कोलकाता: अचानक तेज सिरदर्द, इसके बाद दाहिनी आंख न खोल पाने और तेजी से बिगड़ती दृष्टि की समस्या के कारण 70 वर्षीय कोलकाता निवासी रवींद्रनाथ दास को मणिपाल हॉस्पिटल साल्ट लेक लाया गया। जांच में डॉक्टरों ने पिट्यूटरी ग्लैंड में एक बड़ा ट्यूमर पाया, जिसमें आंतरिक रक्तस्राव हुआ था। इस स्थिति को पिट्यूटरी एपोप्लेक्सी कहा जाता है। रक्तस्राव के कारण ट्यूमर तेजी से बढ़ गया था और दृष्टि तथा आंखों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली महत्वपूर्ण नसों पर दबाव पड़ रहा था। इस वजह से जो समस्या शुरुआत में आंख से जुड़ी हुई प्रतीत हो रही थी, वह तेजी से एक मेडिकल इमरजेंसी में बदल गई। एक मल्टीडिसिप्लिनरी उपचार के तहत मणिपाल हॉस्पिटल साल्ट लेक के न्यूरोसर्जन डॉ. अरिजीत चक्रवर्ती और कंसल्टेंट ओटोराइनोलैरिंजोलॉजिस्ट डॉ. देबायन ताराफदार ने फोर-हैंड तकनीक का उपयोग करते हुए मिनिमली इनवेसिव एंडोस्कोपिक एंडोनैसल प्रक्रिया के माध्यम से ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। प्रक्रिया के बाद मरीज के सिरदर्द में काफी राहत मिली और महज दो दिनों के भीतर उनकी दृष्टि में सुधार शुरू हो गया।
रवींद्रनाथ दास अचानक तेज सिरदर्द, दाहिनी पलक झुकने, आंख न खोल पाने, दृष्टि में गंभीर कमी और हृदय संबंधी लक्षणों के साथ आपातकालीन विभाग में पहुंचे। तत्काल किए गए एमआरआई में एक बड़े पिट्यूटरी ट्यूमर के भीतर रक्तस्राव का पता चला, जिससे पिट्यूटरी एपोप्लेक्सी की पुष्टि हुई। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें अचानक रक्तस्राव के कारण ट्यूमर तेजी से फैल जाता है और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं पर दबाव डालता है। उन्हें डॉ. अरिजीत चक्रवर्ती की देखरेख में भर्ती किया गया और उनके तथा डॉ. देबायन ताराफदार के नेतृत्व में फोर-हैंड तकनीक का उपयोग करते हुए मिनिमली इनवेसिव, बिना बाहरी चीरे वाली एंडोस्कोपिक एंडोनैसल पिट्यूटरी सर्जरी की गई। नाक के मार्ग और स्फेनॉइड साइनस के माध्यम से ट्यूमर तक पहुंच बनाई गई और बिना किसी बाहरी चीरे के उसे सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। यह दर्दरहित प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के पूरी हुई और मरीज सर्जरी के दो दिनों के भीतर ठीक होने लगे। सर्जरी के बाद उनकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। उनका सिरदर्द पूरी तरह कम हो गया है और उनकी दृष्टि भी धीरे-धीरे वापस आ रही है।
मरीज के स्वास्थ्य में सुधार के बारे में डॉ. अरिजीत चक्रवर्ती ने कहा, “इस मामले में सबसे उत्साहजनक बात सर्जरी के बाद मरीज की प्रतिक्रिया रही है। उनका तेज सिरदर्द काफी हद तक कम हो गया है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ ही दिनों में उनकी दृष्टि में लगभग 70 प्रतिशत सुधार हुआ है। हमें उम्मीद है कि आने वाले कुछ सप्ताहों में उनकी कार्यक्षमता में और सुधार होगा। हालांकि, अचानक बने दबाव से प्रभावित नसों को ठीक होने में समय लग सकता है, इसलिए लगातार फॉलो-अप महत्वपूर्ण होगा। अब तक उनकी रिकवरी बेहद सकारात्मक रही है।”
प्रक्रिया की मल्टीडिसिप्लिनरी प्रकृति पर टिप्पणी करते हुए डॉ. देबायन ताराफदार ने कहा, “जटिल स्कल-बेस प्रक्रियाओं में न्यूरोसर्जिकल और एंडोस्कोपिक टीमों के बीच करीबी समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है। फोर-हैंड तकनीक दोनों विशेषज्ञों को एक साथ काम करने और प्रक्रिया के दौरान अपनी-अपनी विशेषज्ञता का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम बनाती है। इस मामले में सर्जरी के बाद मरीज में हुआ सुधार, विशेष रूप से इतनी जल्दी दृष्टि में सुधार होना, बेहद आश्वस्त करने वाला है। हालांकि हमें आगे भी सुधार की उम्मीद है, लेकिन यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि संबंधित नसों पर काफी दबाव पड़ा था और उन्हें पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है।”
अपने अनुभव को याद करते हुए रवींद्रनाथ दास ने कहा, “अचानक तेज सिरदर्द और दाहिनी आंख में आई समस्या मेरे लिए बेहद डरावनी थी। मैं ठीक से अपनी आंख खोल नहीं पा रहा था और जब आंख खोलता था, तो सब कुछ पूरी तरह धुंधला दिखाई देता था। मुझे अपनी आंखों की रोशनी को लेकर बहुत चिंता थी। सर्जरी से पहले मैं स्वाभाविक रूप से काफी चिंतित था, लेकिन डॉक्टरों ने मुझे पूरी स्थिति बहुत शांत तरीके से समझाई और मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया। ऑपरेशन के बाद सिरदर्द काफी कम हो गया और मुझे अपनी दृष्टि में स्पष्ट सुधार महसूस हुआ। मैं समझता हूं कि पूरी तरह ठीक होने में अभी समय लगेगा, लेकिन अब तक हुए सुधार से मुझे काफी राहत मिली है।”
इस मामले का सफल उपचार पिट्यूटरी एपोप्लेक्सी के मरीजों में लक्षणों की समय पर पहचान, शीघ्र इमेजिंग, समय पर उपचार और मल्टीडिसिप्लिनरी सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है। न्यूरोसर्जरी और एंडोस्कोपिक स्कल-बेस सर्जरी के बीच समन्वित प्रयासों तथा मिनिमली इनवेसिव तकनीक की मदद से चिकित्सा टीम ट्यूमर को सुरक्षित रूप से निकालने और महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल संरचनाओं पर पड़ रहे दबाव को कम करने में सफल रही। इससे मरीज की शुरुआती रिकवरी में उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।