भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने साल 2025 में लगभग 11 अरब डॉलर (करीब ₹91,000 करोड़) की फंडिंग जुटाई। TechCrunch की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि कुल निवेश मजबूत बना रहा, लेकिन निवेशकों का रुख पहले से कहीं ज़्यादा चुनिंदा और सतर्क नजर आया।
एक नज़र में फंडिंग के प्रमुख आंकड़े
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2025 में कुल स्टार्टअप फंडिंग: करीब 11 अरब डॉलर
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डील्स की संख्या में गिरावट: लगभग 39 प्रतिशत साल-दर-साल
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AI स्टार्टअप्स को फंडिंग: करीब 643 मिलियन डॉलर
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AI सेक्टर में डील्स: लगभग 100
कम डील्स, लेकिन ज़्यादा फोकस
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही कुल फंडिंग मजबूत रही, लेकिन फंडिंग राउंड्स की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसका मतलब है कि निवेशक अब कम स्टार्टअप्स में, लेकिन सोच-समझकर पैसा लगा रहे हैं।
इस पर भारत वेंचर्स के पार्टनर अनिल गुप्ता कहते हैं,
“निवेशक अब संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर ध्यान दे रहे हैं। इस माहौल में वही स्टार्टअप्स फंडिंग पा रहे हैं जिनके पास साफ बिज़नेस मॉडल और मज़बूत यूनिट इकॉनॉमिक्स हैं।”
शुरुआती स्टेज के स्टार्टअप्स में बनी रही दिलचस्पी
लेट-स्टेज फंडिंग में गिरावट के बावजूद, अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स के लिए निवेशकों की रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई। जिन कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट और कस्टमर की समझ दिखाई, उन्हें फंडिंग मिलती रही।
समिट कैपिटल की स्ट्रैटेजी हेड रितिका शर्मा के अनुसार,
“जो फाउंडर्स अपने ग्राहकों को अच्छी तरह समझते हैं और जिनके पास प्रोडक्ट की साफ मांग है, वे आज भी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। 2025 अनुशासित ग्रोथ का साल रहा।”
AI सेक्टर में भारत अभी पीछे
भारत में AI स्टार्टअप्स को 2025 में करीब 643 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली, जो अमेरिका जैसे देशों की तुलना में काफी कम है। इससे साफ है कि भारत में AI सेक्टर के लिए अभी बड़ी ग्रोथ की संभावना मौजूद है।
2026 के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की यह सतर्कता भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को ज़्यादा मजबूत और टिकाऊ बना सकती है। अब ध्यान तेज़ी से विस्तार करने के बजाय, लंबे समय तक टिकने वाले बिज़नेस बनाने पर है।
2026 में ऐसे स्टार्टअप्स को ज़्यादा मौके मिल सकते हैं जो मुनाफे की साफ दिशा और मजबूत बुनियाद के साथ आगे बढ़ रहे हों।