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बच्चों की सुरक्षा मामले में न्यू मैक्सिको में कोर्ट पहुंची Meta

बच्चों की सुरक्षा मामले में न्यू मैक्सिको में कोर्ट पहुंची Meta

फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी Meta बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर न्यू मैक्सिको में अदालत का सामना कर रही है। फरवरी 2026 में शुरू हुआ यह ट्रायल काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर भविष्य में यह तय करने पर पड़ सकता है कि टेक कंपनियों को नाबालिग यूजर्स की सुरक्षा के लिए कितनी जिम्मेदारी उठानी होगी।

यह मुकदमा 2023 में न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज़ ने दायर किया था। राज्य का आरोप है कि Meta अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों को यौन शोषण और खतरनाक संपर्क से बचाने में नाकाम रही। अभियोजकों का कहना है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के कुछ फीचर्स ने गलत इरादे रखने वाले वयस्कों के लिए नाबालिगों तक पहुंच आसान बना दी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे लोगों को लगा कि बच्चे सुरक्षित हैं।

जांच के दौरान अधिकारियों ने बच्चों के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर सिस्टम को परखा। उनका दावा है कि इन अकाउंट्स को आपत्तिजनक सामग्री दिखाई गई और कई वयस्कों से संदिग्ध संदेश भी मिले। राज्य का मानना है कि इससे पता चलता है कि उम्र की जांच और सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त मजबूत नहीं थे।

Meta ने इन आरोपों से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि उसने किशोरों की सुरक्षा के लिए कई सालों से टूल्स और तकनीक विकसित की है, जिनमें प्राइवेसी सेटिंग्स, रिपोर्टिंग सिस्टम और संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ने वाली व्यवस्था शामिल है। कंपनी के वकीलों का तर्क है कि कोई भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हर गलत काम को पूरी तरह रोक नहीं सकता और राज्य केवल नकारात्मक उदाहरणों को सामने रख रहा है।

न्यू मैक्सिको यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि Meta ने उपभोक्ता सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन किया। अगर अदालत राज्य की दलीलों से सहमत होती है, तो कंपनी पर भारी जुर्माना लग सकता है और उसे अपने प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव करने के आदेश मिल सकते हैं। राज्य चाहता है कि उम्र की जांच सख्त हो, खतरनाक सामग्री तेजी से हटे और बच्चों को क्या दिखाया जा रहा है, इसे नियंत्रित करने वाले सिस्टम में सुधार हो।

कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे कई मामले अलग-अलग राज्यों में दायर हुए हैं, लेकिन अदालत तक पहुंचने वाले मामलों में यह सबसे प्रमुख है। इसलिए इसका फैसला आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नियम तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

सुनवाई कई हफ्तों तक चल सकती है। पूर्व कर्मचारी, सुरक्षा विशेषज्ञ और जांच अधिकारी अदालत में बता सकते हैं कि कंपनी को बच्चों के सामने मौजूद खतरों की कितनी जानकारी थी और उन्हें कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए। ट्रायल खत्म होने तक यह मामला साफ कर सकता है कि ऑनलाइन दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए कंपनियों की जिम्मेदारी कितनी है।

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