बांग्लादेश की बेदख़ल पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को एक विशेष ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सज़ा सुनाई है। यह फैसला 2024 के छात्र आंदोलन पर हुए हिंसक दमन से जुड़ा है।
फैसले के बाद पूरे देश में तनाव, विरोध और हिंसा तेजी से बढ़ रही है।
अदालत का बड़ा फैसला
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने कहा कि हसीना ने छात्र आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों को हिंसा का आदेश दिया था।
अदालत के अनुसार, हसीना:
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शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की जिम्मेदार थीं
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हेलीकॉप्टर, ड्रोन और भारी हथियारों के इस्तेमाल पर सहमति देती थीं
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सुरक्षा बलों को अत्यधिक बल प्रयोग की अनुमति देती थीं
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नागरिकों के खिलाफ राज्य मशीनरी को दमन के हथियार की तरह इस्तेमाल करती थीं
ट्रिब्यूनल का कहना है कि उस दमन में सैकड़ों — और संभवतः 1,000 से ज़्यादा — छात्रों और नागरिकों की मौत हुई थी।
78 वर्षीय हसीना को गैर-हाजिर (in absentia) में सज़ा सुनाई गई, क्योंकि वे सरकार गिरने के बाद भारत चली गई थीं।
अन्य नेताओं पर भी कार्रवाई
हसीना के साथ उनके करीबी नेताओं को भी सज़ा मिली:
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पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान कमाल को भी मौत की सज़ा।
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पूर्व पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल-मामून, जिन्होंने सरकारी गवाह बनकर बयान दिया, को 5 साल जेल।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि नेताओं ने राज्य की ताकतों का गलत और क्रूर इस्तेमाल किया।
परिवार की प्रतिक्रिया
शेख हसीना के बेटे सजीब वाज़ेद ने कहा है कि उनकी माँ इस समय भारत में सुरक्षित हैं और उन्हें उच्च स्तर की सुरक्षा मिली हुई है।
उन्होंने इस फैसले को राजनीतिक बदला बताया और कहा कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अवामी लीग को आगामी चुनावों से बाहर किया गया, तो बांग्लादेश में स्थिति और बिगड़ सकती है।
देश में बढ़ता तनाव और हिंसा
फैसले के बाद देश में हालात बेहद खराब हैं:
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ढाका और अन्य शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन
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आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएँ
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पुलिस और रैपिड एक्शन बैटालियन की अतिरिक्त तैनाती
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कई स्थानों पर सड़कें बंद
लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में हिंसा और बढ़ सकती है।
आगे क्या होगा?
अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस सज़ा को लागू करेगी, रोक लगाएगी, या कोई नया कानूनी रास्ता खुलेगा।
मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है और राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताई है।
फिलहाल, बांग्लादेश एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ उसके सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक को देश के इतिहास की सबसे कठोर सज़ा सुनाई गई है।