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गोदरेज
वॉशिंग मशीन्स द्वारा समर्थित उपभोक्ता अध्ययन 'हैंडलूम डिलेमा' में हुए कई अहम खुलासे
मुंबई: राष्ट्रीय हैंडलूम
दिवस के अवसर पर गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के एप्लायंसेज़ कारोबार ने 'हैंडलूम डिलेमा' उपभोक्ता सर्वेक्षण के
निष्कर्ष जारी किए हैं। ट्वेंटीफाई इंडिया (Twentify India) के साथ मिलकर किए गए इस अध्ययन में भारतीय उपभोक्ताओं के बीच हैंडलूम
के उपयोग, उसके प्रति सोच और जागरूकता का आकलन किया गया।
अध्ययन में सामने आया कि लोग भारतीय हैंडलूम कपड़ों के प्रति प्रेम तो जताते हैं,
लेकिन उनकी वास्तविक जानकारी और नियमित उपयोग के बीच बड़ा अंतर
है।
हैंडलूम भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत का प्रतीक है, जो सदियों पुरानी
क्षेत्रीय कारीगरी को दर्शाता है। 'हैंडलूम डिलेमा'
अध्ययन के अनुसार, लगभग 80% भारतीयों ने कहा कि उन्हें हैंडलूम कपड़े पसंद हैं और पहले की तुलना
में अब उनका आकर्षण इन कपड़ों की ओर अधिक बढ़ा है। अध्ययन की एक दिलचस्प बात यह भी
रही कि हैंडलूम के प्रति लगाव के मामले में जेनरेशन Z (Gen Z) ने जेनरेशन X (Gen X) को पीछे छोड़ दिया है। इसे
भारत में हैंडलूम के पुनर्जीवन के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि लोगों में हैंडलूम के प्रति प्रेम है, लेकिन जागरूकता
की कमी और इन कपड़ों की देखभाल को लेकर चिंता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सर्वेक्षण में 81% लोगों ने जागरूकता की कमी को स्वीकार
किया। वहीं, 70% लोग अपने हैंडलूम कपड़ों को हाथ से धोते
हैं या ड्राई क्लीन करवाते हैं, जिससे उनकी देखभाल समय
लेने वाली और महंगी हो जाती है। यही कारण है कि रखरखाव की परेशानी सबसे बड़ी बाधा
बनकर सामने आती है।
शायद यही वजह है कि आज भी हैंडलूम कपड़ों को मुख्य रूप
से खास मौकों पर पहनने वाला परिधान माना जाता है। लोग इन्हें सबसे अधिक पारिवारिक
समारोहों (71%), त्योहारों (69%), मंदिर जाने (67%) और शादियों (64%) में पहनते हैं, जबकि सामान्य दिनों में केवल 36% लोग ही इनका
उपयोग करते हैं। यानी हैंडलूम कपड़े अब भी खास अवसरों से जुड़े हुए हैं। नाज़ुक
बुनाई वाले इन कपड़ों के धुलते समय खराब हो जाने का डर लोगों को अपनी पसंदीदा
हैंडलूम साड़ी, शर्ट या कुर्ता अलमारी में सुरक्षित रख
देने के लिए मजबूर कर देता है।
हालांकि एक अच्छी खबर भी है, वो यह कि हथकरघा के साथ भारतीयों
का रिश्ता बदल रहा है। 97%
लोगों का कहना है कि अगर हथकरघा कपड़ों को धोना आसान और सुरक्षित
हो जाए, तो वे इन्हें और अधिक खरीदेंगे और पहनेंगे।
देखभाल की इस चुनौती को हल करने के लिए, गोदरेज ने अपनी
एआई-संचालित (AI-powered) फ्रंट लोड वाशिंग मशीनों में 'हैंडलूम फ्रेंडली जेंटल वॉश' (Handloom Friendly Gentle
Wash) फीचर पेश किया है। इसका भारत भर के 25 से अधिक हथकरघा कपड़ों पर सुरक्षित धुलाई के लिए परीक्षण किया गया है।
उन्नत एआई तकनीक से लैस, इन मशीनों को नाजुक कपड़ों के
अनुकूल हल्की वॉश साइकिल देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। घिसावट के स्वीकार्य
स्तर का मूल्यांकन करने के लिए प्रत्येक कपड़े को 25 वॉश
साइकिल से गुजारा गया, जिसके बाद 40X ज़ूम पर विस्तृत दृश्य निरीक्षण और सूक्ष्मदर्शकीय विश्लेषण किया गया।
इस परीक्षण का उद्देश्य घर पर ही विभिन्न प्रकार के भारतीय हथकरघा कपड़ों की
देखभाल करने की मशीन की क्षमता को साबित करना था।
इस पहल पर टिप्पणी करते हुए, गोदरेज
एंटरप्राइजेज ग्रुप के एप्लायंसेज डिविजन के बिजनेस हेड कमल नंदी ने कहा:
"हमारी 'हैंडलूम डिलेमा स्टडी' उस सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती है जो उपभोक्ता भारत की समृद्ध
हथकरघा विरासत को देते हैं। लेकिन यह इस बात के बीच के बड़े अंतर को भी उजागर करती
है कि इन्हें वास्तव में कितनी बार पहना जाता है और लोग इनके बारे में कितना जानते
हैं। गोदरेज में, हमारा मानना है कि विचारशील नवाचार इस
अंतर को कम करने में मदद कर सकता है। अपनी एआई-संचालित वाशिंग मशीनों में हथकरघा
कपड़ों की देखभाल को आसान बनाकर, हमारा उद्देश्य सभी
भारतीयों के बीच हथकरघा के प्रति प्रेम को फिर से जगाने में सहायता और प्रोत्साहन
देना है।"