भोपाल:, माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा किए गए संयुक्त सर्वेक्षण के
अनुसार, मध्य प्रदेश में आजीविका सृजन और परिवारों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में
माइक्रोफाइनेंस की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। राज्य में उधारकर्ता परिवारों का
प्रति व्यक्ति मासिक व्यय (MPCE) ₹2,594 ,
खाद्य व्यय ₹1,053 और औसत मासिक बचत ₹2,637 दर्ज की गयी है। यह औपचारिक वित्तीय
प्रणालियों के साथ उनका लगातार जुड़ाव और अनुशासित वित्तीय व्यवहार को दर्शाता है।
इस सर्वेक्षण में पाया गया है कि राज्य में, माइक्रोफाइनेंस का सीधा संबंध आय-सृजन गतिविधियों से है, जहां अधिकांश
उधारकर्ता ऋण का इस्तेमाल कृषि, कृषि संबंधित गतिविधियों और लघु उद्यमों के लिए करते हैं। यह स्वरोज़गार को
बढ़ावा देने और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने में माइक्रोफाइनेंस की
भूमिका को रेखांकित करता है।
इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि माइक्रोफाइनेंस
घरेलू स्तर पर संचालित और आवाजाही से जुड़े उद्यमों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभा रहा है,
जिसकी पुष्टि परिसंपत्ति स्वामित्व के आँकड़े भी करते हैं ।
87.8% परिवारों के पास दोपहिया वाहन और 40.3%
के पास सिलाई मशीन होने से, उधारकर्ता स्थानीय
स्तर पर संचालित और अपनी क्षमता के अनुरूप विस्तार योग्य आय-सृजन गतिविधियों को
बढ़ावा देने के लिए ऋण का प्रभावी रूप से उपयोग कर रहे हैं।
यह रिपोर्ट उधारकर्ता परिवारों में
बचत व्यवहार को भी दर्शाती है, जिनकी औसत मासिक बचत ₹2,637 हैजो उनकी बढ़ती वित्तीय जागरूकता और आय, व्यय और ऋण का
प्रभावी प्रबंधन की क्षमता उजागर करती है।
इस सर्वेक्षण से ये भी स्पष्ट है कि
लोग अब औपचारिक वित्तीय प्रणालियों की ओर रुख कर रहे हैं, ऋण लेने के लिए वे विनियमित ऋण चैनलों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ रही है और औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का दायरा भी
विस्तृत हो रहा है।
इसके साथ डिजिटल प्रक्रिया को भी तेज़ी
से अपनाया जा रहा है,
जिससे वित्तीय पहुंच को और बेहतर बनाने और लेन-देन की
दक्षता बढ़ाने का अवसर मिल रहा है, क्योंकि मोबाइल-आधारित
प्लेटफॉर्म का विस्तार निरंतर जारी है।
MFIN के मुख्य कार्यकारी और निदेशक,
डॉ. आलोक मिश्रा के अनुसार:
"इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि लोग अब औपचारिक ऋण की ओर बढ़ रहे हैं, अनौपचारिक
स्रोतों पर उनकी निर्भरता तेज़ी से कम हुई है और उधारकर्ताओं की स्थिति में सुधार
हुआ है।। साथ ही, अत्यधिक ऋणग्रस्तता के जोखिम को कम करने के
लिए, विशेषकर घरेलू आय-व्यय के संदर्भ में, ऋण मूल्यांकन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।। ऋण लेने वालों की
भागीदारी,
बचत से जुड़े व्यवहार और ऋण के उचित इस्तेमाल के लिहाज़ से
दिख रहे सकारात्मक रुझान से लोगों की
आजीविका को सहारा देने में इस सेक्टर की भूमिका और सुदृढ़ होती है। आने वाले दिनों में वित्तीय जागरूकता,
ज़िम्मेदार ऋण वितरण और डिजिटल तरीकों को अपनाने पर विशेष
ध्यान देना,
वित्तीय समावेश बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।"
भारत सरकार के मुख्य
आर्थिक सलाहकार,
डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार,
"10 राज्यों में 10,000 से
अधिक उधारकर्ताओं पर आधारित इस NCAER-MFIN सर्वेक्षण के
निष्कर्ष उत्साहजनक हैं और हमें बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित
करते हैं। आज माइक्रोफाइनेंस संस्थानों का करोड़ों उधारकर्ताओं के साथ मज़बूत
रिश्ता है, जो भरोसे पर आधारित है। यह ऋण से आगे बढ़कर वित्तीय साक्षरता को मजबूत
करने, जागरूकता बढ़ाने तथा कौशल विकास और अन्य प्रयासों के
माध्यम से आय में वृद्धि को समर्थन देने का अवसर प्रदान करता है।इस सहभागिता का
प्रभावी उपयोग सतत आजीविका को आगे बढ़ाने और परिवारों की आर्थिक सुदृढ़ता को मजबूत
करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"
इन निष्कर्षों से स्पष्ट है कि मध्य
प्रदेश में माइक्रोफाइनेंस,
आजीविका के अवसर पैदा करने, उद्यमों को बढ़ावा देने और उधारकर्ता परिवारों की आर्थिक नींव को मज़बूत करने
में अहम भूमिका निभा रहा है, साथ ही, इसमें आय सृजन और वित्तीय समावेश को और आगे बढ़ाने की पर्याप्त क्षमता मौजूद
है।