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टाटा एआईजी की ‘द कॉर्पोरेट हेल्थ प्रोटेक्शन पल्स 2026’ रिपोर्ट: कॉर्पोरेट इंडिया की सबसे बड़ी वित्तीय चिंता बनी स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत; नौकरी की सुरक्षा और ईएमआई को छोड़ा पीछे

टाटा एआईजी की ‘द कॉर्पोरेट हेल्थ प्रोटेक्शन पल्स 2026’ रिपोर्ट: कॉर्पोरेट इंडिया की सबसे बड़ी वित्तीय चिंता बनी स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत; नौकरी की सुरक्षा और ईएमआई को छोड़ा पीछे
  • 94% लोगों का मानना है कि अचानक आने वाले मेडिकल खर्च उनके वित्तीय तनाव का सबसे बड़ा कारण हैं।
  • 10 में से लगभग 7 लोग नौकरी जाने की स्थिति में सिर्फ 6 महीने या उससे कम समय तक ही अपना खर्च चला सकते हैं।
  • 84% लोग कंपनी के बीमा के अलावा अलग से हेल्थ कवर को जरूरी मानते हैं, इसके बावजूद लगभग आधे लोगों के पास कंपनी से मिलने वाले ग्रुप मेडिकल कवर (जीएमसी) के अलावा खुद की कोई पर्सनल पॉलिसी नहीं है।
  • जागरूकता की कमी और 'बाद में खरीदेंगे' वाला रवैया ही पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस न खरीदने के सबसे बड़े कारण हैं।

 

मुंबई: टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने आज कॉर्पोरेट कर्मचारियों की बदलती स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर केंद्रित अपनी ताजा स्टडी—'द कॉर्पोरेट हेल्थ प्रोटेक्शन पल्स 2026' के निष्कर्ष साझा किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला बढ़ता खर्च कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी वित्तीय चिंता बन चुका है। इस बढ़ते खर्च के दबाव ने नौकरी की सुरक्षा, ईएमआई के भुगतान और वैश्विक अस्थिरता जैसी अन्य प्रमुख चिंताओं को भी पीछे छोड़ दिया है।

 

यह स्टडी भारत के कामकाजी वर्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं के लगातार बढ़ते वित्तीय बोझ को भी रेखांकित करती है। लगभग 94% सर्वेक्षित लोगों का मानना है कि अचानक आने वाले मेडिकल खर्च उनके वित्तीय तनाव का सबसे बड़ा कारण हैं, जिसके चलते यह नौकरी जाने या करियर में ठहराव आने जैसी अन्य चिंताओं से भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। इसके साथ ही, कर्मचारियों की वित्तीय आत्मनिर्भरता की क्षमता काफी सीमित देखी गई; केवल 12% लोगों को यह भरोसा था कि वे बिना नौकरी के एक साल से अधिक समय तक अपना खर्च चला सकते हैं। ये निष्कर्ष दिखाते हैं कि कई कॉर्पोरेट कर्मचारी लंबे समय तक आय बंद होने की स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। 10 में से लगभग 7 लोगों ने कहा कि नौकरी छूटने की स्थिति में वे केवल 6 महीने या उससे कम समय तक ही आर्थिक रूप से अपना गुजारा कर सकते हैं। अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ, परिवार के लिए हेल्थ कवर, मानसिक स्वास्थ्य और आपातकालीन स्थितियों के लिए बचत की कमी—कॉर्पोरेट इंडिया के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी 5 सबसे बड़ी चिंताएं बनकर सामने आई हैं। यह आंकड़े बेहतर वित्तीय तैयारी और स्वास्थ्य सुरक्षा की बढ़ती जरूरत को साफ तौर पर दर्शाते हैं।

 

यह स्टडी आगे यह स्पष्ट करती है कि नौकरी बदलने के दौरान स्वास्थ्य संबंधी खर्च सबसे बड़ी वित्तीय चिंता के रूप में सामने आए हैं, जो आय के नुकसान और ईएमआई के दबाव से भी कहीं अधिक हैं। सर्वेक्षित लोगों के बीच जागरूकता की भारी कमी इस चिंता को और ज्यादा गंभीर बना देती है। हालांकि 88% लोग नौकरी बदलने के दौरान बिना किसी रुकावट के लगातार हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलते रहने को जरूरी मानते हैं, लेकिन केवल 40% लोगों को ही ऐसे उपायों या विकल्पों की जानकारी है, जो मेडिकल कवर की निरंतरता सुनिश्चित करते हैं। यह आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि नौकरी बदलने के इस बेहद संवेदनशील दौर में इंश्योरेंस को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

 

इस स्टडी पर अपने विचार साझा करते हुए टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के रिटेल–हेल्थ अंडरराइटिंग हेड, डॉ. संतोष पुरी ने कहा, "इस स्टडी को करने का हमारा उद्देश्य यह बेहतर ढंग से समझना था कि कॉर्पोरेट कर्मचारी कंपनी की तरफ से मिलने वाले हेल्थ इंश्योरेंस को कैसे देखते हैं। साथ ही, हम जागरूकता और तैयारियों के स्तर पर मौजूद कमियों की पहचान करना चाहते थे। इसमें कोई शक नहीं है कि ग्रुप मेडिकल कवर कर्मचारियों की भलाई और सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ है, लेकिन इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि कई लोग अब भी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि उनकी पॉलिसी में क्या-क्या कवर है। वे इस बात को लेकर भी असमंजस में हैं कि कोई मेडिकल इमरजेंसी आने या नौकरी बदलने के दौरान यह कवर उनके लिए काफी होगा या नहीं। स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते खर्च को देखते हुए हमारा मानना है कि आने वाले समय में जागरूकता और वित्तीय रूप से तैयार रहना बेहद जरूरी हो जाएगा। हमें उम्मीद है कि इन नतीजों से कर्मचारी अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े सही फैसले लेने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही, कामकाजी वर्ग को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियों, बीमा प्रदाताओं और पॉलिसीमेकर्स के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।"

 

कंपनी की ओर से मिलने वाले ग्रुप मेडिकल कवर का बारीक विश्लेषण करने पर सुरक्षा कवच में एक बड़ी चूक सामने आती है। जहाँ 84% सर्वेक्षित लोगों का मानना है कि कंपनी से मिलने वाले ग्रुप मेडिकल कवर के साथ-साथ अलग से अतिरिक्त हेल्थ कवर होना बेहद जरूरी है; वहीं इसके विपरीत, लगभग आधे यानी 45% लोग ऐसे हैं जिनके पास कंपनी के कवर के अलावा अपनी कोई अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं है। अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस न खरीदने के पीछे जागरूकता की कमी और 'बाद में खरीद लेंगे' वाला टालमटोल भरा रवैया सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है, और यह ट्रेंड विशेष रूप से 28 से 34 वर्ष के आयु वर्ग में सबसे ज्यादा देखा गया है।

 

स्टडी का एक और अहम निष्कर्ष सुरक्षा कवच की एक कमी की ओर इशारा करता है। इसके मुताबिक, भले ही एक बड़ी संख्या में कर्मचारी अपनी कंपनी से मिलने वाले ग्रुप मेडिकल कवरेज से संतुष्ट हैं, लेकिन वे इसकी पर्याप्तता (कवरेज की रकम) को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। लगभग 75% कर्मचारियों का मानना है कि इमरजेंसी में अस्पताल में भर्ती होने के दौरान सिर्फ कंपनी का ग्रुप मेडिकल कवर अकेले काफी नहीं होगा।

 

यह सर्वे कंपनी की ओर से मिलने वाले हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे और उसकी सीमाओं को लेकर कर्मचारियों की समझ में मौजूद बड़ी कमियों को भी दर्शाता है। केवल 41% कॉर्पोरेट कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी कंपनी से मिलने वाले ग्रुप मेडिकल कवर के सभी फीचर्स और फायदों से पूरी तरह वाकिफ हैं। यह आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि कर्मचारियों के बीच ग्रुप मेडिकल कवर को लेकर जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

 

अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के पीछे परिवार की सुरक्षा आज भी सबसे बड़ी वजह बनी हुई है। सर्वे में शामिल लोगों ने टॉप-अप प्लान चुनते समय अधिक बीमा राशि, परिवार के सदस्यों के लिए कवरेज और नौकरी बदलने के दौरान कवर की निरंतरता को सबसे महत्वपूर्ण फीचर्स बताया। यह ट्रेंड साफ तौर पर दिखाता है कि लोग अब ऐसी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं जो उनके मौजूदा ग्रुप मेडिकल कवर के फायदे को और बढ़ा सके।

 

कुल मिलाकर, ये निष्कर्ष इस बात की पुष्टि करते हैं कि एक सार्थक स्वास्थ्य सुरक्षा का मतलब केवल कंपनी से मिलने वाले इंश्योरेंस तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि इसमें पर्याप्त कवरेज, सोच-समझकर लिए गए फैसले और सुरक्षा की निरंतरता भी शामिल है। कामकाजी वर्ग को अधिक स्वस्थ और आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने के लिए इन कमियों को दूर करना बेहद जरूरी होगा।

 

इस स्टडी के तहत मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे और कोलकाता के 28 से 55 वर्ष की आयु वर्ग के 748 से अधिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के बीच सर्वे किया गया। इस सर्वे में शामिल सभी कर्मचारी अपनी कंपनी की ओर से मिलने वाली ग्रुप मेडिकल कवर पॉलिसी के तहत बीमित थे।

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