· पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक्सिस बैंक संजीवा सिंह ओलंपिक आर्चरी सेंटर अपनी
तरह का पहला ऐसा उच्च-प्रदर्शन इकोसिस्टम तैयार करेगा, जो भारतीय तीरंदाजों की भावी पीढ़ियों को तराशने के लिए ओलंपिक-स्तर के
बुनियादी ढांचे, खेल विज्ञान, आवासीय प्रशिक्षण और शिक्षा को एक साथ जोड़ता है
मुंबई: भारत की ओलंपिक खेल महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक
कदम उठाते हुए, भारत के सबसे
बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में से एक, एक्सिस बैंक ने
संजीवा सिंह आर्चरी इंस्टीट्यूट ट्रस्ट (एसएसएआईटी) के साथ साझेदारी में आज पूर्वी
उत्तर प्रदेश के कन्हौली में एक्सिस बैंक संजीवा सिंह ओलंपिक आर्चरी सेंटर के
विकास की घोषणा की।
गांव में बनने
वाले भारत के पहले ओलम्पिक-स्तर के तीरंदाजी सेंटर का उद्देश्य एक ही परिसर में
उत्कृष्ट प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, आवासीय सुविधा
और शिक्षा प्रदान करना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की नई प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें
सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा सकेगा।
एक्सिस बैंक की
मदद से यह प्रोजेक्ट तीन साल में बनकर तैयार होगा। इससे एसएसएआईटी का तीरंदाजी
केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक वर्ल्ड-क्लास ट्रेनिंग सेंटर बन जाएगा। इस कदम से
बड़े शहरों के बाहर भी खिलाड़ियों को खेल की बेहतरीन सुविधाएँ मिलेंगी और पिछड़े
क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने के नए मौके मिलेंगे।
भारत में
तीरंदाजी के बेहतरीन खिलाड़ी ज़्यादातर गाँवों और आदिवासी इलाकों से ही निकलकर आए
हैं, फिर भी ट्रेनिंग की अच्छी सुविधाएँ
बहुत कम जगहों पर ही उपलब्ध हैं। ओलंपियन और अर्जुन व द्रोणाचार्य अवार्ड से
सम्मानित संजीवा सिंह की अगुवाई में, यह सेंटर
पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक वर्ल्ड-क्लास स्पोर्ट्स सेंटर बनाकर इस कमी को दूर
करने की कोशिश कर रहा है। इससे युवा खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही उच्चस्तरीय
प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स साइंस और मैच की तैयारी
के लिए अच्छी सुविधाएँ मिल सकेंगी। गोरखपुर एयरपोर्ट से 45 किलोमीटर से भी कम दूरी पर बना यह सेंटर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तरी छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर
मध्य प्रदेश के होनहार खिलाड़ियों को खोजने और उन्हें तराशने का एक बड़ा केंद्र
बनेगा।
इस सेंटर में
ओलंपिक-स्तर के इंडोर और आउटडोर तीरंदाजी रेंज, प्रतियोगिता के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर, टूर्नामेंट
स्थितियों में प्रशिक्षण के लिए उन्नत सिमुलेशन क्षमताएं और एथलीटों के अनुकूल
टिकाऊ सुविधाएं होंगी। एक समर्पित कंट्रोल रूम, तापमान-नियंत्रित प्रशिक्षण स्थलों और एकीकृत निगरानी प्रणालियों से समर्थित, यह सुविधा पूरे वर्ष प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार रहने में सक्षम
बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
इस परिसर में 100 एथलीटों की क्षमता वाला एक आवासीय विंग
होगा, जहाँ ट्रेनिंग कैंप, चयन ट्रायल एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसे दक्षिण कोरिया, अमेरिका, यूके और स्विट्जरलैंड के बेहतरीन
तीरंदाजी सेंटर्स की तर्ज पर तैयार किया गया है। इस सेंटर की सबसे खास बात यहाँ का
अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्पोर्ट्स साइंस सिस्टम होगा। इसमें खिलाड़ियों के प्रदर्शन
और सेहत पर नज़र रखने, 3D शॉट विश्लेषण
और नई तकनीक के ज़रिए उन्हें सटीक व बेहतर ट्रेनिंग देने की सुविधा मिलेगी।
इस अवसर पर, एक्सिस बैंक के ग्रुप हेड - होलसेल बैंक कवरेज, कॉरपोरेट सैलरी, सस्टेनेबिलिटी
एंड सीएसआर, विजय मुलबागल ने कहा, "विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच खेल क्षमता को खेल उत्कृष्टता में बदल
सकती है। एक्सिस बैंक संजीवा सिंह ओलंपिक आर्चरी सेंटर के माध्यम से, हम अपनी तरह का पहला इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहे हैं जो एक ही परिसर के
भीतर विश्वस्तरीय सुविधाओं, खेल विज्ञान, शिक्षा और आवासीय प्रशिक्षण को एक साथ लाता है। हमारा दृष्टिकोण केवल एक
प्रशिक्षण केंद्र बनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा
स्थायी मंच तैयार करने में मदद करना है जो ग्रामीण भारत के प्रतिभाशाली युवा
एथलीटों की पहचान कर सके, उन्हें तराश
सके और वैश्विक खेल के उच्चतम स्तरों पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार कर
सके।"
एसएसएआईटी के
संस्थापक और अध्यक्ष ट्रस्टी, संजीवा सिंह ने
कहा, "विरासत वो नहीं है जो हम संभालकर
अपने पास रखते हैं, बल्कि वो है जो
हम दूसरों को देकर जाते हैं। एक खिलाड़ी और बाद में एक कोच के तौर पर, मुझे हमेशा एक ऐसी जगह की कमी खली जहाँ एक तीरंदाज एक ही छत के नीचे पढ़ाई कर
सके, रह सके और ट्रेनिंग ले सके। हमारे
साथी एक्सिस बैंक और हमारे सहयोगी संस्थाओं: एसबीआई फाउंडेशन, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी और आशा
एवं सज्जन अग्रवाल फाउंडेशन की मदद से यह स्वप्न अब साकार हो रहा है। अपने खेलने और सिखाने के दिनों में मुझे जिन सुविधाओं की कमी
महसूस हुई, हमने पूरी कोशिश की है कि ओलंपिक
का सपना देखने वाले किसी भी भारतीय तीरंदाज को अब उन परेशानियों का सामना न करना
पड़े।"
भारत सरकार की 'खेलो भारत नीति 2025' और 'टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (टीओपीएस) के
अनुरूप, यह सेंटर सालाना लगभग 100 आवासीय एथलीटों का समर्थन करने के साथ-साथ कोचिंग शिविरों, प्रतियोगिताओं और हाई परफॉर्मेंस इवेंट्स के माध्यम से 300 से अधिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एथलीटों की मेजबानी करने की उम्मीद करता है।
केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के अलावा, इस पहल का
उद्देश्य भारत में खेल प्रतिभाओं को निखारने के तरीके को फिर से परिभाषित करने में
मदद करना है। इसके लिए गांवों में वैश्विक स्तर पर मानकीकृत प्रशिक्षण प्रणालियों
को लाने और भावी चैंपियनों की एक टिकाऊ पाइपलाइन बनाने पर फोकस किया जाएगा।