तीन दशकों से ज्यादा समय से Hubble Space Telescope हमें तारों, आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड की खूबसूरत तस्वीरें भेज रहा है।
लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसा देखा जिसने उन्हें चिंता में डाल दिया —
हबल की तस्वीरें अब पहले जैसी साफ नहीं दिख रहीं।
और हैरानी की बात यह है कि समस्या अंतरिक्ष से नहीं, हमारी पृथ्वी से आ रही है।
धरती से उठी एक नई मुसीबत
वैज्ञानिकों को पता चला है कि बढ़ती सैटेलाइटों की संख्या हबल की तस्वीरों को बिगाड़ रही है।
जब कोई सैटेलाइट हबल के सामने से गुजरती है, तो तस्वीर में एक चमकीली सफेद लकीर बन जाती है।
यह वैसा ही है जैसे आप रात के आकाश की फोटो ले रहे हों और कोई अचानक आपकी कैमरा फ्रेम में टॉर्च चमका दे।
आने वाले समय में 40% तस्वीरें प्रभावित हो सकती हैं
एक नए अध्ययन के मुताबिक,
अगर सैटेलाइटें इसी गति से बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में हबल की 40% तस्वीरें खराब हो सकती हैं।
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि:
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लगातार हजारों नई सैटेलाइटें लॉन्च हो रही हैं
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इंटरनेट सेवाओं के लिए मेगा-constellations तैयार किए जा रहे हैं
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ये सैटेलाइटें सूरज की रोशनी को प्रतिबिंबित करती हैं, वो भी रात के समय
जब यह चमक हबल की लंबी-एक्सपोज़र तस्वीरों में आती है, तो
दूर के तारों और आकाशगंगाओं की रोशनी छिप जाती है।
यह वैज्ञानिक डेटा के लिए एक बड़ी समस्या है।
इतनी सैटेलाइटें क्यों बढ़ रहीं हैं?
कई देशों और कंपनियों ने हाई-स्पीड इंटरनेट देने के लिए बड़े-बड़े सैटेलाइट नेटवर्क बनाना शुरू कर दिया है।
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2019 में करीब 2,000 सैटेलाइटें थीं
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2025 तक यह संख्या 15,000 के पास है
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भविष्य में यह संख्या लाखों में पहुंच सकती है
यही कारण है कि हबल की खींची हुई ब्रह्मांड की तस्वीरों में ये चमकीली लकीरें दिखाई देने लगी हैं।
वैज्ञानिक चिंतित हैं, लेकिन उम्मीद बरकरार है
वैज्ञानिक सैटेलाइट कंपनियों के साथ मिलकर समाधान खोज रहे हैं, जैसे:
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सैटेलाइटों को कम प्रतिबिंबित बनाना
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उनकी ऊंचाई में बदलाव
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उड़ान मार्गों का समन्वय
ताकि वैज्ञानिक हबल जैसी दूरबीनों का साफ़ ब्रह्मांड देख सकें।
यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
हबल सिर्फ एक मशीन नहीं है।
यह हमारे लिए अंतरिक्ष का कहानीकार है।
इसने हमें दिखाया है:
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जन्म लेते तारे
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टकराती हुई आकाशगंगाएँ
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ब्रह्मांड की सबसे पुरानी रोशनी
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वह सुंदरता जिसे हम धरती से कभी नहीं देख सकते
तस्वीरों में बढ़ती यह रुकावट हमें याद दिलाती है कि
हमारा आकाश कितना तेज़ी से भीड़भाड़ वाला होता जा रहा है और उसे सुरक्षित रखना कितना जरूरी है।