अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने जा रहा है। यह फैसला अमेरिकी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अमेरिकी सरकार ने कहा है कि वह अब कई वैश्विक संस्थाओं में भागीदारी समाप्त करेगी।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका संयुक्त राष्ट्र से जुड़े 31 संगठनों और अन्य 35 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हटेगा। सरकार का कहना है कि ये संगठन अब अमेरिकी राष्ट्रीय हितों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं।
अमेरिका यह फैसला क्यों ले रहा है
अमेरिकी नेताओं का कहना है कि कई अंतरराष्ट्रीय संगठन महंगे हैं और उनका प्रभाव सीमित है। सरकार चाहती है कि वह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बजाय सीधे देशों के साथ बातचीत और समझौते करे।
अमेरिका का यह भी कहना है कि वह घरेलू मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहता है और वैश्विक संस्थाओं पर खर्च कम करना चाहता है।
कौन से संगठन प्रभावित होंगे
इस फैसले से जलवायु, ऊर्जा, श्रम और विकास से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय संगठन प्रभावित होंगे। इनमें पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाले संगठन भी शामिल हैं।
अमेरिका ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस से बाहर निकलने का भी फैसला किया है। यह संगठन भारत के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।
वैश्विक प्रतिक्रिया
इस फैसले पर दुनिया भर में मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। समर्थकों का कहना है कि इससे अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा बचेगा और देश अपनी विदेश नीति पर ज्यादा नियंत्रण रख सकेगा।
वहीं आलोचकों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक सहयोग कमजोर होगा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मिलकर काम करना मुश्किल हो सकता है।
आगे क्या असर होगा
इन संगठनों से बाहर निकलकर अमेरिका अब बहुपक्षीय सहयोग से दूरी बना रहा है। सरकार आगे चलकर द्विपक्षीय रिश्तों पर ज्यादा ध्यान देगी, यानी देशों के साथ सीधे बातचीत करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से जलवायु परिवर्तन, व्यापार, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर असर पड़ सकता है।