साल 2024 में राष्ट्रीय अपराध दर 448.3 से घटकर 418.9 प्रति लाख आबादी हुई; महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 1.5% की कमी
। डिजिटलीकरण के कारण अपराधियों के तौर-तरीकों में बदलाव; साइबर अपराध के मामलों में 17% की भारी बढ़ोतरी
। एसबीआई रिसर्च ने सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के बीच स्थापित किया सीधा संबंध: अपराध में 1% की कमी से अल्पावधि वास्तविक जीडीपी में 0.11% का सुधार
। रिपोर्ट में अपराधों को दर्ज न करने (अंडररिपोर्टिंग) पर जताई गई चिंता; घरेलू हिंसा के मामलों में करीब 4.73 लाख मामलों में एफआईआर दर्ज न होने का अनुमान
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मुंबई : भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नवीनतम इकोरैप रिपोर्ट (इश्यू नंबर 11, वित्त वर्ष 27) के अनुसार, वर्ष 2024 में देश के सभी 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल संज्ञेय अपराधों (cognizable crimes) में सालाना आधार पर 6.0% की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है
सकारात्मक पहलू यह है कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 1.5% की कमी आई है, जो 2023 के 4.48 लाख मामलों से घटकर 2024 में 4.41 लाख मामले रह गए हैं
अपराधों में कमी के मुख्य कारण
एसबीआई रिसर्च ने पारंपरिक अपराधों में आई इस गिरावट के पीछे सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure), उन्नत निगरानी तंत्र और डिजिटलीकरण को मुख्य कारण माना है
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय: राज्यों के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रति व्यक्ति सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में 1% की वृद्धि होने से अपराध दर में लगभग 0.36% की कमी आती है
। 'सेफ सिटी प्रोजेक्ट' जैसी पहलों के माध्यम से शहरों में सीसीटीवी, जीआईएस-आधारित मैपिंग और बेहतर लाइटिंग बुनियादी ढांचे में किए गए निवेश ने अपराधों को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है । सीसीटीवी निगरानी: शहरों के स्तर पर किए गए अध्ययन में सीसीटीवी डेंसिटी (प्रति वर्ग मील कैमरों की संख्या) और अपराध दर में गिरावट के बीच -0.148 का नकारात्मक संबंध पाया गया है
। 'स्मार्ट सिटी मिशन' के तहत 100 स्मार्ट शहरों में 84,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, 1,884 आपातकालीन कॉल बॉक्स और 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाए गए हैं । चेन्नई प्रति वर्ग मील 615 कैमरों के साथ देश में सबसे आगे है, जिसके बाद हैदराबाद (157) और मुंबई (145) का स्थान है । डिजिटलीकरण की भूमिका: यूपीआई (UPI), फास्टैग (FASTag) और डिजिटल सर्विलांस जैसे उपकरणों ने अपराधियों के छिपने या गुमनाम रहने के अवसरों को बेहद कम कर दिया है
। इससे अपराधियों के पकड़े जाने की संभावना बढ़ गई है और अपराध करने की संभावित लागत में भारी इजाफा हुआ है ।
सुरक्षा से मिलने वाला 'आर्थिक लाभांश'
रिपोर्ट में एक विशेष डायनेमिक मॉडल के जरिए यह साबित किया गया है कि कानून-व्यवस्था सिर्फ एक प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है
इसके विपरीत, महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध श्रम बाजार (Labour Market) में एक बड़ी बाधा के रूप में काम करते हैं
अंडररिपोर्टिंग और एफआईआर (FIR) न दर्ज होने की गंभीर चिंता
अपराधों के कुल आंकड़ों में गिरावट के बावजूद, रिपोर्ट ने जमीन पर होने वाले अपराधों और पुलिस रिकॉर्ड के बीच एक बड़ा अंतर उजागर किया है
रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल को एक ऐसे राज्य (आउटलायर) के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां कुछ विशेष श्रेणियों में मामलों को दर्ज न किए जाने की प्रबल आशंका है