मुंबई : विदेशी मुद्रा विनिमय दर में जारी उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और घरेलू मुद्रा को मजबूती देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों से देश में कम से कम 40 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है, जिससे भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुधरकर 92-93 के स्तर पर वापस आ सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की नवीनतम इकोरैप रिपोर्ट (इश्यू नंबर 09, वित्त वर्ष 27) के अनुसार, मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी तटस्थ नीति (neutral stance) को बनाए रखते हुए अपना ध्यान मुद्रास्फीति (महंगाई) पर सतर्क नजर रखने और बाहरी आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा करने पर केंद्रित किया है। इसके साथ ही, रिपोर्ट में आगामी अगस्त की नीतिगत समीक्षा में भी ब्याज दरों में ठहराव (pause) रहने की संभावना जताई गई है।
एमपीसी ने सर्वसम्मति से बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, कमजोर वैश्विक मांग, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मौसम संबंधी झटकों को देखते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए वास्तविक जीडीपी विकास दर के अनुमान को 30 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 6.6% कर दिया है। दूसरी ओर, मई-जुलाई 2026 के दौरान अल नीनो (El Niño) की स्थिति उभरने की 82% संभावना और कमोडिटी कीमतों के जोखिम के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए सीपीआई (CPI) मुद्रास्फीति के अनुमान को 50 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। कोर इन्फ्लेशन का अनुमान भी 30 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 4.7% हो गया है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि आरबीआई के इस सतर्क रुख से उन सट्टेबाजी और अनावश्यक कयासों पर विराम लग गया है, जिनमें रुपये के कमजोर होकर 100 के स्तर तक जाने की बातें कही जा रही थीं।
विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए आरबीआई ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) और जनरल कैटेगरी में बड़े प्रगतिशील सुधारों की घोषणा की है। सरकार की नई 15, 30 और 40 वर्षीय प्रतिभूतियों (G-secs) को 'फार' (FAR) श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए लंबी अवधि के बॉन्ड्स में निवेश बेहद आसान हो जाएगा। इन उपायों के साथ विदेशी निवेशकों को ब्याज आय पर लगभग ₹4,000–₹5,000 करोड़ और कैपिटल गेन टैक्स पर ₹500–₹1,000 करोड़ की छूट मिलने की उम्मीद है, जिससे सरकार की उधारी लागत कम होगी और रुपये को सहारा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, छोटी अवधि की मैच्योरिटी पर लगी 30% की सीमा को भी हटा दिया गया है, जिससे जनरल रूट के तहत ₹4.06 लाख करोड़ का निवेश क्षेत्र उपलब्ध हो गया है।
केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण परिचालन उपायों की भी घोषणा की है। 30 सितंबर, 2026 तक लागू रहने वाली रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय (forex swap) खिड़की के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को विदेशी बाजारों से बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे पिछले वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में आई 30% की गिरावट को सुधारा जा सके। इसके अलावा, अनिवासी भारतीयों (NRIs) के जमा को आकर्षित करने के लिए आरबीआई विशेष 5 वर्षीय एफसीएनआर-बी (FCNR-B) डिपॉजिट पर हेजिंग लागत (2.5% सालाना) और एसएलआर/सीआरआर लागत का बोझ खुद उठाएगा। इससे बैंक बिना किसी विनिमय जोखिम के ग्राहकों को 5.5% और उससे अधिक की आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश कर सकेंगे, जिससे वर्ष 2013 की तरह रिकॉर्ड $34 अरब से अधिक का फंड जुटाने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में निर्यात से होने वाली कमाई को देश में वापस लाने की समय-सीमा को 15 महीने से घटाकर पुनः 9 महीने करने के आरबीआई के फैसले की भी सराहना की गई है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा (USD) तेजी से भारत आएगी। घरेलू मोर्चे पर बैंकिंग प्रणाली में ऋण की स्थिति मजबूत बनी हुई है और 15 मई, 2026 तक बैंक क्रेडिट में सालाना आधार पर 16.2% की दमदार बढ़त दर्ज की गई है, जिसमें रिटेल, सर्विस सेक्टर और एमएसएमई (MSME) उद्योगों का सबसे बड़ा योगदान रहा है।