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'विकसित भारत' के लक्ष्यों के अनुरूप प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) दिशानिर्देशों में बड़े बदलाव की आवश्यकता: एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट

'विकसित भारत' के लक्ष्यों के अनुरूप प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) दिशानिर्देशों में बड़े बदलाव की आवश्यकता: एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट

एसबीआई की ताजा रिपोर्ट में हाउसिंग, एजुकेशन और रिन्यूएबल एनर्जी में लोन लिमिट बढ़ाने तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर व क्लाइमेट फाइनेंस को पीएसएल (PSL) के दायरे में शामिल करने की मजबूत वकालत।

मुंबई  — स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने आज अपनी नवीनतम रिसर्च रिपोर्ट (इश्यू #13, वित्त वर्ष 27) जारी की है, जिसमें प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending - PSL) के मौजूदा नियमों की व्यापक समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि बैंकिंग क्षेत्र वित्त वर्ष 18 से लगातार 40% के समग्र पीएसएल टारगेट को पूरा कर रहा है—और वित्त वर्ष 26 के अनंतिम (provisional) अनुमानों में यह कुल एएनबीसी (ANBC) का 45% रहा है—फिर भी देश को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य तक ले जाने के लिए इसमें बुनियादी सुधारों की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि यदि पीएसएल से 'प्राथमिकता क्षेत्र ऋण प्रमाणपत्र' (PSLC) और 'ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष' (RIDF) के आंकड़ों को अलग कर दिया जाए, तो बैंकों के लिए 40% का ऑर्गेनिक टारगेट (सीधे दिए जाने वाले ऋण) हासिल करना आज भी एक चुनौती बना हुआ है। साल 1972 में तैयार किए गए इस वित्तीय समावेशन ढांचे को अब ईएसजी (ESG) फाइनेंसिंग, एसडीजी (SDG) प्रतिबद्धताओं और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इकोसिस्टम जैसे नए क्षेत्रों के उभार को देखते हुए अपग्रेड करने का यह सबसे सही समय है।

लोन सीमाओं को बढ़ाने के प्रमुख सुझाव

बढ़ती लागत और महंगाई के कारण कई इकाइयां मौजूदा ऋण सीमाओं के कैप के चलते इस श्रेणी से बाहर हो रही हैं। इसे रोकने के लिए एसबीआई रिसर्च ने कई क्षेत्रों में क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है:

  • अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy): बिजली उत्पादकों और सार्वजनिक उपयोगिताओं (जैसे स्ट्रीट लाइटिंग) के लिए ऋण सीमा ₹35 करोड़ से बढ़ाकर ₹100 करोड़ की जाए और व्यक्तिगत घरों (रूफटॉप सोलर प्लांट) के लिए सीमा को ₹2 करोड़ किया जाए।

  • आवास ऋण (Housing Loans): महानगरीय केंद्रों (मेट्रो सेंटर्स) में लोन लिमिट बढ़ाकर ₹1 करोड़ और अन्य केंद्रों में ₹75 लाख की जाए। साथ ही इंटरमीडियरी हाउसिंग लोन को भी इसमें शामिल किया जाए।

  • शिक्षा ऋण (Education Loans): निजी व्यावसायिक कॉलेजों की बढ़ती फीस और विदेशी शिक्षा के खर्च को देखते हुए व्यक्तिगत शिक्षा ऋण की सीमा ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख की जाए।

  • सामाजिक बुनियादी ढांचा (Social Infrastructure): सभी शहरों में स्कूलों के लिए ऋण सीमा बढ़ाकर ₹15 करोड़ और स्वास्थ्य सुविधाओं (अस्पतालों) के लिए ₹25 करोड़ की जाए।

  • खाद्य व कृषि प्रसंस्करण और कृषि इन्फ्रा: नए तकनीकी बदलावों को बढ़ावा देने के लिए बैंकिंग प्रणाली से प्रति उधारकर्ता कुल स्वीकृत सीमा को बढ़ाकर ₹500 करोड़ (व्यक्तिगत बैंक के लिए ₹200 करोड़) किया जाए।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और नए क्षेत्रों को शामिल करने की मांग

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि देश को वर्ष 2047 के विजन को हासिल करने के लिए बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) में भारी निवेश की जरूरत है। बॉन्ड मार्केट के पूरी तरह विकसित न होने के कारण इसके लिए दीर्घकालिक संसाधनों की कमी है। ऐसे में एसबीआई रिसर्च का सुझाव है कि या तो बैंकों द्वारा किए जाने वाले सभी बुनियादी ढांचा ऋणों को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र का दर्जा दिया जाए या फिर पीएसएल गणना के लिए इसे एएनबीसी (ANBC) से बाहर रखा जाए।

इसके अतिरिक्त, पर्यावरण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को देखते हुए पीएसएल के तहत एक अलग 'क्लाइमेट सस्टेनेबिलिटी फाइनेंस' हेड बनाने का सुझाव दिया गया है, ताकि ग्रीन बॉन्ड और ईएसजी बॉन्ड्स में निवेश को प्रोत्साहन मिले। रिपोर्ट में सभी सरकारी योजनाओं (जैसे PMMY, PM SVANidhi, PM Vishwakarma, PMEGP) के तहत दिए जाने वाले ऋणों को बिना उद्यम पंजीकरण संख्या (URN) की अनिवार्यता के भी माइक्रो एंटरप्राइजेज और कमजोर वर्ग के ऋणों में वर्गीकृत करने की सिफारिश की गई है।

आरआईडीएफ (RIDF) में ढांचागत सुधारों की आवश्यकता

रिपोर्ट के कॉस्ट-बेनिफिट एनालिसिस (लागत-लाभ विश्लेषण) से पता चलता है कि बैंकों के लिए नाबार्ड (NABARD) द्वारा प्रबंधित आरआईडीएफ (RIDF) में निवेश करने की तुलना में पीएसएलसी (PSLC) खरीदना अधिक लाभदायक है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए एसबीआई ने सिफारिश की है कि आरआईडीएफ में जमा की जाने वाली राशि को रिस्क वेट (जोखिम भार) और सीआरएआर (CRAR) गणना के दायरे से मुक्त रखा जाना चाहिए और इसे बैंकों की एसएलआर (SLR) आवश्यकताओं की तरह ही सॉवरेन डिपॉजिट माना जाना चाहिए।

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