o भारत का डिजिटल मैच्योरिटी इंडेक्स 60.8 तक पहुँचा; तेलंगाना और कर्नाटक राज्यों की रैंकिंग में सबसे आगे, आंध्र प्रदेश पहली बार टॉप 10 में शामिल - एमएसएमई के लिए भारत की सबसे बड़ी डिजिटल एडवाइज़री - वी बिज़नेस रैडी फॉर नेक्स्ट जिसमें 2.5 लाख से ज़्यादा एमएसएमई शामिल हैं
o डिजिटल कस्टमर, डिजिटल वर्कप्लेस और डिजिटल ऑपरेशन्स के अलावा, मूल्यांकन के चौथे स्तंभ के तौर पर फाइनेंशियल रेडीनेस (वित्तीय तैयारी) को शामिल किया गया
o महिलाओं के नेतृत्व वाले एमएसएमई ने पुरुषों के नेतृत्व वाले बिज़नेस के मुकाबले मज़बूत डिजिटल प्रगति दिखाई है
o बढ़ते ऑनलाइन खतरों से निपटने के लिए 46.3 फीसदी भारतीय एमएसएमई ने साइबर डिफेंस समाधान अपनाए हैं
जैसे-जैसे भारत एआई अडॉप्शन और डेटा सेंटर हब के तौर पर तेज़ी से एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, जीडीपी में 31 प्रतिशत से अधिक योगदान देने वाला एमएसएमई सेक्टर भी इसे तेज़ी से अपना रहा है। वी बिज़नेस एमएसमएई ग्रोथ इनसाइट्स स्टडी 2026 के ताज़ा एडिशन में पाया गया कि सर्वे में शामिल 57 फीसदी बिज़नेस एआई को एक मुख्य टूल मानते हैं जो बिज़नेस की ग्रोथ को बढ़ा सकता है, और 25 फीसदी बिज़नेस पहले ही अपने कामकाज और ऑपरेशनल वर्कफ़्लो में एआई को शामिल कर चुके हैं।
यह
वी बिज़नेस के रैडी फॉर नेक्स्ट प्लेटफ़ॉर्म से मिली जानकारियों पर आधारित है - जो छोटे और मध्यम बिज़नेस के लिए भारत की सबसे बड़ी डिजिटल एडवाइज़री है और जिसने 16 सेक्टरों में 2.5 लाख से अधिक एमएसएमई के साथ काम किया है। इस साल, डिजिटल मैच्योरिटी इंडेक्स बढ़कर 60.8 हो गया, जो 2025 में 58.0 और 2023 में 55.9 था। स्टडी में तीन ऐसे टेक्नोलॉजी फैक्टर्स की भी पहचान की गई है जो एमएसएमई के विस्तार के अगले चरण को आकार देंगे। इनमंे शामिल हैं- प्रोडक्टिविटी और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एआई, बड़े पैमाने पर ऑपरेशन्स को सक्षम करने के लिए एसएएएस-आधारित वर्कप्लेस सहयोग, और भरोसा, मज़बूती और बिज़नेस की निरंतरता बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा।
रिपोर्ट
की मुख्य बातें इस प्रकार हैंः
o साइबर सुरक्षा को अपनानाः भारत के लगभग आधे (46.3 फीसदी) एमएसएमई ने ऑनलाइन खतरों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा समाधान अपनाए हैं, जो देश की कुल डीएमआई ग्रोथ के लिए एक बड़ा कारक साबित हो रहे हैं।
o भारत का उद्यमिता परिवेश मजबूत डिजिटल प्रगति दिखा रहा है, जिसमें महिलाओं के नेतृत्व वाले एमएसएमई ने 61.6 का डीएमआई हासिल किया है और पुरुषों के नेतृत्व वाले व्यवसायों ने 60.8 का स्कोर दर्ज किया है। 2025 में 58 से 2026 में 60.8 तक डिजिटल परिपक्वता में हुई तेज वृद्धि यह बताती है कि उद्यमी व्यवसाय की वृद्धि को बढ़ाने, परिचालन दक्षता में सुधार करने और मजबूत उद्यम बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों का तेजी से लाभ उठा रहे हैं।
o डिजिटल वर्कप्लेस बदलाव का सबसे तेजी से बढ़ने वाला स्तंभ बनकर उभरा है, जो 2023 में 57.5 से बढ़कर 2026 में 65.7 हो गया है। यह वर्कप्लेस सहयोग प्लेटफॉर्म, उत्पादकता सुइट्स, एचआरएमएस समाधान और काम करने के डिजिटल तरीकों को तेजी से अपनाए जाने को दर्शाता है। डिजिटल संचालन ने भी मजबूत प्रगति दर्ज की है, जो इसी अवधि के दौरान 56.5 से बढ़कर 62.0 हो गया है, क्योंकि एमएसएमई ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, दक्षता में सुधार करने और व्यावसायिक प्रत्यास्थता को मजबूत करने के लिए तकनीक का तेजी से लाभ उठाया है।
इस
अवसर पर बोलते हुए, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के चीफ एंटरप्राइज बिजनेस ऑफिसर, एम पी सुनील कुमार ने कहा, “भारत के एमएसएमई बुनियादी डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर बुद्धिमान, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार उद्यम बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। एआइ का बढ़ता अडॉप्शन, डिजिटल परिपक्वता के बढ़ते स्तर और कार्यस्थल तथा परिचालन तकनीकों में बढ़ता निवेश एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है। वैश्विक टेक दिग्गजों के साथ सहयोग करके, वी बिज़नेस क्लाउड, सुरक्षा, संचार और अन्य उद्यम समाधानों में समाधान प्रदान करने के लिए अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, जिससे मापने योग्य और प्रभावशाली परिणाम मिल रहे हैं। वित्तीय तैयारी के द्वारा हमारा लक्ष्य एक समावेशी इकोसिस्टम ब्लूप्रिंट प्रदान करना है जो छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों को सुरक्षित करने और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में स्थायी रूप से विस्तार करने में मदद करे।”
परिशिष्ट-
वी बिज़नेस एमएसएमई अध्ययन की विस्तृत जानकारी
क्षेत्रीय
रैंकिंग एवं डिजिटल विकास
डिजिटल
परिपक्वता में विभिन्न क्षेत्रों में लगातार सुधार देखा गया, हालांकि डिजिटल परिवर्तन की गति सभी क्षेत्रों में समान नहीं रही। वित्तीय सेवाएँ 67.3 के
डीएमआई (Digital
Maturity Index) के
साथ भारत का सबसे अधिक डिजिटल रूप से परिपक्व क्षेत्र बनकर उभरा, जिसने आईटी एवं आईटीईएस (66.2) को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा परिवहन (63.6), ऊर्जा
एवं उपयोगिताएँ (62.9) तथा पर्यटन एवं आतिथ्य (62.0) भी
अग्रणी क्षेत्रों में शामिल रहे।
• अध्ययन
की शुरुआत (2023) से अब तक के दीर्घकालिक रुझानों को देखें तो वित्तीय सेवाओं ने सबसे अधिक प्रगति दर्ज की है, जिसमें डीएमआई में 14.3 अंकों की वृद्धि हुई। यह डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग, ग्राहक सहभागिता प्लेटफॉर्म और साइबर सुरक्षा समाधानों को व्यापक रूप से अपनाने के कारण संभव हुआ।
• रिटेल दूसरा
सबसे अधिक सुधार करने वाला क्षेत्र रहा, जिसने डीएमआई में 9.9 अंकों की वृद्धि दर्ज की (52 से बढ़कर 61.9)। यह ओम्नीचैनल ग्राहक जुड़ाव, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ग्राहक अधिग्रहण चैनलों को बढ़ते स्तर पर अपनाने का परिणाम है।
• आईटी
एवं आईटीईएस (+7.2 अंक), पर्यटन एवं आतिथ्य (+7.0 अंक) तथा ऊर्जा एवं उपयोगिताएँ (+6.9 अंक) ने भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। इसका मुख्य कारण AI, क्लाउड तकनीकों, कार्यस्थल सहयोग उपकरणों, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्म का बढ़ता उपयोग रहा।
• इस
प्रगति के बावजूद, विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन अभी भी असमान बना हुआ है। विनिर्माण कृषि, दूरसंचार, लॉजिस्टिक्स, खनन , मीडिया एवं मनोरंजन तथा
पेशेवर सेवाएँ डिजिटल
परिपक्वता के मामले में अपेक्षाकृत पीछे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र में तकनीकी अपनाने, क्षमता निर्माण और डिजिटल सशक्तिकरण की अभी भी व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।
क्षेत्रीय
एवं राज्य स्तरीय मुख्य बिंदु
अध्ययन
से पता चलता है कि देशभर में डिजिटल परिवर्तन का परिदृश्य अभी भी असमान है। जहाँ दक्षिण और पश्चिम भारत डिजिटल परिपक्वता रैंकिंग में अग्रणी बने हुए हैं, वहीं पूर्वी भारत का कोई भी राज्य शीर्ष 10 डिजिटल रूप से परिपक्व एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल नहीं है। यह क्षेत्र में तकनीकी अपनाने, डिजिटल सशक्तिकरण और पारिस्थितिकी तंत्र समर्थन को बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाता है।
• आंध्र
प्रदेश पहली बार शीर्ष 10 रैंकिंग में शामिल हुआ, जो इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि डिजिटल अपनाने की प्रक्रिया स्थापित तकनीकी केंद्रों से आगे बढ़कर उभरते एमएसएमई बाजारों तक पहुँच रही है।
• तेलंगाना
(68.3) और कर्नाटक (65.7) भारत के सबसे अधिक डिजिटल रूप से परिपक्व एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में उभरे, जिनके बाद महाराष्ट्र (65.2), केरल (63.7) और गुजरात (62.8) का स्थान रहा।
• महाराष्ट्र
ने महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमई के बीच सबसे अधिक डिजिटल परिपक्वता दर्ज की।
• तमिलनाडु,
केरल और दिल्ली एमएसएमई के बीच एआई अपनाने और उसके प्रति रुचि के मामले में अग्रणी राज्य रहे।
• कर्नाटक,
केरल और तेलंगाना ने साइबर सुरक्षा समाधानों के सबसे अधिक उपयोग की रिपोर्ट की।
• आंध्र
प्रदेश, तेलंगाना और केरल व्यावसायिक लेन-देन में डिजिटल भुगतान के उपयोग में अग्रणी रहे।
• तेलंगाना
ने विनिर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक डीएमआई दर्ज
किया, जबकि महाराष्ट्र वित्तीय सेवाओं में और हरियाणा आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र में शीर्ष पर रहा।
रिपोर्ट
के प्रमुख निष्कर्ष
रिपोर्ट
के समग्र निष्कर्षों के अनुसार, अब लगभग (चार-पाँचवाँ हिस्सा) एमएसएमई किसी न किसी रूप में ऑनलाइन हैं, जबकि 35% से अधिक के पास अपनी स्वयं की वेबसाइट है।
हालाँकि,
कुछ महत्वपूर्ण अंतराल अभी भी मौजूद हैं:
To read more Download the ReadyForNext MSME
growth Insights Study 2026: https://www.myvi.in/content/dam/vodafoneideadigital/business/msme/RFN5.0-Vi.pdf
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