हिंदुस्तान ज़िंक ग्लोबल एनर्जी ट्रांज़िशन के अगले चरण के लिए खुद को तैयार कर रही है। कंपनी की 60वीं Annual General
Meeting में शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए चेयरपर्सन प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने कहा कि कंपनी ज़िंक से आगे बढ़कर ज़रूरी मिनरल्स, डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी-बेस्ड माइनिंग के क्षेत्र में विस्तार कर रही है।
उन्होंने कहा कि बदलती जियोपॉलिटिक्स,
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव और एनर्जी ट्रांज़िशन नेचुरल रिसोर्स सेक्टर को पूरी तरह से बदल रहे हैं। इससे उन कंपनियों की रणनीतिक अहमियत बढ़ रही है जो ज़िम्मेदारी और भरोसे के साथ बड़े पैमाने पर ज़रूरी मिनरल्स की सप्लाई कर सकती हैं।
एनर्जी ट्रांज़िशन मिनरल्स की बढ़ती अहमियत पर ज़ोर देते हुए हेब्बार ने कहा कि एक इलेक्ट्रिक गाड़ी को आम गाड़ी के मुकाबले छह गुना ज़्यादा मिनरल्स की ज़रूरत होती है, जबकि एनर्जी ट्रांज़िशन मिनरल्स का ग्लोबल मार्केट 2040 तक दोगुने से ज़्यादा बढ़कर 770 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
हेब्बार ने कहा,
"भारत के लिए यह पल बहुत अहम है। जैसे-जैसे हमारी इकॉनमी बढ़ रही है और मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार हो रहा है, ज़रूरी रिसोर्स को सुरक्षित करना एक रणनीतिक प्राथमिकता बनती जा रही है। भारत ने ज़िंक, बॉक्साइट, आयरन ओर, एल्युमीनियम और मैंगनीज़ के क्षेत्र में मज़बूती हासिल की है। लेकिन अब हमें अगले पड़ाव - लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स - पर ध्यान देने की ज़रूरत है, जो क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के लिए ज़रूरी हैं।"
कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी को 'हिंदुस्तान ज़िंक 2.0' बताते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड ज़िंक उत्पादक से एक व्यापक एनर्जी ट्रांज़िशन कंपनी बनने की ओर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा,
"हमारा लक्ष्य अब सिर्फ़ दुनिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड ज़िंक उत्पादक कंपनी बने रहना नहीं है। हमारा लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार एनर्जी ट्रांज़िशन कंपनी बनना है, जो कई तरह के मेटल्स और ज़रूरी मिनरल्स के क्षेत्र में मज़बूती हासिल करे, जिससे भारत की इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा मिले और ग्लोबल सप्लाई चेन मज़बूत हो।"
इस स्ट्रैटेजी के तहत, हिंदुस्तान ज़िंक ने टंगस्टन, पोटाश, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और हैलाइट के लिए मिनरल ब्लॉक हासिल किए हैं, जो ज़रूरी मिनरल्स के क्षेत्र में इसके विस्तार की शुरुआत है। कंपनी समय के साथ चरणों में निवेश करके अपनी प्रोडक्शन क्षमता को दोगुना करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, साथ ही अपने एक्सप्लोरेशन पाइपलाइन को मज़बूत कर रही है और खदानों की उम्र 25 साल से ज़्यादा बनाए रखने पर काम कर रही है।
हेब्बार ने कहा कि कंपनी के विकास के अगले चरण में टेक्नोलॉजी मुख्य भूमिका निभाएगी। प्रोडक्टिविटी,
सटीकता और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड एनालिटिक्स और इंटेलिजेंट माइनिंग सिस्टम में निवेश बढ़ाया जाएगा। कंपनी पुराने कचरे से कीमती मिनरल निकालने के लिए बड़े पैमाने पर टेलिंग्स रीप्रोसेसिंग प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है।
उन्होंने कहा,
"आज हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाली एक मेटल और माइनिंग कंपनी हैं। भविष्य में हमारा लक्ष्य एक ऐसी टेक्नोलॉजी-आधारित कंपनी बनना है जो मेटल का उत्पादन भी करे। यह बदलाव पहले ही शुरू हो चुका है।"
हेब्बार ने यह भी कहा कि हिंदुस्तान जिंक माइनिंग के अगले चरण के लिए एक ज़्यादा समावेशी वर्कफोर्स तैयार कर रही है, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी पहले से ही 26 प्रतिशत है। कंपनी का निकट-अवधि का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत करना है, जबकि लंबी अवधि का लक्ष्य 50 प्रतिशत तक पहुँचना है।
उन्होंने आगे कहा कि हिंदुस्तान जिंक अपने रिसोर्स बेस को मजबूत करना,
नए मटीरियल के क्षेत्र में विस्तार करना और भविष्य की क्षमताएँ विकसित करना जारी रखेगी। साथ ही, कंपनी अनुशासित कामकाज, ज़िम्मेदार विकास और वैल्यू क्रिएशन पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करेगी।