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तीन वर्षों में कमर्शियल संस्थाओं की तुलना में उद्यमियों को मिलने वाले बिजनेस लोन ज्‍यादा तेजी से बढ़े

तीन वर्षों में कमर्शियल संस्थाओं की तुलना में उद्यमियों को मिलने वाले बिजनेस लोन ज्‍यादा तेजी से बढ़े

·         मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के व्यावसायिक ऋण का बकाया 1.8 गुना बढ़ा है, जिसने संस्थागत उधारकर्ताओं की 1.5 गुना की वृद्धि दर को पीछे छोड़ दिया है

·         एमएसएमई ऋण पहुंच के विस्तार में अभी भी काफी गुंजाइश है, क्योंकि वर्तमान में लगभग 41% वाणिज्यिक उद्यमों के पास ही संस्थागत या व्यक्तिगत रूप से औपचारिक ऋण की पहुंच है

·         मार्च 2026 तक कुल कमर्शियल लोन पोर्टफोलियो का प्रदर्शन स्थिर रहा और डेलिनक्वेंसी दर 1.8% पर बनी रही। हालांकि, इस विश्लेषण में कुछ विशिष्ट उधारकर्ता श्रेणियों में जोखिम के शुरुआती संकेत भी देखे गए हैं

मुंबई : ट्रांसयूनियन सिबिल और स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) द्वारा जारी की गई नवीनतम एमएसएमई पल्‍स रिपोर्ट के अनुसार, भारत के वाणिज्यिक ऋण बाजार में कर्ज लेने वालों के ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए लोन लेने वाले व्यक्तिगत उधारकर्ताओं की कुल वाणिज्यिक ऋण बकाया में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हो गई है।

कुल बकाया वाणिज्यिक ऋण में से व्यक्तिगत उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 28% रही, जबकि कंपनियों या संस्थाओं को दिए गए ऋणों की हिस्सेदारी 72% थी। मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच तीन साल की अवधि के दौरान, व्यक्तिगत उधारकर्ताओं का बकाया ऋण 1.8 गुना बढ़ा है, जबकि इसी अवधि में संस्थागत उधारकर्ताओं के ऋण में 1.5 गुना की वृद्धि देखी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक कुल बकाया वाणिज्यिक ऋण 65.8 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो 4.4 करोड़ सक्रिय वाणिज्यिक खातों में फैला हुआ है। यह मार्च 2025 के 57.9 लाख करोड़ रुपये के कुल बकाया ऋण की तुलना में 14% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

Chart 1: Individual Business Borrowers Credit Profile

 

 

व्यक्तिगत उधारकर्ता व्यावसायिक ऋण में एक बड़ा हिस्सा बन रहे हैं

मार्च 2026 तक, 2.8 करोड़ व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के पास सक्रिय व्यावसायिक लोन थे। इनमें से 43% उधारकर्ता कमर्शियल संस्थाओं के रूप में शुरुआती चरण में थे, जिनका क्रेडिट इतिहास 24 महीने से भी कम का था। यह दर्शाता है कि एक ऐसा बड़ा वर्ग व्यापार के लिए लोन ले रहा है, जो कमर्शियल क्षेत्र में अभी नया-नया है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के कुल कमर्शियल लोन का लगभग आधा हिस्सा (48%) व्यक्तिगत उधारकर्ताओं से जुड़ा हुआ था। अन्य सभी प्रकार के बैंकों का हिस्सा इसकी तुलना में काफी कम है। व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के कमर्शियल लोन बाजार में 24% हिस्सेदारी के साथ प्राइवेट बैंक दूसरे स्थान पर हैं।

प्रमुख कमर्शियल लोन प्रोडक्ट्स में व्यक्तिगत उधारकर्ताओं की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। इस वर्ग के लिए लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (संपत्ति पर लोन) बकाया राशि का सबसे बड़ा हिस्सा था, इसके बाद कमर्शियल वाहन लोन और बिना गारंटी वाले बिजनेस लोन का स्थान रहा।

यदि प्रोडक्ट के स्तर पर देखें, तो कुल लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के बैलेंस में व्यक्तिगत उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 68%, कमर्शियल वाहनों के बैलेंस में 76% और बिना गारंटी वाले बिजनेस लोन के बैलेंस में 67% थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी, कमर्शियल वाहन लोन, बिना गारंटी वाले बिजनेस लोन, टर्म लोन, ओवरड्राफ्ट और कैश क्रेडिट को मिलाकर कुल कमर्शियल ऋण का लगभग 87% हिस्सा बनता है।

ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने कहा, "भारत की एमएसएमई अर्थव्यवस्था में, उद्यमी और उसका उद्यम अक्सर एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं, खासकर व्यवसाय की शुरुआत के शुरुआती वर्षों में। एक प्रोप्राइटर व्यक्तिगत रूप से लोन ले सकता है, लेकिन वह ऋण अक्सर व्यावसायिक गतिविधियों, कार्यशील पूंजी की जरूरतों या संपत्ति बनाने से जुड़ा होता है। यही बात व्यक्तिगत व्यावसायिक ऋण को कमर्शियल क्रेडिट के बदलते स्वरूप का एक अहम हिस्सा बनाती है, और इसे व्यापक एमएसएमई क्रेडिट परिदृश्य के साथ ही समझा जाना चाहिए।

"जैसे-जैसे एमएसएमई का विकास होता है, उनकी ऋण संबंधी जरूरतें भी बदलती हैं, छोटे वर्किंग कैपिटल लोन से लेकर बड़े और सेक्टर-आधारित फंडिंग की आवश्यकताओं तक। बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली के लिए वास्तविक अवसर इस बदलाव को और अधिक स्पष्टता से समझने में है, विशेष रूप से तब जब उधारकर्ता व्यक्तिगत बिजनेस लोन से निकलकर संस्थागत स्तर के ऋण की ओर बढ़ते हैं, या व्यापार-आधारित ऋण से विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार की ओर कदम बढ़ाते हैं।"

औपचारिक ऋण तक पहुँच अभी भी एक बड़ा अवसर

लोन जारी होने की कुल संख्या में पहली बार लोन लेने वाली (एनटीसी-न्‍यू टु क्रेडिट) संस्थाओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023 के 52% से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 42% रह गई है। यह दर्शाता है कि हाल के वर्षों में पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने वाले नए कर्जदारों की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।

Chart 2: NTC Opportunity Sizing

 

 

कमर्शियल संस्थाओं के बीच पहली बार लोन लेने वाले नए कर्जदारों की संख्या मुख्य रूप से छोटे लोन आकारों में केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 60% लोन 2 लाख से 10 लाख रुपये के सेगमेंट में थे, जबकि 34% लोन 10 लाख से 2 करोड़ रुपये के सेगमेंट में थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2 लाख से 2 करोड़ रुपये के बीच लोन लेने वाले 75% एनटीसी संस्थागत उधारकर्ताओं के पास पहले से पर्सनल या रिटेल लोन का अनुभव था। यह दर्शाता है कि पहली बार कमर्शियल लोन लेने वाली संस्थाएं अलग-अलग रास्तों से औपचारिक ऋण बाजार में प्रवेश करती हैं।

विशिष्ट उधारकर्ता श्रेणियों में जोखिम के उभरते संकेत

मार्च 2026 तक समग्र कमर्शियल लोन पोर्टफोलियो का प्रदर्शन स्थिर रहा, लेकिन रिपोर्ट कुछ विशिष्ट उधारकर्ता और प्रोडक्ट सेगमेंट में बढ़ते एनपीए या डिफॉल्ट स्तर की ओर इशारा करती है। कंपनियों या संस्थाओं को दिए गए असु‍रक्षित बिजनेस लोन में डेलिनक्वेंसी दर (90+ दिनों की देरी या सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में डाले गए लोन) 7.2% पर रही, जो तीन वर्षों में 274 बेसिक अंक बढ़ी है। इसके अलावा, 2 लाख से 10 लाख रुपये वाले संस्थागत उधारकर्ता सेगमेंट में भी डेलिनक्वेंसी दर 5.6% दर्ज की गई, जो इसी अवधि में 111 बेसिक अंक अधिक है।

तनाव के संकेत शुरुआती डेलिनक्वेंसी (लोन जारी होने के पहले 12 महीनों के भीतर 90+ दिनों की देरी वाले खाते) में भी देखे गए। यह स्थिति संस्थाओं को दिए गए बिना गारंटी वाले बिजनेस लोन और 2 लाख से 10 लाख रुपये वाले संस्थागत उधारकर्ता सेगमेंट, दोनों में नजर आई। मार्च 2025 को समाप्त तिमाही में जारी किए गए लोन के लिए, बिना गारंटी वाले बिजनेस लोन में शुरुआती डेलिनक्वेंसी 2.9 गुना अधिक थी। वहीं, 2 लाख से 10 लाख रुपये वाले संस्थागत उधारकर्ता सेगमेंट में यह 2.1 गुना अधिक थी। इसकी तुलना अगर इसी अवधि में संस्थाओं को जारी किए गए कुल लोन की शुरुआती डेलिनक्वेंसी दर से की जाए, तो वह मात्र 3.4% थी।

सेक्टोरल पैटर्न अलग-अलग एमएसएमई क्रेडिट संरचनाओं की ओर इशारा करते हैं

रिपोर्ट से पता चलता है कि विभिन्न क्षेत्रों में कमर्शियल लोन के रुझान लोन के आकार और राज्यों के आधार पर अलग-अलग हैं। कपड़ा, पेशेवर सेवाएं, थोक व्यापार और बुनियादी ढांचे से जुड़े उद्योगों में मुख्य रूप से 10 लाख से 2 करोड़ रुपये के लोन सेगमेंट का दबदबा है। कपड़ा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख उद्योगों में महाराष्ट्र और गुजरात सबसे आगे रहने वाले राज्य हैं। रिपोर्ट में विनिर्माण को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है, जो औद्योगिक समूहों में अत्यधिक केंद्रित है।

व्यापार क्षेत्र में एक अलग ही पैटर्न देखने को मिला, जहाँ सक्रिय लोन वाली संस्थाओं की हिस्सेदारी के आधार पर, खुदरा व्यापार 2 लाख से 10 लाख रुपये के लोन सेगमेंट से जुड़ा हुआ है और थोक व्यापार 10 लाख से 2 करोड़ रुपये के सेगमेंट के नेतृत्व में है। खुदरा और थोक व्यापार दोनों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा, जबकि अन्य अग्रणी राज्यों में पश्चिम बंगाल भी शामिल है। पेशेवर सेवाओं में, रिपोर्ट 10 लाख से 2 करोड़ रुपये के छोटे लोन सेगमेंट में संस्थाओं की उच्च हिस्सेदारी दर्शाती है, जिसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु अग्रणी राज्यों में शामिल हैं।

श्री जैन ने कहा, "भारत के उद्यम आधार, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास में एमएसएमई की भूमिका सबसे प्रमुख बनी हुई है। जैसे-जैसे अधिक छोटे व्यवसाय औपचारिक ऋण की ओर बढ़ रहे हैं, एमएसएमई क्षेत्र के भीतर की विविधता को पहचानना बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यशील पूंजी की तलाश कर रहे एक सूक्ष्म उद्यम, स्थानीय बाजार में काम कर रहे एक व्यापारिक उधारकर्ता और अपने काम को बड़े पैमाने पर ले जाने की इच्छा रखने वाली एक विनिर्माण इकाई की ऋण आवश्यकताएं, व्यावसायिक चक्र और विकास के रास्ते पूरी तरह अलग होंगे।

"एमएसएमई के लिए औपचारिक ऋण की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ इन अंतरों की गहरी समझ होना भी आवश्यक है। विभिन्न क्षेत्रों, लोन के आकार और भौगोलिक क्षेत्रों के स्तर पर अधिक बारीक और विस्तृत नजरिया रखने से बैंकिंग प्रणाली को टिकाऊ क्रेडिट विकास पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ छोटे और उभरते उद्यमों की बेहतर सेवा करने में मदद मिल सकती है।"

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