भारत की यूरिया मांग 40 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) तक पहुंचने की उम्मीद; वर्तमान में भारत अपनी वार्षिक यूरिया जरूरतों का लगभग 26% आयात करता है।
कैबिनेट द्वारा 8-9 नए गैस-आधारित संयंत्र स्थापित करने के निर्देश से स्थानीय क्षमता में 10 मिलियन मीट्रिक टन की बढ़ोतरी होगी।
नई दिल्ली : फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने घरेलू यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए 'नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026' (NIPU-2026 / नीपू-2026) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी का स्वागत किया है
'नीपू-2026' (NIPU-2026) के तहत इक्विटी पर रिटर्न (RoE) का सुरक्षित दायरा 12% से 16% तय किया गया है, सब्सिडी के उद्देश्य से निश्चित (फिक्स्ड) और परिवर्तनशील (वेरिएबल) लागतों के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है, और 4 वर्षों के बाद निश्चित लागतों को भारतीय रुपये (INR) में परिवर्तित करके निवेशकों को मुद्रा के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान की गई है
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के को-चेयरमैन डॉ. शिबा प्रसाद मोहंती ने कहा:
"नीपू-2026 भारत के उर्वरक क्षेत्र में प्रमुख संरचनात्मक चुनौती—बढ़ती मांग और स्थिर स्थानीय क्षमता के बीच के अंतर—का समाधान करती है
। यह नीति निवेशकों को आवश्यक विश्वास प्रदान करती है और यूरिया उत्पादन में भारत के पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त करती है ।"
एफएआई (FAI) ने इस समयोचित और दूरदर्शी दृष्टिकोण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की सराहना की है, जो भारतीय कृषि को वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से सुरक्षित रखेगा और दीर्घकालिक खाद्य व उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करेगा