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अल्ट्राटेक ने भारत में 20 करोड़ टन सालाना उत्पादन क्षमता का आंकड़ा पार किया

अल्ट्राटेक ने भारत में 20 करोड़ टन सालाना उत्पादन क्षमता का आंकड़ा पार किया

 

               अल्ट्राटेक चीन के बाहर, दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बनने की ओर अग्रसर है

               16,000 करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत व्यय के साथ, वर्तमान में जारी क्षमता विस्तार परियोजनाओं के पूरा होने पर यह 240 एमटीपीए के लक्ष्य तक पहुँचने की राह पर है

 

मुंबई : आदित्य बिड़ला ग्रुप की सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड ने भारत में इसकी स्थापित सीमेंट उत्पादन क्षमता सालाना 20 करोड़ टन से पार पहुंचने की घोषणा की है। आज कंपनी तीन नई सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट चालू कर रही है जिनकी कुल क्षमता 87 लाख टन सालाना है। इसी के साथ अल्ट्राटेक चीन के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बन जाएगी।

ये तीन नई यूनिट शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश), पतरातू (झारखंड) और विजाग (आंध्र प्रदेश) में लगाई गई हैं। इनकी जगह का चुनाव सोची-समझी रणनीति से किया गया है। ये यूनिट उत्तर भारत के तेजी से बढ़ते निर्माण गलियारे, झारखंड के औद्योगिक दिल और आंध्र प्रदेश के तेजी से शहरीकरण हो रहे तटीय इलाके को सेवा देंगी। इनके जुड़ने के बाद भारत में अल्ट्राटेक की कुल क्षमता 200.1 करोड़ टन सालाना और वैश्विक क्षमता 205.5 करोड़ टन सालाना हो गई है, जिसमें यूएई, बहरीन और श्रीलंका में 54 लाख टन सालाना की क्षमता भी शामिल है।

 

अल्ट्राटेक की तरक्की की रफ्तार उसके पैमाने जितनी ही हैरान करने वाली है। 100 करोड़ टन सालाना तक पहुंचने में 36 साल लगे, यह मुकाम 2019 में मिला था। अगले 100 करोड़ टन सालाना सात साल से भी कम में हासिल हो गए। यह रफ्तार एक साथ दो बातें कहती है, कंपनी की गजब की काम करने की क्षमता और भारत के बुनियादी ढांचे की अदम्य महत्वाकांक्षा।

 

इस मौके पर आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन श्री कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा, "एक दशक से भी पहले हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया के जरिए एक परिभाषित दृष्टि सामने रखी। यह देश की उत्‍पादन महत्वाकांक्षा को फिर से जगाने और उसे वैश्विक स्तर पर ले जाने का आह्वान था जो विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता की बुनियाद बने। अल्ट्राटेक ने इस दृष्टि को जमीन पर उतारा है, महत्वाकांक्षा को अमल से जोड़कर और घरेलू ताकत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से मिलाकर। 200 करोड़ टन सालाना का यह पड़ाव दुनिया में भारत की जगह भी बताता है। एक ऐसा भारत जो अपनी महत्वाकांक्षाओं, अपने अमल और अपने आत्मविश्वास में बड़े सपनों के साथ सहज हो गया है। भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहां अगले दशक के फैसले आने वाली पीढ़ियों के बुनियादी ढांचे की तस्वीर तय करेंगे। इसके लिए मकसद में निरंतरता और अमल में दृढ़ता चाहिए। अल्ट्राटेक इस पल को सभी हितधारकों के लिए स्थायी मूल्य में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।"

 

अल्ट्राटेक भारत में हर तीन में से एक घर बनाने में मदद करती है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की हर पांच में से दो किलोमीटर कंक्रीट सड़क में और देशभर में हर पांच में से चार किलोमीटर मेट्रो रेल में इसी का सीमेंट लगा है। नया संसद भवन (सेंट्रल विस्टा), मुंबई कोस्टल रोड, द्वारका एक्सप्रेसवे, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, सोनमर्ग सुरंग और मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर जैसे देश के तमाम ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में यही सीमेंट इस्तेमाल हुआ है।

 

अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री के. सी. झंवर ने कहा, "अल्ट्राटेक की क्षमता वृद्धि कई राज्यों में जैविक विस्तार और रणनीतिक अधिग्रहणों के दम पर हुई है। इससे देशभर में उत्‍पादन का एक ऐसा नेटवर्क तैयार हुआ है जो दूरदराज के इलाकों तक पहुंचता है। हम अपने हर साझीदार के शुक्रगुजार हैं, चाहे वे ग्राहक हों, आपूर्तिकर्ता, कर्मचारी या समुदाय। इन सबने मिलकर इस पड़ाव को न सिर्फ संभव बनाया बल्कि स्वाभाविक भी।"

जैसे-जैसे अल्ट्राटेक 200 करोड़ टन सालाना से आगे बढ़ रही है, पर्यावरण के अनुकूल विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता भी उतनी ही मजबूत बनी हुई है। कंपनी प्रति टन सीमेंट में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाने, वैकल्पिक ईंधन और कच्चे माल का उपयोग बढ़ाने और अपनी पूरी मूल्य श्रृंखला में हरित निर्माण तरीकों को अपनाने पर काम कर रही है। अल्ट्राटेक के लिए पैमाना और पर्यावरण की जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, इन्हें दीर्घकालिक मूल्य सृजन के दो स्तंभों के रूप में साथ-साथ आगे बढ़ाया जाता है।

अल्ट्राटेक के विस्तार का अगला दौर शुरू हो चुका है। 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के पूंजी निवेश के साथ चल रहे प्रोजेक्ट पूरे होते ही कंपनी की वैश्विक सीमेंट उत्पादन क्षमता 240 करोड़ टन सालाना से ऊपर पहुंच जाएगी। 

               अल्ट्राटेक चीन के बाहर, दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बनने की ओर अग्रसर है

               16,000 करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत व्यय के साथ, वर्तमान में जारी क्षमता विस्तार परियोजनाओं के पूरा होने पर यह 240 एमटीपीए के लक्ष्य तक पहुँचने की राह पर है

 

मुंबई : आदित्य बिड़ला ग्रुप की सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड ने भारत में इसकी स्थापित सीमेंट उत्पादन क्षमता सालाना 20 करोड़ टन से पार पहुंचने की घोषणा की है। आज कंपनी तीन नई सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट चालू कर रही है जिनकी कुल क्षमता 87 लाख टन सालाना है। इसी के साथ अल्ट्राटेक चीन के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बन जाएगी।

ये तीन नई यूनिट शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश), पतरातू (झारखंड) और विजाग (आंध्र प्रदेश) में लगाई गई हैं। इनकी जगह का चुनाव सोची-समझी रणनीति से किया गया है। ये यूनिट उत्तर भारत के तेजी से बढ़ते निर्माण गलियारे, झारखंड के औद्योगिक दिल और आंध्र प्रदेश के तेजी से शहरीकरण हो रहे तटीय इलाके को सेवा देंगी। इनके जुड़ने के बाद भारत में अल्ट्राटेक की कुल क्षमता 200.1 करोड़ टन सालाना और वैश्विक क्षमता 205.5 करोड़ टन सालाना हो गई है, जिसमें यूएई, बहरीन और श्रीलंका में 54 लाख टन सालाना की क्षमता भी शामिल है।

अल्ट्राटेक की तरक्की की रफ्तार उसके पैमाने जितनी ही हैरान करने वाली है। 100 करोड़ टन सालाना तक पहुंचने में 36 साल लगे, यह मुकाम 2019 में मिला था। अगले 100 करोड़ टन सालाना सात साल से भी कम में हासिल हो गए। यह रफ्तार एक साथ दो बातें कहती है, कंपनी की गजब की काम करने की क्षमता और भारत के बुनियादी ढांचे की अदम्य महत्वाकांक्षा।

इस मौके पर आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन श्री कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा, "एक दशक से भी पहले हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया के जरिए एक परिभाषित दृष्टि सामने रखी। यह देश की उत्‍पादन महत्वाकांक्षा को फिर से जगाने और उसे वैश्विक स्तर पर ले जाने का आह्वान था जो विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता की बुनियाद बने। अल्ट्राटेक ने इस दृष्टि को जमीन पर उतारा है, महत्वाकांक्षा को अमल से जोड़कर और घरेलू ताकत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से मिलाकर। 200 करोड़ टन सालाना का यह पड़ाव दुनिया में भारत की जगह भी बताता है। एक ऐसा भारत जो अपनी महत्वाकांक्षाओं, अपने अमल और अपने आत्मविश्वास में बड़े सपनों के साथ सहज हो गया है। भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहां अगले दशक के फैसले आने वाली पीढ़ियों के बुनियादी ढांचे की तस्वीर तय करेंगे। इसके लिए मकसद में निरंतरता और अमल में दृढ़ता चाहिए। अल्ट्राटेक इस पल को सभी हितधारकों के लिए स्थायी मूल्य में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।"

अल्ट्राटेक भारत में हर तीन में से एक घर बनाने में मदद करती है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की हर पांच में से दो किलोमीटर कंक्रीट सड़क में और देशभर में हर पांच में से चार किलोमीटर मेट्रो रेल में इसी का सीमेंट लगा है। नया संसद भवन (सेंट्रल विस्टा), मुंबई कोस्टल रोड, द्वारका एक्सप्रेसवे, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, सोनमर्ग सुरंग और मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर जैसे देश के तमाम ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में यही सीमेंट इस्तेमाल हुआ है।

अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री के. सी. झंवर ने कहा, "अल्ट्राटेक की क्षमता वृद्धि कई राज्यों में जैविक विस्तार और रणनीतिक अधिग्रहणों के दम पर हुई है। इससे देशभर में उत्‍पादन का एक ऐसा नेटवर्क तैयार हुआ है जो दूरदराज के इलाकों तक पहुंचता है। हम अपने हर साझीदार के शुक्रगुजार हैं, चाहे वे ग्राहक हों, आपूर्तिकर्ता, कर्मचारी या समुदाय। इन सबने मिलकर इस पड़ाव को न सिर्फ संभव बनाया बल्कि स्वाभाविक भी।"

जैसे-जैसे अल्ट्राटेक 200 करोड़ टन सालाना से आगे बढ़ रही है, पर्यावरण के अनुकूल विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता भी उतनी ही मजबूत बनी हुई है। कंपनी प्रति टन सीमेंट में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाने, वैकल्पिक ईंधन और कच्चे माल का उपयोग बढ़ाने और अपनी पूरी मूल्य श्रृंखला में हरित निर्माण तरीकों को अपनाने पर काम कर रही है। अल्ट्राटेक के लिए पैमाना और पर्यावरण की जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, इन्हें दीर्घकालिक मूल्य सृजन के दो स्तंभों के रूप में साथ-साथ आगे बढ़ाया जाता है।

अल्ट्राटेक के विस्तार का अगला दौर शुरू हो चुका है। 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के पूंजी निवेश के साथ चल रहे प्रोजेक्ट पूरे होते ही कंपनी की वैश्विक सीमेंट उत्पादन क्षमता 240 करोड़ टन सालाना से ऊपर पहुंच जाएगी।

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