• टेलीमेडिसिन, एआई-आधारित
डायग्नोस्टिक्स, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग, क्रॉनिक डिजीज
मैनेजमेंट, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मोबाइल डायग्नोस्टिक्स, आपातकालीन
प्रणालियाँ, किफायती उपकरण, पर्यावरणीय स्वास्थ्य लचीलापन, डिजिटल साक्षरता,
फार्मेसी एक्सेस और बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्रों में नवाचारों ने ध्यान
आकर्षित किया।
सीहोर : वीआईटी भोपाल
विश्वविद्यालय ने अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, व्हाइटिंग स्कूल ऑफ
इंजीनियरिंग के सहयोग से हेल्थ-हैक 2026 का सफल आयोजन किया। यह तीन दिवसीय
अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन (10–12 फरवरी 2026) स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा
देने और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के भविष्य को आकार देने वाले परिवर्तनकारी
समाधानों के विकास पर केंद्रित था। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं,
नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों और युवा नवप्रवर्तकों ने भाग लेकर “सभी के लिए
स्वास्थ्य तक पहुँच में सुधार” विषय के अंतर्गत स्केलेबल समाधान तैयार किए।
कार्यक्रम
का उद्घाटन वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. जी. विश्वनाथन के नेतृत्व
में हुआ। इस अवसर पर वाइस प्रेसिडेंट श्री संकर विश्वनाथन, असिस्टेंट वाइस
प्रेसिडेंट सुश्री कदंबरी एस. विश्वनाथन, ट्रस्टी श्रीमती रमानी बालासुंदरम तथा
जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय से को-पैट्रन डॉ. श्रीदेवी सरमा (वाइस डीन –
ग्रेजुएट एजुकेशन, व्हाइटिंग स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, प्रोफेसर – बायोमेडिकल
इंजीनियरिंग, एसोसिएट डायरेक्टर) उपस्थित रहीं। पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह ने
स्वास्थ्य नवाचार के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर कार्यक्रम की शुरुआत
की।
10 फरवरी
को आयोजित प्री-हैकाथॉन कार्यशाला में मुख्य अतिथि डॉ. राम बिलास पचौरी (प्रोफेसर,
आईआईटी इंदौर) तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. संतोष कुमार विश्वकर्मा (मुख्य वैज्ञानिक
अधिकारी, एआईजीजीपीए, मध्य प्रदेश सरकार एवं प्रोफेसर, आईआईटी इंदौर) और डॉ. मुकेश
कुमार (प्रोफेसर, आईआईटी इंदौर) शामिल हुए। इस कार्यशाला ने अंतर्विषयक सीख और
प्रभावशाली स्वास्थ्य समाधानों के विकास के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया।
11 फरवरी
को उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण देते हुए वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के
प्रो-वाइस चांसलर डॉ. टी. बी. श्रीधरन ने स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद खाइयों को
पाटने और वंचित समुदायों के लिए टिकाऊ व समावेशी समाधान तैयार करने में
प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम
में वैश्विक विशेषज्ञों के मुख्य भाषण भी हुए, जिनमें जॉन्स हॉपकिन्स
विश्वविद्यालय की डॉ. हेडी अलावी (कन्वीनर, एसोसिएट डीन – ग्लोबल पार्टनरशिप्स)
प्रमुख रहीं।
डॉ. अलावी
ने विश्व स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने में सहयोगात्मक नवाचार की
शक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इंजीनियरों, सार्वजनिक स्वास्थ्य
विशेषज्ञों और उभरते तकनीकी विशेषज्ञों के बीच अंतर्विषयक साझेदारी से ऐसे टिकाऊ
समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जो उन्नत स्वास्थ्य उपकरणों को अधिक सुलभ और
किफायती बनाते हैं, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि सच्ची
प्रगति केवल अत्याधुनिक आविष्कारों से नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग, समावेशन,
पर्यावरणीय स्थिरता और वास्तविक प्रभाव पर आधारित प्रयासों से संभव है।
विशिष्ट
अतिथि डॉ. वीरेंद्र कुमार (निदेशक, तकनीकी शिक्षा, मध्य प्रदेश) ने भविष्य को आकार
देने में स्वास्थ्य नवाचार के महत्व पर बल दिया, जबकि मुख्य अतिथि डॉ. अरुण
बालकृष्णन (एडवाइज़र टू सीईओ एवं चीफ इनोवेशन ऑफिसर, ओम्नीएक्टिव्स हेल्थ
टेक्नोलॉजीज) ने उद्योग और शिक्षाजगत के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता बताई।
समापन सत्र
में डॉ. श्रीधरन ने स्वागत भाषण दिया और इसके बाद जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के
डॉ. यूसेफ यज़्दी (एसोसिएट प्रोफेसर, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एवं एग्जीक्यूटिव
डायरेक्टर, सेंटर फॉर बायोइंजीनियरिंग इनोवेशन एंड डिजाइन) ने मुख्य भाषण प्रस्तुत
किया।
डॉ. यज़्दी
ने वैश्विक आवश्यकताओं के लिए स्केलेबल स्वास्थ्य समाधानों को विकसित करने वाले
सशक्त नवाचार इकोसिस्टम पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रभावी चिकित्सा
तकनीकें आवश्यकता-आधारित डिज़ाइन, चिकित्सक-इंजीनियर साझेदारी और विचार से
व्यावसायीकरण तक की अनुशासित प्रक्रिया से सफल होती हैं, विशेषकर दूरदराज़ और
वंचित क्षेत्रों के लिए।
हैकाथॉन
में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग
लिया। जनवरी 2026 में हुए प्रथम मूल्यांकन चरण में आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी,
सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की 579 टीमों (2,767 प्रतिभागी)
ने भाग लिया। इनमें से 231 टीमें (1,160 प्रतिभागी) अंतिम चरण के लिए वीआईटी भोपाल
पहुँचीं।
प्रतिभागियों
ने टेलीमेडिसिन, एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, मानसिक
स्वास्थ्य सहयोग, क्रॉनिक डिजीज मैनेजमेंट, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, फार्मेसी
एक्सेस, पर्यावरणीय स्वास्थ्य लचीलापन और बुजुर्गों की देखभाल जैसे विषयों पर
कार्य किया।
शीर्ष तीन विजेता टीमें इस प्रकार रहीं:
प्रथम पुरस्कार (₹1,00,000):
टीम
एटरनिया, पारुल विश्वविद्यालय, गुजरात –
सदस्य:
प्रियंशी राठौर, यश कुमार खटीक, गौरव शाह, प्रतीक सोनटक्के
(छात्रों
में मानसिक स्वास्थ्य की पहुँच बढ़ाने हेतु सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म)
द्वितीय पुरस्कार (₹50,000):
टीम
केबीएनयू-बी, खाजा बंधनवाज़ विश्वविद्यालय, कर्नाटक –
सदस्य:
श्रुति वी. एम., अभिलाष हिरापुर, अफीफा नसीम, मोहम्मद ओवैस, अजहर अली, शेख सोहली
अली
(“स्वस्थपथ”
– एआई आधारित डिजिटल हेल्थ स्कीम नेविगेटर, बहुभाषी व वॉयस-सपोर्ट सुविधा सहित)
तृतीय पुरस्कार (₹25,000):
टीम
मेथक्साई, वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय –
सदस्य:
अनिकेत कुमार, ध्रुव प्रसाद वारियर, रोहन जारिया, देवयानी हेमराज बिडवे, अक्षरा
शाह, कुशाग्र दिव्या
(24x7 आवश्यक ओटीसी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने वाला एआई आधारित मेडिसिन
वेंडिंग सिस्टम)
विजेताओं
को वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और डीन द्वारा
पदक, प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
हेल्थ-हैक
2026 के संयोजक डॉ. सिद्धार्थ मैती और डॉ. सिद्धार्थ सिंह चौहान ने कहा कि यह
आयोजन अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सेतु बनकर सार्थक स्वास्थ्य नवाचारों को
बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट
डॉ. अंजू शुक्ला ने प्रस्तुत की और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. लक्ष्मी डी. ने दिया।
हेल्थ-हैक
2026 ने सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और हाइब्रिड तकनीकों को मिलाकर आवश्यकता-आधारित
अनुशासित नवाचार का प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने शोध-आधारित शिक्षा, वैश्विक सहयोग
और सामाजिक प्रभाव देने वाली प्रौद्योगिकी के प्रति वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की
प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
मजबूत
अकादमिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ, विश्वविद्यालय समावेशी
स्वास्थ्य नवाचार और भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं का उत्प्रेरक बनकर उभरता जा
रहा है।