दिल्ली में इस हफ्ते सुबह का आसमान धुंधला दिखाई दिया और दृश्यता भी काफी कम रही। मौसम विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी के विस्फोट से निकली राख हवा के साथ हजारों किलोमीटर दूर भारत तक पहुंच गई है और यह दिल्ली की हवा में मिल रही है। इससे पहले से खराब वायु गुणवत्ता और बिगड़ गई है।
भारत मौसम विभाग के अनुसार, ज्वालामुखी की राख ऊपरी वायुमंडल में घूम रही है। तेज हवाएं राख के बादलों को पूर्वी अफ्रीका से उठाकर अरब सागर पार कर भारत के उत्तरी हिस्सों तक ले आईं। जमीन पर गिरने वाली राख की मात्रा कम है, लेकिन इतनी भी कि दिल्ली की हवा और ज्यादा धुंधली हो गई।
राख इतनी दूर कैसे पहुंची
हैली गुब्बी ज्वालामुखी हाल ही में फटा था और इसने बड़ी मात्रा में राख हवा में उछाली। कई बार ज्वालामुखी की राख केवल आसपास फैलती है, लेकिन इस विस्फोट की राख बहुत ऊंचाई तक पहुंच गई। ऊंचाई पर हवा की रफ्तार तेज होती है। इन्हीं हवाओं ने राख को लंबी दूरी तक खींचकर दूसरे देशों की ओर भेज दिया।
अफ्रीका से यह राख मध्य पूर्व पार करती हुई भारत पहुँची। चूंकि दिल्ली में पहले से ही ठंडी हवा, वाहन प्रदूषण, उद्योगों का धुआं और पराली के असर से वायु गुणवत्ता खराब थी, इसलिए ज्वालामुखी की राख ने स्थिति और बिगाड़ दी।
ज्वालामुखी की राख क्यों होती है खतरनाक
डॉक्टरों का कहना है कि ज्वालामुखी की राख बेहद बारीक कणों से बनी होती है। ये कण आसानी से नाक, गले और फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इस वजह से यह सांस संबंधी समस्याएँ पैदा कर सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से दमा या एलर्जी की समस्या है।
संभावित स्वास्थ्य प्रभाव
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सांस लेने में दिक्कत
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आँखों में जलन या पानी आना
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गले में सूखापन और खांसी
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सीने में भारीपन
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सिरदर्द
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दमा या हृदय रोगी की समस्या बढ़ना
राख के कण बहुत हल्के और सूक्ष्म होते हैं। ये हवा में लंबे समय तक तैरते रहते हैं और प्रदूषण को और गंभीर बना देते हैं।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने सलाह दी है कि हवा बेहतर होने तक लोग कुछ उपाय अपनाएँ:
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बाहर निकलते समय N95 या KN95 मास्क पहनें
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सुबह की सैर या कठोर बाहरी व्यायाम से बचें
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घर की खिड़कियाँ बंद रखें
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एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें यदि संभव हो
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पर्याप्त पानी पिएँ
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आँखों में जलन हो तो साफ पानी से धोएँ
अधिकारियों के अनुसार, हवा की दिशा बदलने के बाद धीरे-धीरे राख का असर कम हो जाएगा।
वैश्विक वायु तंत्र का संकेत
पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि यह घटना बताती है कि दुनिया की वायु प्रणाली एक दूसरे से जुड़ी हुई है। किसी एक देश में पैदा हुआ धुआँ या राख दूसरी जगहों तक पहुँच सकता है। इसलिए बड़े शहरों को बेहतर पूर्वानुमान और वायु प्रबंधन की जरूरत है।
फिलहाल दिल्ली के लोगों को सावधानी बरतने और वायु गुणवत्ता संबंधी अपडेट पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।