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भारत में
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों की संख्या 2026 में 5.2 करोड़ के पार पहुंच गई,
जो 2016 के मुकाबले 3.6
गुना अधिक है।
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पिछले 10
वर्षों में क्रेडिट कार्ड पर कुल बकाया
राशि 8.3 गुना बढ़कर 3.1
लाख करोड़ रुपये हो गई है।
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मार्च 2026
तक पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले 50
फीसदी लोग 30
साल या उससे कम उम्र के युवा थे। साथ ही,
इनमें से 46
फीसदी लोग छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों
के रहने वाले हैं, जो इसकी हर जगह पहुंच को दिखाता है।
मुंबई: ट्रांसयूनियन
सिबिल की ताजा रिपोर्ट 'बियॉन्ड द स्वाइप 2026'
के मुताबिक,
भारत में पहली
बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले ग्राहक अब अधिक युवा हैं और वे सिर्फ बड़े महानगरों
तक सीमित नहीं हैं। मार्च 2026 तक, पहली बार कार्ड
लेने वाले युवाओं (30 साल या उससे कम) की हिस्सेदारी
बढ़कर 50 फीसदी हो गई, जो मार्च 2022
में 43
फीसदी थी। इसी
तरह, छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों के ग्राहकों की हिस्सेदारी भी 42
फीसदी से बढ़कर
46 फीसदी हो गई है।
यह भी सामने आया है कि पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले लोग वित्तीय रूप से
पहले से ही सक्रिय हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 25 फीसदी ग्राहकों के पास पहले से ही तीन या उससे ज्यादा लोन चल रहे हैं। इससे
पता चलता है कि कई ग्राहकों के लिए क्रेडिट कार्ड बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का
पहला माध्यम नहीं है, बल्कि वे इसे
अपने पहले से चल रहे लोन या क्रेडिट विकल्पों में जोड़ रहे हैं। दुनिया के दूसरे
देशों जैसे ब्रिटेन (70 फीसदी), कोलंबिया (62 फीसदी) और
हांगकांग (98 फीसदी) के मुकाबले भारत में
क्रेडिट कार्ड का चलन अभी काफी कम है। मार्च 2026 तक भारत में लोन या क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले कुल सक्रिय
ग्राहकों में से केवल 25 फीसदी के पास
ही क्रेडिट कार्ड है। यह कम आंकड़ा और युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी साफ दिखाती है कि
भारत में क्रेडिट कार्ड बाजार के सुरक्षित विकास के लिए अभी बहुत संभावनाएं हैं।
ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी
और सीईओ श्री भावेश जैन ने कहा,
"भारतीय क्रेडिट कार्ड
बाजार में पिछले एक दशक से आ रही तेजी अब ग्राहकों की बदलती वित्तीय जरूरतों से तय
हो रही है। आज कई ग्राहक क्रेडिट कार्ड के साथ-साथ छोटे पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और
कम अवधि के दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि ग्राहकों
का दायरा अब अधिक औपचारिक और रोजमर्रा की जरूरतों के अनुकूल हो रहा है। इसके साथ
ही, पूरे
बैंकिंग क्षेत्र की यह जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि यह विकास ग्राहकों की भुगतान
क्षमता और उनके कुल कर्ज के बोझ के दायरे में ही हो। जैसे-जैसे क्रेडिट कार्ड की
पहुंच बढ़ रही है, हमारा ध्यान क्रेडिट की गुणवत्ता और ग्राहकों के भरोसे
को बनाए रखते हुए लोन की पहुंच को और व्यापक बनाने पर होना चाहिए।"
ग्राहकों के व्यवहार के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां
चूंकि अब क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के अलग-अलग लोन
विकल्पों का हिस्सा बन चुके हैं, इसलिए सभी कार्डधारकों को
एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। इस दस साल के अध्ययन में पुराने कार्डधारकों को
उनके कार्ड इस्तेमाल करने के तरीके और उनके अन्य लोन के आधार पर चार श्रेणियों में
बांटा गया है। इसमें मुख्य रूप से कार्ड इस्तेमाल करने वाले ग्राहक सबसे ज्यादा 33 फीसदी हैं। इसके बाद कभी-कभार कार्ड इस्तेमाल करने
वाले 18 फीसदी, विभिन्न प्रकार के लोन
रखने वाले 12 फीसदी और अधिक कर्ज वाले ग्राहक 10 फीसदी हैं। वहीं, जिन ग्राहकों को कार्ड
इस्तेमाल करते हुए एक साल से कम समय हुआ है और मार्च 2026 तक जिनकी हिस्सेदारी 9 फीसदी है, समय के साथ अनुभव बढ़ने पर वे भी आगे चलकर इन्हीं
चार श्रेणियों में से किसी एक में शामिल हो जाएंगे।
जिन कार्डधारकों के कार्ड इस्तेमाल की जानकारी नहीं
थी या जिनका भुगतान 30 दिनों से ज्यादा समय से बाकी था, उन्हें इन श्रेणियों में शामिल नहीं किया गया है।
ये श्रेणियां मार्च 2024 तक समय पर अपने बिल चुकाने वाले ग्राहकों के आधार
पर बनाई गई हैं। इस वर्गीकरण की मदद से भविष्य में ग्राहकों के लोन लेने के
तौर-तरीकों का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। जैसे, मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच, अलग-अलग तरह के लोन
इस्तेमाल करने वाले 62 फीसदी और भारी कर्ज वाले 48 फीसदी ग्राहकों ने नया
अनसिक्योर्ड लोन (जैसे पर्सनल लोन) लिया। इसके मुकाबले, मुख्य रूप से कार्ड इस्तेमाल करने वाले सिर्फ 27 फीसदी और कभी-कभार कार्ड इस्तेमाल करने वाले महज 12 फीसदी ग्राहकों ने ही नया लोन लिया। इस एक साल के
दौरान अलग-अलग श्रेणी के ग्राहकों में बकाया राशि बढ़ने की रफ्तार और भुगतान में
चूक करने की आदत भी काफी जुदा रही।
पहला कार्ड मिलने से पहले ही लोन ले रहे हैं जेन जेड
युवा
कई युवाओं के लिए उनका पहला क्रेडिट कार्ड अब
बैंकिंग या लोन व्यवस्था से जुड़ने का पहला कदम नहीं रह गया है। रिपोर्ट बताती है
कि युवा भारतीयों के वित्तीय तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। साल 2024 में कार्ड बाजार से जुड़ने वाले 24 से 30 साल के जेन जेड युवाओं में पहले से ही कोई लोन चलने
की संभावना अधिक देखी गई, जबकि 2018 में इसी उम्र के मिलेनियल
ग्राहकों के साथ ऐसा कम ही था।
पहला क्रेडिट कार्ड लेते समय 31 फीसदी जेन जेड ग्राहकों के
पास पहले से ही दो या उससे ज्यादा लोन चल रहे थे। साल 2024 में ऐसे जेन जेड युवा
सिर्फ 30 फीसदी थे जिनका पहले का
कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं था, जबकि 2018 में मिलेनियल्स के लिए यह
आंकड़ा 56 फीसदी था। इसके अलावा, पहला कार्ड मिलने के समय ही 18 फीसदी जेन जेड युवाओं के
पास कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और 23 फीसदी के पास छोटा पर्सनल
लोन पहले से ही एक्टिव था।
पहला कार्ड मिलने के बाद शुरुआती दिनों में उनका
इस्तेमाल भी काफी सक्रिय रहा। हालांकि दोनों पीढ़ियों के युवाओं में कार्ड
एक्टिवेट कराने की दर एक जैसी थी, लेकिन जेन जेड युवा पहला
कार्ड मिलने के शुरुआती तीन महीनों में अधिक खर्च कर रहे थे। पहली बार कार्ड लेने
वाले करीब 28 फीसदी जेन जेड युवाओं का बकाया बैलेंस पहले तीन
महीनों में ही 25,000 रुपये के पार निकल गया, जबकि 2018 में इसी उम्र के मिलेनियल्स के लिए यह आंकड़ा केवल 20 फीसदी था।
यह सक्रियता सिर्फ पहले कार्ड तक सीमित नहीं रही।
पहली बार कार्ड लेने वाले करीब 69 फीसदी जेन जेड युवाओं ने सालभर के भीतर ही एक और लोन
ले लिया, जबकि 2018 में इसी उम्र के मिलेनियल्स के लिए यह संख्या 55 फीसदी थी। नया लोन लेने वाले इन ग्राहकों में से 39 फीसदी जेन जेड युवाओं ने उसी बैंक को चुना जिससे
उन्होंने अपना पहला कार्ड लिया था, जबकि मिलेनियल्स के मामले
में यह संख्या 33 फीसदी थी।
श्री जैन ने कहा,
"पहले क्रेडिट कार्ड की
भूमिका में आ रहा यह बदलाव बेहद ध्यान देने योग्य है। कई नए कार्डधारक भले ही अभी
औपचारिक लोन व्यवस्था के शुरुआती दौर में हों, लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा भी
है जो पहले से ही लोन के अनुभव के साथ इस बाजार में आ रहा है। यह बात खास तौर पर
जेन जेड युवाओं में दिखती है, जो बहुत जल्दी नए वित्तीय
उत्पाद अपना रहे हैं और अपने पहले कार्ड जारी करने वाले बैंक के साथ ज्यादा जुड़ाव
दिखा रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा,
"बैंकों के लिए अवसर सिर्फ
इतना नहीं है कि वे पहली बार कार्ड देते समय ग्राहक को अपने साथ जोड़ लें। असली
चुनौती उनका भरोसा जीतने, उनकी बदलती जरूरतों के काम
आने और एक ऐसा मजबूत रिश्ता बनाने की है जो जिम्मेदारी के साथ उनकी आर्थिक जरूरतों
को पूरा कर सके। बाजार की बढ़त, ग्राहकों का भरोसा और उनका
जिम्मेदार व्यवहार ही भारत के क्रेडिट कार्ड बाजार के अगले दौर की दिशा तय
करेगा।"