पेरिस | इंटरनेशनल न्यूज
फ्रांस की फर्स्ट लेडी ब्रिजिट मैक्रों (Brigitte Macron) को लेकर सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी फैलाने के मामले में फ्रांस की अदालत ने 10 लोगों को साइबरबुलिंग का दोषी ठहराया है। अदालत के अनुसार, इन लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर यह झूठा दावा फैलाया कि ब्रिजिट मैक्रों का जन्म पुरुष के रूप में हुआ था।
दोषियों में 8 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर साइबर उत्पीड़न (Cyber Harassment) मानते हुए सभी को अलग-अलग सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
अदालत में सामने आया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर यह झूठा दावा किया कि ब्रिजिट मैक्रों का असली नाम जीन-मिशेल ट्रोन्यू है, जो वास्तव में उनके बड़े भाई का नाम है। यह दावा पूरी तरह भ्रामक और असत्य पाया गया।
कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अफवाहें व्यक्तिगत गरिमा और सार्वजनिक जीवन को नुकसान पहुंचाती हैं।
कोर्ट का फैसला
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एक आरोपी को 6 महीने की जेल
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अन्य को 8 महीने की निलंबित सजा (Suspended Sentence)
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सभी दोषियों पर जुर्माना
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साइबरबुलिंग अवेयरनेस ट्रेनिंग अनिवार्य
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर 6 महीने का प्रतिबंध
🇺🇸 अमेरिका में भी चल रही सुनवाई
इस मामले से जुड़ी एक अन्य सुनवाई अमेरिका की अदालत में भी चल रही है। ब्रिजिट मैक्रों और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी पॉडकास्टर कैंडेस ओवेन्स (Candace Owens) के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
आरोप है कि कैंडेस ओवेन्स ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट और पॉडकास्ट शो में लंबे समय तक यही झूठा दावा दोहराया।
फिलहाल यह मामला अमेरिकी अदालत में विचाराधीन है।