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गोदरेज कैपिटल ने शुरू किया 'सप्लाई चेन फाइनेंस' बिजनेस; भारत के एमएसएमई के लिए कार्यशील पूंजी हासिल करना होगा और आसान

गोदरेज कैपिटल ने शुरू किया 'सप्लाई चेन फाइनेंस' बिजनेस; भारत के एमएसएमई के लिए कार्यशील पूंजी हासिल करना होगा और आसान

·                     अपनी सहायक कंपनी गोदरेज फाइनेंस के माध्यम से कंपनी का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 6,000 करोड़ रुपये का सप्लाई चेन फाइनेंस पोर्टफोलियो तैयार करना है। इस कारोबार से गोदरेज फाइनेंस की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में लगभग 8% योगदान मिलने की उम्मीद है।

 

मुंबई: गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह की वित्तीय सेवा शाखा गोदरेज कैपिटल ने अपनी सहायक कंपनी गोदरेज फाइनेंस के माध्यम से आज अपने सप्लाई चेन फाइनेंस (SCF) कारोबार की शुरुआत की घोषणा की। यह कदम कंपनी के एमएसएमई ऋण कारोबार के रणनीतिक विस्तार का हिस्सा है। कार्यशील पूंजी वित्तपोषण (वर्किंग कैपिटल फाइनेंसिंग) के व्यापक समाधान के जरिए यह कारोबार एंकर कॉरपोरेट्स, डीलरों, विक्रेताओं (वेंडर्स) और आपूर्तिकर्ताओं (सप्लायर्स) को तेज, तकनीक-सक्षम और आसान ऋण उपलब्ध कराएगा। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 6,000 करोड़ रुपये का सप्लाई चेन फाइनेंस पोर्टफोलियो तैयार करना है, जिससे गोदरेज फाइनेंस की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में लगभग 8% का योगदान मिलने की उम्मीद है।

 

जैसे-जैसे जीएसटी-आधारित डिजिटलीकरण और डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे के कारण भारत की सप्लाई चेन अधिक औपचारिक होती जा रही है, मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स के बावजूद छोटे और मझौले उद्यमों को अभी भी वर्किंग कैपिटल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। गोदरेज फाइनेंस का सप्लाई चेन फाइनेंस प्रस्ताव बुनियादी व्यापार लेनदेन  के आधार पर औपचारिक लोन तक तेजी से पहुंच प्रदान करके इस कमी को दूर करता है।

 

गोदरेज फाइनेंस के एमडी और सीईओ पंकज गुप्ता ने कहा, "छोटे और मझौले उद्यम (MSMEs) भारत की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं, फिर भी समय पर वर्किंग कैपिटल मिलना कई व्यवसायों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हमारे सप्लाई चेन फाइनेंस बिजनेस की शुरुआत के साथ, हम एंकर कॉरपोरेट्स के वेंडरों और खरीदारों को एक आसान डिजिटल अनुभव के जरिए तेजी से लोन प्राप्त करने में सक्षम बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य छोटे और मझौले उद्यमों को ऐसी वैल्यू-एडेड सेवाएं देना है जो अधिक लचीले, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बिजनेस बनाने में मदद करें। यह सप्लाई चेन इकोसिस्टम में एक दीर्घकालिक ग्रोथ पार्टनर बनने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।"

यह समाधान संपूर्ण सप्लाई चेन इकोसिस्टम को कवर करता है और देय (Payables) तथा प्राप्य (Receivables) दोनों प्रकार के वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करता है। डीलर फाइनेंसिंग, वेंडर फाइनेंसिंग, परचेज इनवॉइस फाइनेंसिंग और सेल्स इनवॉइस फाइनेंसिंग जैसी सुविधाओं के माध्यम से यह व्यवसायों को खरीद, इन्वेंट्री और बकाया राशि (रिसीवेबल्स) का अधिक प्रभावी प्रबंधन करने में मदद करता है। साथ ही, विक्रेताओं और खरीदारों को वास्तविक व्यापारिक लेनदेन के आधार पर तुरंत तरलता (लिक्विडिटी) प्राप्त करने में भी सक्षम बनाता है।

 

10 लाख रुपये से लेकर 25 करोड़ रुपये तक की ऋण राशि वाले इस समाधान को विशेष रूप से उन व्यवसायों के लिए तैयार किया गया है, जो बड़े एंकर कॉरपोरेट्स की सप्लाई चेन का हिस्सा हैं। इसमें BBB से लेकर AAA रेटिंग वाली तथा 500 करोड़ रुपये से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक राजस्व वाली कंपनियों के साथ कार्य करने वाले व्यवसाय शामिल हैं। एंकर-आधारित इकोसिस्टम पर आधारित यह मॉडल पूरी वैल्यू चेन में मजबूत कारोबारी संबंध स्थापित करता है और टिकाऊ व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देता है।

पारंपरिक जमानत-आधारित (कोलेटरल) ऋण मॉडल के विपरीत, यह समाधान नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) और वास्तविक लेनदेन पर आधारित अंडरराइटिंग मॉडल पर आधारित है, जिससे व्यवसाय अपनी वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों के आधार पर कार्यशील पूंजी प्राप्त कर सकते हैं। कंपनी फिलहाल कैप्टिव और नॉन-कैप्टिव इकोसिस्टम में 30 से अधिक एंकर कॉरपोरेट्स के साथ साझेदारी की दिशा में काम कर रही है। यह कारोबार ग्राहक ऑनबोर्डिंग, अंडरराइटिंग, ऋण वितरण (डिस्बर्समेंट) और सेवा (सर्विसिंग) तक पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया उपलब्ध कराता है। साथ ही, लेनदेन आधारित डेटा और धनराशि के उपयोग की निगरानी (एंड-यूज़ मॉनिटरिंग) के माध्यम से तेज ऋण स्वीकृति और जिम्मेदार वित्तपोषण सुनिश्चित करता है।

 

अपनी दीर्घकालिक रणनीति के तहत गोदरेज फाइनेंस भविष्य में फैक्टरिंग, रिवर्स फैक्टरिंग तथा ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म पर भागीदारी के माध्यम से भी अपने सप्लाई चेन फाइनेंस कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रही है। इन नई क्षमताओं से एमएसएमई के लिए ऋण तक पहुंच और मजबूत होगी तथा कार्यशील पूंजी के अधिक कुशल इकोसिस्टम के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

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