नई दिल्ली। ‘फोरम फॉर प्रोग्रेसिव प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा किए जाने वाले मौजूदा निरीक्षणों में बुनियादी गिग-वर्कर सेफ्टी और वर्किंग कंडीशन की जांच को भी शामिल किया जाए। एक कार्डिनेटेड इन्फोर्समेंट मैकेनिज्म (समन्वित प्रवर्तन तंत्र) करदाताओं/टैक्स पेयर्स के धन पर बोझ डाले बिना या ब्यूरोकेसी को अवरुद्ध किए बिना श्रमिक सुरक्षा/वर्कर्स प्रोटेक्शन को मजबूत कर सकता है।
एफएसएसएआई और एफडीए रेस्तरां, डार्क स्टोर्स, फुलफिलमेंट सेंटर्स, वेयरहाउस और अन्य प्रतिष्ठानों का दौरा करते रहे हैं और ये वही स्थान हैं, जहां प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम करते हैं। इन्फोर्समेंट/प्रवर्तन का यह दायरा अधिकारियों को श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को चिह्नित करने और उन्हें संबंधित श्रम अधिकारियों को भेजने का एक प्रैक्टिकल अवसर प्रदान करता है।
एफएसएसएआई- श्रम संयुक्त निरीक्षण/लेबर जॉइंट इंस्पेक्शन प्रोटोकॉल के तहत खाद्य सुरक्षा निरीक्षण के दौरान देखी गई गंभीर चिंताओं को श्रम विभागों के साथ साझा किया जा सकता है। इनमें पीने के पानी और स्वच्छता तक पहुंच, सुरक्षित प्रवेश और निकास, आग और आपातकालीन तैयारी, प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था, लाइटिंग और वेंटिलेशन, विश्राम एरियाज और अन्य बुनियादी व्यावसायिक-सुरक्षा स्थितियां शामिल हो सकती हैं।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डाटा के अनुसार, एफएसएसएआई ने प्रमुख कंपनियों और प्रतिष्ठानों को कवर करते हुए 150 से अधिक नोटिस जारी किए हैं, जबकि नियामक कार्रवाई क्विक-कॉमर्स संचालन, खाद्य-सेवा प्रतिष्ठानों और अन्य व्यवसायों तक भी बढ़ाई गई है।
‘फोरम फॉर प्रोग्रेसिव प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ के संयोजक ने कहा कि प्लेटफॉर्म वर्कर्स भारत की फूड, रिटेल, और डिजिटल-कॉमर्स अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग हैं। फिर भी पारंपरिक प्रवर्तन ढांचे/ ट्रेडिशनल इन्फोर्समेंट फ्रेमवर्क्स के भीतर उनकी कार्य स्थितियां/वर्किंग कंडीशन अदृश्य बनी रहती हैं। हम सरकार से कोई नई निरीक्षण ब्यूरोकेसी बनाने के लिए नहीं कह रहे हैं। हम चाहते हैं कि मौजूदा प्रवर्तन/इन्फोर्समेंट को अधिक समझदारी से काम में लाया जाए। जब एफएसएसएआई का कोई अधिकारी पहले से ही किसी रेस्तरां, डार्क स्टोर या फुलफिलमेंट सेंटर का निरीक्षण कर रहा है, तो श्रमिक सुरक्षा से जुड़ी स्पष्ट समस्याओं की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें श्रम विभाग को भेजा जाना चाहिए। एक निरीक्षण से दो जनहित उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है—उपभोक्ता की सुरक्षा और श्रमिक की सुरक्षा।
फोरम सरकार से आग्रह करता है कि वह क्विक कॉमर्स डार्क स्टोर्स और फुलफिलमेंट सेंटर्स पर विशेष ध्यान दे, जहां डिलीवरी पार्टनर और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स अपने काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिताते हैं। यह एक सरल रेफरल तंत्र का प्रस्ताव करता है, जो एफएसएसएआई अधिकारियों को आगे की जांच के लिए संबंधित श्रम आयुक्त, निरीक्षक या सक्षम प्राधिकारी को संदिग्ध श्रम उल्लंघनों की सूचना देने में सक्षम बनाता है।
‘अमेजन इंडिया वर्कर्स यूनियन’ ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इस बात पर जोर दिया कि खाद्य-वितरण पारिस्थितिकी तंत्र/फूड डिलिवरी इकोसिस्टम में श्रमिक सुरक्षा केवल उन परिसरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, जहां से ऑर्डर शुरू होते हैं।
अमेजन इंडिया वर्कर्स यूनियन के एक प्रवक्ता ने कहा कि फूड सेफ्टी/खाद्य सुरक्षा को केवल किचन/रसोईघर, वेयरहाउस और रेस्तरां के मामले के रूप में नहीं देखा जा सकता है। फूड डिलीवरी वर्कर्स खाद्य-आपूर्ति श्रृंखला/फूड सप्लाई चेन की एक आवश्यक कड़ी हैं और उन्हें भी फूड सेफ्टी, हाइजिन और सेफ हैंडलिंग प्रेक्टिसेस में उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। डिलीवरी पार्टनर को खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए आवश्यक ज्ञान और प्रशिक्षण से लैस किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन करते समय सुरक्षित कार्य परिस्थितियां, बुनियादी सुविधाएं और उचित सुरक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए। खाद्य-सुरक्षा और श्रम अधिकारियों के बीच एक समन्वित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि उपभोक्ताओं और श्रमिकों दोनों की सुरक्षा हो।
फोरम ने इस बात पर जोर दिया कि उसका प्रस्ताव व्यवसायों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ डालने के बजाय जोखिम-आधारित, आनुपातिक और समन्वित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए है। इसने कहा कि मौजूदा प्रवर्तन तंत्र को एक साथ लाने से सरकार के लिए एक फोर्स मल्टीप्लाय बन सकता है। साथ ही, यह सुनिश्चित हो सकता है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के दौरान प्लेटफॉर्म वर्कर्स की अनदेखी न हो।
फोरम ने श्रम मंत्रालय, एफएसएसएआई और संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे प्रस्तावित संयुक्त-प्रवर्तन ढांचे पर विचार करें और इसके कार्यान्वयन पर परामर्श शुरू करें।