कृत धातु उत्पादन कंपनी का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। यह कंपनी की मजबूत खनन और स्मेल्टिंग क्षमता को दर्शाता है। राजस्थान के चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में क्षमता बढ़ाने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया, साथ ही दरीबा स्मेल्टर में पहले किए गए सुधारों से भी उत्पादन क्षमता मजबूत हुई। कंपनी की सबसे बड़ी ताकत उसकी कम लागत पर उत्पादन करने की क्षमता रही। जिंक उत्पादन लागत $959 प्रति टन रही, जो पिछले 5 वर्षों में सबसे कम स्तर है और 9% का सालाना सुधार दर्शाती है। इससे हिंदुस्तान जिंक दुनिया के सबसे कम लागत वाले जिंक उत्पादकों में शामिल हो गया। चांदी भी कंपनी के लिए मुनाफे का बड़ा स्रोत बनी रही। पूरे वर्ष में 627 टन चांदी का उत्पादन हुआ, जिसने कुल लाभप्रदता में 45% योगदान दिया। इससे कंपनी को वैश्विक चांदी मांग का अच्छा लाभ मिला। चौथी तिमाही में चांदी उत्पादन 176 टन रहा, जो पिछली तिमाही से 11% अधिक था।
कंपनी ने अपने भविष्य के विकास को भी मजबूत किया। उसके पास अब रिकॉर्ड 468.6 Mnt
अयस्क संसाधन और रिजर्व हैं, जो 25 साल से अधिक की खान आयु को समर्थन देते हैं। पहली बार 13.9 Mnt धातु रिजर्व और 10.9 Kt चांदी रिजर्व का स्तर भी पार हुआ, जिससे आने वाले वर्षों के उत्पादन की मजबूत संभावना बनी हुई है।
हिंदुस्तान जिंक ने देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा योगदान दिया। कंपनी ने लगभग ₹19,000 करोड़ सरकारी राजस्व के रूप में योगदान दिया, जिसमें ₹6,000 करोड़ से अधिक राजस्थान सरकार को प्राप्त हुआ, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पुनः स्थापित हुई।
HZL 2.0 रणनीति के तहत, कंपनी अब जिंक, लेड और सिल्वर के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी विस्तार कर रही है। ये मिनरल्स भारत की स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और औद्योगिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। मजबूत नकदी प्रवाह, लंबी खान आयु और सफल निष्पादन क्षमता के साथ, कंपनी आने वाले समय में इस नए अवसर से दीर्घकालिक विकास के लिए अच्छी स्थिति में है।