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मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे में जटिल ईएनटी सर्जरी से 66 वर्षीय मरीज को दुर्लभ विशाल गर्दन के लिम्फैन्जियोमा से मिली राहत

मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे में जटिल ईएनटी सर्जरी से 66 वर्षीय मरीज को दुर्लभ विशाल गर्दन के लिम्फैन्जियोमा से मिली राहत

कोलकाता: 66 वर्षीय एक व्यक्ति की गर्दन के दाहिने हिस्से में धीरे-धीरे बढ़ने वाली सूजन समय के साथ एक दुर्लभ और विशाल ट्यूमर में बदल गई, जिसने उनकी श्वासनली के साथ-साथ गर्दन की कुछ सबसे महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं और नसों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे के डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल सर्जरी के माध्यम से 10 × 10 × 10 सेमी आकार के लिम्फैन्जियोमालिम्फैटिक सिस्टम की एक दुर्लभ सौम्य (गैर-कैंसरयुक्त) विकृतिको सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस दौरान कैरोटिड धमनी, इंटरनल जुगुलर शिरा और वेगस नर्व को पूरी सावधानी के साथ सुरक्षित रखा गया। इस जटिल प्रक्रिया से केवल ट्यूमर को पूरी तरह हटाया गया, बल्कि मरीज बिना किसी ऑपरेशन के बाद की जटिलता के स्वस्थ भी हो गया।

मरीज को जुलाई को गर्दन के दाहिने हिस्से में सूजन की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह सूजन लगभग डेढ़ वर्ष से धीरे-धीरे बढ़ रही थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसका आकार तेजी से बढ़ने लगा। २३ मई को किए गए कॉन्ट्रास्ट-एन्हांस्ड सीटी स्कैन में गर्दन में 10 × 10 × 10 सेमी आकार की तरल पदार्थ से भरी एक बड़ी गांठ का पता चला। यह ट्यूमर दाहिनी कॉमन कैरोटिड धमनी और थायरॉयड ग्रंथि के बेहद करीब था। साथ ही यह इंटरनल जुगुलर शिरा पर दबाव डाल रहा था और श्वासनली तथा स्वरयंत्र को हल्का-सा बाईं ओर धकेल रहा था। इन निष्कर्षों से डॉक्टरों को आशंका हुई कि यदि समय रहते इलाज नहीं किया गया तो मरीज को सांस लेने में गंभीर समस्या हो सकती है। सीटी स्कैन के आधार पर डॉक्टरों ने इसे लिम्फैन्जियोमा, यानी लिम्फैटिक सिस्टम की एक दुर्लभ सौम्य विकृति होने का संदेह जताया।

व्यापक प्री-एनेस्थेटिक मूल्यांकन के बाद मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे के सीनियर कंसल्टेंट ईएनटी एवं हेड एंड नेक सर्जन डॉ. कौशिक दास के नेतृत्व में तथा ईएनटी एवं हेड एंड नेक सर्जन डॉ. उशरिन बोस के सहयोग से ट्यूमर को पूरी तरह सर्जरी के माध्यम से निकाल दिया गया। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व सीनियर एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. तुषार कांती घोष ने किया।

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि यह तरल पदार्थ से भरी बहु-कक्षीय (मल्टी-चैम्बर) गांठ गर्दन की कई महत्वपूर्ण संरचनाओं, जैसे कैरोटिड धमनी (जो मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाती है), इंटरनल जुगुलर शिरा और वेगस नर्व, को चारों ओर से घेरे हुए थी। इन महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं और नसों को बिना किसी नुकसान के ट्यूमर से अलग करना इस सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती थी। सर्जिकल टीम ने पूरी गांठ को सफलतापूर्वक निकाल दिया और सभी महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं एवं नसों को सुरक्षित रखा। सर्जरी के दौरान रक्तस्राव बहुत कम हुआ। निदान की पुष्टि के लिए सिस्ट के भीतर मौजूद तरल पदार्थ का नमूना प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया। बाद में हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में लिम्फैन्जियोमा की पुष्टि हुई, जिससे डॉक्टरों का प्रारंभिक चिकित्सकीय आकलन सही साबित हुआ।

इस मामले पर बोलते हुए डॉ. कौशिक दास ने कहा, "लिम्फैन्जियोमा लिम्फैटिक सिस्टम की एक दुर्लभ सौम्य विकृति है, जो आमतौर पर बचपन में ही पहचान में जाती है। छोटे आकार के घावों की केवल निगरानी की जा सकती है, लेकिन इस तरह के बड़े घावों को, विशेष रूप से जब वे महत्वपूर्ण अंगों या संरचनाओं पर दबाव डालने लगें, पूरी तरह सर्जरी से हटाना आवश्यक होता है। इस मामले में ट्यूमर काफी बड़ा हो चुका था और कैरोटिड धमनी, इंटरनल जुगुलर शिरा तथा वेगस नर्व के बेहद करीब था, जिससे सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गई थी। हमारा मुख्य उद्देश्य इन महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को पूरी तरह निकालना था, क्योंकि यदि इसका कोई हिस्सा रह जाए तो इसके दोबारा होने की संभावना रहती है। हमें खुशी है कि सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज ने बहुत अच्छी तरह से स्वस्थ होकर रिकवरी की है।"

डॉ. उशरिन बोस ने कहा, "इस सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विशाल लिम्फैन्जियोमा के कारण गर्दन की सामान्य शारीरिक संरचना का बदल जाना था। ट्यूमर ने कैरोटिड धमनी को गर्दन के अंदर की ओर खिसका दिया था, जिससे सर्जरी के दौरान गलती की गुंजाइश बहुत कम थी। इसके अलावा, लिम्फैन्जियोमा को उसकी पूरी दीवार सहित एक साथ निकालना भी काफी चुनौतीपूर्ण था। मरीज की नसों और प्रमुख रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को अलग करने के लिए हर चरण में बेहद सावधानीपूर्वक योजना और सटीक सर्जिकल तकनीक की आवश्यकता थी। ऑपरेशन के बाद भी मरीज की लगातार निगरानी उतनी ही महत्वपूर्ण थी, ताकि सांस लेने में कठिनाई, नसों से जुड़ी जटिलताएं या घाव से संबंधित कोई समस्या हो। मरीज की सहज रिकवरी और उत्कृष्ट कार्यात्मक परिणाम समन्वित बहु-विषयक उपचार और समय पर हस्तक्षेप के महत्व को दर्शाते हैं।"

ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी पूरी तरह सामान्य रही। उनकी रक्त संचार संबंधी स्थिति स्थिर रही, दर्द पर संतोषजनक नियंत्रण था और उन्हें किसी भी प्रकार की जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा। प्रतिदिन की जांच में उनके सभी महत्वपूर्ण शारीरिक संकेत स्थिर पाए गए, ड्रेन का स्राव बहुत कम था, वे सामान्य रूप से भोजन कर रहे थे और लगातार स्वस्थ हो रहे थे। ऑपरेशन के दूसरे दिन ड्रेन निकाल दिया गया, जिसके बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सात दिन बाद फॉलो-अप के दौरान टांके हटा दिए गए और पाया गया कि मरीज बिना किसी जटिलता के अच्छी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, यदि इस प्रकार के विशाल लिम्फैन्जियोमा का समय पर उपचार किया जाए तो यह लगातार बढ़ सकता है और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं पर दबाव डाल सकता है, जिससे निगलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी और गंभीर असुविधा हो सकती है। इसलिए इन जटिलताओं से बचने और मरीज के पूर्ण स्वस्थ होने के लिए समय पर रोग की पहचान और शीघ्र सर्जिकल हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है।

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