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फरीदाबाद आतंकी मामला: क्या अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब में बनाया जा रहा था RDX?

फरीदाबाद आतंकी मामला: क्या अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब में बनाया जा रहा था RDX?

फरीदाबाद में हुए एक बड़े आतंकी खुलासे ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है। पुलिस को शक है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब का इस्तेमाल विस्फोटक बनाने के लिए किया गया था।

मामला तब सामने आया जब पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ. मुज़म्मिल शकील (35) को गिरफ्तार किया, जो फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने करीब 2,900 किलो विस्फोटक और हथियारों का जखीरा बरामद किया। ये सामान फरीदाबाद के धौज इलाके में डॉक्टर द्वारा किराए पर लिए गए दो कमरों से मिला।

पुलिस को क्या मिला

पहले ठिकाने से पुलिस ने 358 किलो अमोनियम नाइट्रेट, डिटोनेटर और बम बनाने का सामान बरामद किया। दूसरे ठिकाने से 2,500 किलो से ज्यादा विस्फोटक और कई हथियार — जिनमें चीनी पिस्टल, बेरेटा पिस्टल, AK-56 राइफल और क्रिनकोव राइफल शामिल हैं — जब्त किए गए।

पुलिस का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में बरामद विस्फोटक का इस्तेमाल किसी बड़े आतंकी हमले के लिए किया जा सकता था।

यूनिवर्सिटी पर शक

जांच एजेंसियों को शक है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब में RDX या अन्य खतरनाक विस्फोटक तैयार किए गए हो सकते हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या यूनिवर्सिटी की सुविधाओं का इस्तेमाल कट्टरपंथ फैलाने, फंडिंग या साजिश रचने के लिए किया गया।

शुरुआती जांच में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसर गज़वत-उल-हिंद (AGuH) से लिंक की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी एन्क्रिप्टेड मोबाइल ऐप्स और फर्जी चैरिटी संस्थाओं के जरिए पैसा और जानकारी भेजते थे।

जांच जारी

दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश की टीमें मिलकर इस मामले की जांच कर रही हैं। केस को यूएपीए (UAPA), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया है।

फोरेंसिक टीमें अब यह जांच कर रही हैं कि क्या यूनिवर्सिटी की लैब या अस्पताल के उपकरणों का इस्तेमाल रसायन मिलाने या विस्फोटक तैयार करने के लिए किया गया। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां होंगी।

अधिकारियों ने कहा कि यह मामला इस बात की चेतावनी है कि अब शिक्षित लोग और संस्थान भी आतंक के जाल में फंसाए जा रहे हैं, जिससे आतंकवाद का तरीका और खतरनाक होता जा रहा है।

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