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Meta के CTO ने छंटनी का समर्थन किया, कहा VR में निवेश को वास्तविक ग्रोथ के अनुसार रखना ज़रूरी

Meta के CTO ने छंटनी का समर्थन किया, कहा VR में निवेश को वास्तविक ग्रोथ के अनुसार रखना ज़रूरी

Meta के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर एंड्रयू बॉसवर्थ ने कंपनी द्वारा की गई हालिया छंटनी का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वर्चुअल रियलिटी में निवेश को उतना ही रखा जाना चाहिए, जितनी तेज़ी से यह तकनीक आगे बढ़ रही है।

दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बोलते हुए बॉसवर्थ ने कहा कि Meta को अभी भी VR और मेटावर्स पर भरोसा है, लेकिन VR तकनीक को अपनाने की रफ्तार उम्मीद से धीमी रही है। इसी वजह से कंपनी को अपने खर्च को “सही स्तर” पर लाने की ज़रूरत पड़ी।

Meta ने छंटनी क्यों की

Meta ने हाल ही में अपने Reality Labs डिवीजन में लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है। इससे 1,000 से ज़्यादा कर्मचारियों पर असर पड़ा है।

Reality Labs, Meta के VR और मेटावर्स प्रोजेक्ट्स पर काम करता है, जिनमें Meta Quest VR हेडसेट, VR सॉफ्टवेयर और Horizon Worlds जैसे वर्चुअल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। लेकिन VR हेडसेट्स की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है, जिस कारण कंपनी को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।

बॉसवर्थ ने साफ़ कहा कि अगर यूज़र्स की संख्या तेज़ी से नहीं बढ़ रही है, तो उसी स्तर पर भारी निवेश जारी रखना सही नहीं है।

VR से बाहर नहीं निकल रही Meta

Meta ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये छंटनियाँ VR या मेटावर्स को छोड़ने का संकेत नहीं हैं। कंपनी सिर्फ़ अपने फोकस को बदल रही है और उन क्षेत्रों में खर्च कम कर रही है, जहाँ अपेक्षित नतीजे नहीं मिल रहे।

आने वाले समय में Meta AI आधारित डिवाइस, स्मार्ट ग्लासेस और मोबाइल टेक्नोलॉजी जैसे प्रोडक्ट्स पर ज़्यादा ध्यान दे सकती है, जिन्हें आम लोग ज़्यादा आसानी से इस्तेमाल कर रहे हैं।

Reality Labs में और बदलाव

री-स्ट्रक्चरिंग के तहत Meta ने अपने कई VR गेम स्टूडियो भी बंद कर दिए हैं, जिनमें Armature Studio, Twisted Pixel और Sanzaru शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी फरवरी 2026 तक Horizon Workrooms, यानी वर्चुअल ऑफिस प्लेटफॉर्म, को भी बंद करने की योजना बना रही है।

ये फैसले दिखाते हैं कि Meta उन प्रोजेक्ट्स को बंद कर रही है, जिनकी मांग फिलहाल कम है।

मेटावर्स को लेकर बदली सोच

Meta ने साल 2021 में Facebook से अपना नाम बदलकर मेटावर्स पर बड़ा दांव लगाया था। तब से कंपनी ने VR और AR प्रोजेक्ट्स पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं। लेकिन अब साफ़ हो गया है कि VR को आम लोगों तक पहुँचने में उम्मीद से ज़्यादा समय लग सकता है।

टेक एक्सपर्ट्स मानते हैं कि Meta का यह कदम पूरे टेक इंडस्ट्री में चल रहे ट्रेंड को दर्शाता है, जहाँ कंपनियाँ अब बड़े सपनों के बजाय व्यावहारिक और टिकाऊ ग्रोथ पर ध्यान दे रही हैं।

निष्कर्ष

Meta के CTO के मुताबिक यह छंटनी असफलता नहीं, बल्कि एक ज़रूरी फैसला है। कंपनी अभी भी VR और मेटावर्स पर काम करती रहेगी, लेकिन अब निवेश को बाज़ार की हकीकत के हिसाब से किया जाएगा।

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