कोलकाता: मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर ने बांग्लादेश के 54 वर्षीय एक मरीज का सफल इलाज किया, जो किडनी की समस्या के साथ-साथ एक दुर्लभ और जानलेवा इन्फ्रारेनल एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म (पेट में मौजूद शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिका यानी महाधमनी के निचले हिस्से में असामान्य रूप से बड़ी सूजन) से पीड़ित था। मरीज सबसे पहले किडनी से जुड़ी समस्या लेकर अस्पताल आया था, जहां उसकी जांच डॉ. अविनंदन बनर्जी, क्लिनिकल लीड – नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट, मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर ने की। जांच के दौरान रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर समस्या का पता चला। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मरीज को उन्नत रक्त वाहिका उपचार के लिए भेजा गया। इसके बाद डॉ. सौम्य पात्रा, सीनियर कंसल्टेंट – कार्डियोलॉजी एवं डायरेक्टर – कैथ लैब और डॉ. अरिजीत दत्ता, सीनियर कंसल्टेंट – कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विशेषज्ञ, मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर ने मिलकर एंडोवैस्कुलर एओर्टिक रिपेयर (EVAR) नामक आधुनिक और बिना बड़ी सर्जरी वाली प्रक्रिया के जरिए सफल इलाज किया।
54 वर्षीय फेडू साहा लंबे समय से धूम्रपान करते थे और वर्ष 2016 में उनकी कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी (CABG) हो चुकी थी। 5 जुलाई 2026 को उन्हें पेट में तेज दर्द, जो पीठ और बाएं पैर तक फैल रहा था, तथा चलने-फिरने में बढ़ती परेशानी के कारण मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर में भर्ती कराया गया।
सीटी एंजियोग्राफी जांच में पता चला कि पेट की मुख्य रक्त वाहिका के निचले हिस्से में बहुत बड़ी सूजन बन गई है। इसके अंदर खून का थक्का भी था और रक्त वाहिका की अंदरूनी परत में हल्का चीरा (डिसेक्शन) भी बन गया था। इस वजह से खासकर बाएं पैर में खून का प्रवाह काफी कम हो गया था, जबकि महाधमनी का ऊपरी हिस्सा सामान्य था। सूजन का आकार इतना बड़ा हो गया था कि वह आसपास के अंगों पर भी दबाव डाल रही थी, जिससे मरीज को तेज दर्द और चलने में परेशानी हो रही थी।
पूरी जांच के बाद डॉक्टरों ने 6 जुलाई 2026 को पूरी तरह बिना चीरा लगाए एंडोवैस्कुलर एओर्टिक रिपेयर (EVAR) करने का फैसला किया। इस प्रक्रिया में एंडोवैस्कुलर स्टेंट ग्राफ्ट (कपड़े से ढकी धातु की जाली वाली एक विशेष ट्यूब) को महाधमनी के खराब हिस्से के अंदर लगाया गया। इससे खून के बहाव के लिए नया रास्ता बन गया और सूजन वाले हिस्से में खून का दबाव बंद हो गया। इससे सूजन के और बढ़ने तथा उसके फटने का खतरा काफी कम हो गया।
पारंपरिक ओपन सर्जरी के विपरीत, इस पूरी प्रक्रिया में पेट पर बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। केवल रक्त वाहिका में छोटे-छोटे छेद के जरिए इलाज किया गया। प्रक्रिया के बाद MANTA वैस्कुलर क्लोजर डिवाइस की मदद से इन जगहों को सुरक्षित रूप से बंद किया गया, जिससे मरीज को कम दर्द हुआ और वह जल्दी स्वस्थ हो सका।
इस मामले पर बात करते हुए डॉ. सौम्य पात्रा ने कहा, "पेट की महाधमनी में बनने वाली बड़ी सूजन बेहद खतरनाक होती है क्योंकि यह कभी भी फट सकती है और जानलेवा अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है। इस मरीज में सूजन के कारण पैर तक खून का प्रवाह भी प्रभावित होने लगा था, जिससे उसे तेज दर्द और चलने में दिक्कत हो रही थी। पूरी तरह बिना बड़ी सर्जरी वाली EVAR प्रक्रिया की मदद से हम सूजन का सुरक्षित इलाज कर सके और महाधमनी में खून का सामान्य प्रवाह भी बनाए रखा। इस तरह की आधुनिक तकनीकें जटिल रक्त वाहिका रोगों के इलाज को अधिक सुरक्षित बना रही हैं और मरीजों को जल्दी ठीक होने में मदद कर रही हैं।"
डॉ. अरिजीत दत्ता ने कहा, "पेट की महाधमनी में बनने वाली सूजन को अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण तब तक सामने नहीं आते, जब तक यह बहुत बड़ी न हो जाए या फटने की स्थिति में न पहुंच जाए। इसलिए समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो धूम्रपान करते हैं, जिनकी उम्र अधिक है या जिन्हें पहले से हृदय संबंधी बीमारी रही है। इस मरीज में सूजन के साथ-साथ महाधमनी की अंदरूनी परत में चीरा भी बन गया था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई थी और तुरंत इलाज जरूरी था। हमारी वैस्कुलर सर्जरी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी टीम के बेहतर तालमेल की वजह से हम बिना ओपन सर्जरी के सुरक्षित और प्रभावी इलाज कर सके।"
ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी सामान्य रही और उन्हें 9 जुलाई 2026 को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फॉलो-अप जांच के दौरान मरीज ने बताया कि उनका दर्द काफी कम हो गया है और अब वे आराम से चल-फिर पा रहे हैं, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है।
यह सफल उपचार एक बार फिर साबित करता है कि मणिपाल हॉस्पिटल जटिल रक्त वाहिका संबंधी बीमारियों के इलाज में आधुनिक एंडोवैस्कुलर तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर रहा है। इन तकनीकों की मदद से मरीजों को बिना बड़ी सर्जरी के सुरक्षित इलाज, कम समय तक अस्पताल में रहने और तेजी से स्वस्थ होने का लाभ मिल रहा है।