• शोध पर जोर देते
हुए प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने बताया कि
पिछले तीन वर्षों में
संस्थान ने ₹120 करोड़ से अधिक के
शोध प्रोजेक्ट्स पूरे किए
• संस्थान रणनीतिक अवसंरचना विस्तार के तहत अतिरिक्त
₹700 करोड़ का निवेश करेगा
मंडी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी, देश के अग्रणी
आईआईटी संस्थानों में से एक,
ने अपना 17वां स्थापना दिवस
मनाया। इस अवसर पर
उद्योग, शिक्षाविद् और वैश्विक शोध
जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों
ने भाग लिया और
भारत के भविष्य के
विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,
रोबोटिक्स एवं उभरती प्रौद्योगिकियों
की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
आईआईटी
मंडी विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार का
अग्रणी केंद्र बन चुका है
और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल्स तथा इंटरडिसिप्लिनरी इंजीनियरिंग
में अत्याधुनिक शोध के लिए
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
बना चुका है। यह
संस्थान ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण
के अनुरूप कार्य कर रहा है।
वर्षों में संस्थान एक
शोध-केंद्रित विश्वविद्यालय के रूप में
विकसित हुआ है, जो
अनुभवात्मक शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता को
बढ़ावा देता है तथा
अपने आदर्श वाक्य ‘स्केलिंग द हाइट्स’ को
निरंतर साकार कर रहा है।
इस
कार्यक्रम में पद्म भूषण
से सम्मानित इंफोसिस लिमिटेड के सह-संस्थापक
श्री क्रिस गोपालकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में
उपस्थित रहे, जबकि स्टैनफोर्ड
रोबोटिक्स लैब, अमेरिका के
निदेशक प्रो. उस्सामा खातिब विशिष्ट अतिथि के रूप में
शामिल हुए। अन्य प्रमुख
गणमान्य व्यक्तियों में आईआईटी मंडी
के संस्थापक निदेशक प्रो. टिमोथी गोंसाल्वेस, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.
अजीत कुमार चतुर्वेदी तथा छत्रपति शाहू
जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.
विनय कुमार पाठक शामिल थे।
आईआईटी
मंडी के 17वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर
आईआईटी
मंडी के निदेशक प्रो.
लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा, "आईआईटी मंडी का 17वां स्थापना दिवस न केवल संस्थान की प्रगति पर चिंतन का अवसर है, बल्कि ‘षोडश’ के सार को भी दर्शाता है, जो युवा ऊर्जा, सृजनशीलता और निरंतर विकास का प्रतीक है। वर्षों में आईआईटी मंडी क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर सिस्टम्स और इंटरडिसिप्लिनरी इंजीनियरिंग में अग्रणी शोध केंद्र के रूप में उभरा है, जिसे ₹120 करोड़ से अधिक के शोध अनुदानों का समर्थन प्राप्त है। नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता पर हमारा निरंतर फोकस ‘फ्यूचर-रेडी लीडर्स’ तैयार कर रहा है, जो तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।"
मुख्य
अतिथि श्री क्रिस गोपालकृष्णन
ने अपने मुख्य संबोधन
में कहा, "हम एक ‘इंटेलिजेंस रिवोल्यूशन’ के दौर में हैं और आने वाले 25–30 वर्ष भारत के लिए वैश्विक स्तर पर नवाचार और तकनीक में नेतृत्व करने का सुनहरा अवसर हैं। आईआईटी मंडी जैसे संस्थान इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जहां प्रतिभा का विकास, ट्रांसलेशनल रिसर्च और उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। मुझे विश्वास है कि यहां के युवा भारत को ‘प्रोडक्ट नेशन’ बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, सुलभ और टिकाऊ तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।"
स्टैनफोर्ड
रोबोटिक्स लैब के निदेशक
प्रो. उस्सामा खातिब ने कहा,
"आईआईटी मंडी उत्कृष्ट शिक्षा और प्रेरणादायक प्राकृतिक वातावरण का अद्भुत संगम है। यह परिसर विश्वस्तरीय नवाचार केंद्र बनने की अपार क्षमता रखता है, जो सिलिकॉन वैली के समकक्ष विकसित हो सकता है। संस्थान का शोध, उद्यमिता और व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर जोर भविष्य के नवोन्मेषी इंजीनियरों और उद्यमियों को तैयार करेगा।"
इस
अवसर पर संकाय सदस्यों
और छात्रों को शोध, शैक्षणिक
और खेल क्षेत्र में
उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित
किया गया।
शोध उपलब्धियां एवं प्रमुख उपलब्धियां
• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटेरियल्स
में अत्याधुनिक शोध सुविधाएं
• पिछले तीन वर्षों में
177 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹120 करोड़
का शोध अनुदान
• ₹17 करोड़ मूल्य के 200 से अधिक कंसल्टेंसी
प्रोजेक्ट्स का निष्पादन
• इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च सेंटर्स और वैश्विक सहयोग
की शुरुआत
• फेलोशिप और इन्क्यूबेशन प्रोग्राम्स
के माध्यम से नवाचार एवं
उद्यमिता को बढ़ावा
सम्मान
एवं समारोह कार्यक्रम के दौरान आईआईटी
मंडी ने छात्रों, संकाय
और कर्मचारियों को शैक्षणिक, शोध
और नवाचार में उनके योगदान
के लिए सम्मानित किया।
इस अवसर पर संस्थान
ने भारत को प्रौद्योगिकी,
शोध और उच्च शिक्षा
के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व
दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण
भूमिका को भी रेखांकित
किया।
आईआईटी
मंडी ‘डीप टेक’ और
प्रौद्योगिकी आधारित विकास के माध्यम से
राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने
के लिए निरंतर प्रतिबद्ध
है।