- दुर्गम और कठिन इलाकों में खनिजों की खोज के लिए विकसित यह भारत की पहली हाई-स्पीड हाइड्रोस्टैटिक पोर्टेबल रिग है, जो 1,000 मीटर तक हाई-स्पीड ड्रिलिंग करने में सक्षम है।
- वेदांता के पास देश में सबसे अधिक क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स हैं। वैश्विक मांग 2030 तक तीन गुना होने की उम्मीद के बीच कंपनी भारत की आयात निर्भरता कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभाने की तैयारी में है।
नई
दिल्ली : वेदांता लिमिटेड (NSE: VEDL; BSE:
500295), धातु, क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजी के
क्षेत्र में दुनिया की
प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
कंपनी ने टेक्नोलॉजी आधारित
इनोवेशन को बढ़ावा देने
की दिशा में एक
और कदम उठाते हुए
भारत की पहली हाई-टेक, हाई-स्पीड हाइड्रोस्टैटिक पोर्टेबल रिग को कमीशन किया
है। अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस इन
रिग्स को छत्तीसगढ़ में
वेदांता की दो प्रमुख
एक्सप्लोरेशन परियोजनाओं में तैनात किया
गया है। यहां सोने
के साथ-साथ निकेल,
क्रोमियम और प्लैटिनम ग्रुप
एलिमेंट्स जैसे क्रिटिकल मिनरल्स
की खोज की जा
रही है।
क्रिटिकल
मिनरल्स की खोज के
लिए विशेष तकनीकी विशेषज्ञता और गहरी ड्रिलिंग
क्षमता की जरूरत होती
है। यह ऐसा क्षेत्र
है, जहां बहुत कम
राष्ट्रीय और वैश्विक कंपनियों
के पास जरूरी क्षमताएं
मौजूद हैं। ऊर्जा संक्रमण
की रफ्तार बढ़ने के साथ क्रिटिकल
मिनरल्स की मांग भी
तेजी से बढ़ रही
है। ऐसे में वेदांता
अपने एकीकृत स्मेल्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक भू-वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल कर
जटिल खनन ब्लॉक्स को
विकसित करने और क्रिटिकल
मिनरल्स की कमी को
दूर करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाने की स्थिति में
है।
दुर्गम
और कठिन इलाकों को
ध्यान में रखकर तैयार
की गई यह रिग
1,000 मीटर तक हाई-स्पीड ड्रिलिंग करने में सक्षम
है, जबकि सामान्य तौर
पर इस्तेमाल होने वाली रिग्स
की ड्रिलिंग क्षमता करीब 300 से 400 मीटर होती है।
साथ ही, एक स्थान
से दूसरे स्थान पर उपकरण ले
जाने में लगने वाले
समय को भी कम
किया जा सकता है।
देश में एक्सप्लोरेशन क्षमता
के लिहाज से इसे एक
महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा
है। इसके इस्तेमाल से
भारत के अभी तक
बड़े पैमाने पर अप्रयुक्त खनिज
भंडार तक तेज, सुरक्षित, कम हस्तक्षेप और अधिक प्रभावी तरीके से पहुंच बनाई जा सकेगी।
क्रिटिकल
मिनरल्स की खोज के
क्षेत्र में वेदांता ने
अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
कंपनी ने 10 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स हासिल किए हैं। इनमें
सोना, मैंगनीज, कॉपर, निकेल-क्रोमियम-PGE (प्लैटिनम ग्रुप एलिमेंट्स), टंगस्टन, ग्रेफाइट, वैनेडियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स
और पोटाश शामिल हैं। इनमें से
पांच ब्लॉक्स में एक्सप्लोरेशन का
काम शुरू हो चुका
है। हाल ही में
वेदांता को आंध्र प्रदेश
के पुन्नम मैंगनीज ब्लॉक के लिए सफल बोलीदाता भी घोषित किया
गया है।
भारत
में खनिज संसाधनों की बड़ी संभावनाएं
सरकार
के अनुमान के मुताबिक भारत
के करीब 80 प्रतिशत खनिज संसाधनों की अभी तक खोज नहीं हो पाई है। सोना चिकित्सा क्षेत्र,
हाई-रिलायबिलिटी इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य
रणनीतिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण
है। वहीं, कॉपर और निकेल
जैसे क्रिटिकल मिनरल्स AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के
लिए बेहद अहम हैं।
भारत
के सामने अब केवल खनिजों
का दोहन करने की
चुनौती नहीं है, बल्कि
एक्सप्लोरेशन से लेकर माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग, रिसाइक्लिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की जरूरत है।
भारत
के लिए असली अवसर
इस बात में है
कि जमीन के नीचे
कितने खनिज मौजूद हैं,
यह ही महत्वपूर्ण नहीं
है। असली सफलता इस
बात से तय होगी
कि इन संसाधनों के जरिए देश जमीन के ऊपर कितना आर्थिक मूल्य और औद्योगिक क्षमता तैयार कर पाता है।
इंटरनेशनल
एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, नेट
जीरो एमिशन परिदृश्य के तहत क्लीन
एनर्जी टेक्नोलॉजी के लिए वैश्विक
क्रिटिकल मिनरल्स की मांग 2030 तक लगभग तीन गुना और 2040 तक चार गुना
हो सकती है। इसके
साथ ही मांग करीब
40 मिलियन टन सालाना तक पहुंचने का
अनुमान है। बढ़ती मांग
के बीच दुनिया के
कई देश अपनी क्रिटिकल
मिनरल सप्लाई चेन को किसी
एक देश या स्रोत
पर निर्भर रहने से बचाने
के लिए नए विकल्प
तलाश रहे हैं। ऐसे
में भारत इस बदलाव
में एक अहम भागीदार
बन सकता है।
भारत
के पास रेयर अर्थ
एलिमेंट्स और अन्य क्रिटिकल
मिनरल्स के पर्याप्त भंडार
हैं, जिससे वह वैश्विक सप्लाई
चेन में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाने की क्षमता रखता
है। हालांकि, इन संसाधनों की
पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद भारत
अभी भी काफी हद
तक आयात पर निर्भर
है।
वेदांता
2.0 : टेक्नोलॉजी
के जरिए बदलाव
वेदांता
2.0 समूह के उस विजन
को दर्शाता है, जिसके तहत
टेक्नोलॉजी आधारित और भविष्य के
लिए तैयार एक ऐसा समूह
विकसित किया जा रहा
है, जिसका फोकस सतत विकास
पर हो। अपने मौजूदा
मुख्य कारोबार को मजबूत करने
के साथ-साथ समूह
क्लीन एनर्जी वैल्यू चेन के हिस्से
के रूप में क्रिटिकल
मिनरल्स के क्षेत्र में
भी तेजी से विस्तार
कर रहा है। कंपनी
ने कई नए मिनरल
ब्लॉक्स हासिल किए हैं और
एक्सप्लोरेशन गतिविधियों को भी बढ़ाया
है।
वेदांता
ग्रुप उन चुनिंदा भारतीय
कंपनियों में शामिल है,
जिनके पास भारत के साथ दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, लाइबेरिया और जाम्बिया में भी खनिज
संपत्तियां हैं। इससे कंपनी
को अलग-अलग क्षेत्रों
में मौजूद विविध और उच्च क्षमता
वाले खनिज संसाधनों तक
पहुंच मिलती है। कंपनी स्थिर
नियामकीय व्यवस्था वाले नए भौगोलिक
क्षेत्रों में विस्तार, भारत
में वैल्यू-एडेड प्रोसेसिंग को
बढ़ावा देने और मजबूत
पर्यावरणीय, सामाजिक एवं गवर्नेंस मानकों
के अनुरूप माइनिंग पार्टनरशिप विकसित करने की योजना
पर काम कर रही
है।