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प्रिज़्म ने 6,650 करोड़ रुपये के फ्रेश इश्यू वाले आईपीओ के लिए दस्तावेज़ दाखिल किए, 9एमएफवाई26 में 748 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज

प्रिज़्म ने 6,650 करोड़ रुपये के फ्रेश इश्यू वाले आईपीओ के लिए दस्तावेज़ दाखिल किए, 9एमएफवाई26 में 748 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज

मुंबई: वैश्विक हॉस्पिटैलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी प्रिज़्म (ओयो की मूल कंपनी) ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस-1 (यूडीआरएचपी-1) दाखिल किया है। प्रस्तावित आईपीओ में 6,650 करोड़ रुपये तक के नए शेयर (फ्रेश इश्यू) जारी किए जाएंगे और इसमें मौजूदा शेयरधारकों द्वारा किसी भी प्रकार की ऑफर फॉर सेल (बिक्री पेशकश) शामिल नहीं होगी। कंपनी, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने से पहले 1,330 करोड़ रुपये तक का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट भी कर सकती है। यदि ऐसा किया जाता है, तो प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए जुटाई गई राशि को फ्रेश इश्यू के आकार से घटा दिया जाएगा।

 

यूडीआरएचपी-1 के अनुसार, कंपनी शुद्ध आय में से 4,987.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपने ऋणों के पुनर्भुगतान या अग्रिम भुगतान के लिए करेगी। शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। कंपनी के शेयरों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है। पूरी तरह फ्रेश इश्यू के रूप में संरचित इस आईपीओ में प्रमुख मौजूदा शेयरधारकों, जिनमें सॉफ्टबैंक की एसवीएफ इंडिया होल्डिंग्स, संस्थापक रितेश अग्रवाल और आरए हॉस्पिटैलिटी होल्डिंग्स, माइक्रोसॉफ्ट, एयरबीएनबी, खजानाह, ए1 होल्डिंग्स, स्टार वर्च्यू इन्वेस्टमेंट, ग्लोबल आइवी वेंचर्स, लाइटस्पीड, ग्रीनओक्स कैपिटल और पीक एक्सवी शामिल हैं, द्वारा कोई शेयर नहीं बेचे जा रहे हैं।

 

दाखिल दस्तावेजों में प्रिज़्म ने स्वयं को एक प्रौद्योगिकी-संचालित हॉस्पिटैलिटी प्लेटफॉर्म बताया है, जो होटल, अवकाश गृह, दीर्घकालिक प्रवास संपत्तियों और लिस्टिंग्स के क्षेत्र में एक वैश्विक बहु-ब्रांड मंच के रूप में विकसित हुआ है। कंपनी का ‘इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ मॉडल विभिन्न बाजारों में समान तकनीक और परिचालन ढांचे का उपयोग करते हुए ग्राहकों के अनुभव और आपूर्ति साझेदारियों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार ढालने पर आधारित है।

 

दस्तावेजों के अनुसार, प्रिज़्म ने बड़े पैमाने पर विस्तार के साथ अपनी लाभप्रदता में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों (9एमएफवाई26) के दौरान कंपनी का परिचालन राजस्व 6,941 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के पूरे वर्ष के राजस्व 6,259 करोड़ रुपये से लगभग 11 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में कंपनी का कर पश्चात लाभ 748 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 245 करोड़ रुपये था।

 

9एमएफवाई26 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 2,127 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 953 करोड़ रुपये था। असाधारण मदों, शेयर आधारित भुगतान व्यय और अन्य आय को छोड़कर ईबीआईटीडीए 1,968 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के 1,095 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत अधिक है।

 

कंपनी 35 से अधिक देशों में 43 ब्रांडों का संचालन करती है। 31 दिसंबर, 2025 तक उसके नेटवर्क में 24,303 होटल, 1,24,668 घर और 1,44,583 लिस्टिंग्स शामिल थीं, जिनमें भारत में 14,937 स्टोरफ्रंट भी शामिल हैं। वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से कंपनी 11.936 करोड़ से अधिक विशिष्ट ग्राहकों को सेवाएं प्रदान कर चुकी है, जिनमें लगभग 68 प्रतिशत मांग सीधे ग्राहकों से प्राप्त हुई है। भारत में प्रिज़्म अपने कंपनी-संचालित होटल व्यवसाय का विस्तार कर रही है। ये वे होटल हैं, जिनमें कंपनी लीज या प्रबंधन सेवा समझौतों के माध्यम से अधिक परिचालन भागीदारी रखती है, जिससे उसे सेवा मानकों, ब्रांड अनुभव और ग्राहक सेवाओं पर अधिक नियंत्रण मिलता है।

 

भारत में कंपनी-संचालित होटल स्टोरफ्रंट्स की संख्या 31 मार्च, 2025 के 1,053 से बढ़कर 31 दिसंबर, 2025 तक 1,573 हो गई। 9एमएफवाई26 में इन होटलों का सकल बुकिंग मूल्य (जीबीवी) 1,346.45 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के पूरे वर्ष के 818.23 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 65 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के भारत स्थित जीबीवी में इन होटलों की हिस्सेदारी 49.29 प्रतिशत रही। कंपनी इस मॉडल का विस्तार संडे, पैलेट, क्लबहाउस, टाउनहाउस और टाउनहाउस ओक जैसे ब्रांडों के तहत कर रही है।

 

प्रिज़्म का अमेरिकी कारोबार भी तेजी से बढ़ा है, विशेष रूप से जी6 हॉस्पिटैलिटी के अधिग्रहण के बाद, जो अमेरिका और कनाडा में मोटल 6 और स्टूडियो 6 ब्रांडों का संचालन करती है।

9एमएफवाई26 में अमेरिकी कारोबार का जीबीवी 12,022.51 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के 4,712.83 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 155 प्रतिशत अधिक है। नौ माह की अवधि में कंपनी के वैश्विक जीबीवी में अमेरिका की हिस्सेदारी 52.39 प्रतिशत रही।

 

यूरोप में भी कंपनी ने घरों और लिस्टिंग्स के क्षेत्र में मजबूत विस्तार किया है। 31 मार्च, 2025 के 2,08,901 से बढ़कर 31 दिसंबर, 2025 तक यूरोप में कंपनी की होम्स और लिस्टिंग्स की संख्या 2,69,251 हो गई। यूरोपीय कारोबार में बेलविला, डैनसेंटर और चेकमाईगेस्ट जैसे ब्रांड शामिल हैं।

 

हालांकि इस बड़े विस्तार के बावजूद, कंपनी ने यूरोप के आवास बाजार में अभी 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सेदारी हासिल की है, जिससे इस विशाल और बिखरे हुए बाजार में आगे बढ़ने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

 

प्रिज़्म ने अपने एप, वेबसाइट, कॉर्पोरेट चैनल, ट्रैवल एजेंट नेटवर्क, कॉल सेंटर और वॉक-इन ग्राहकों के माध्यम से एक मजबूत प्रत्यक्ष ग्राहक नेटवर्क विकसित किया है। 9एमएफवाई26 में 67.6 प्रतिशत ठहराव सीधे उपभोक्ता चैनलों से आए, जबकि 61.8 प्रतिशत मांग दोबारा आने वाले ग्राहकों से प्राप्त हुई।

कंपनी के लॉयल्टी इकोसिस्टम में ओयो विजार्ड और माय6 ऐप शामिल हैं। 31 दिसंबर, 2025 तक कंपनी के पास 1.907 करोड़ ओयो विजार्ड सदस्य और 74 लाख माय6 सदस्य थे, जिससे कुल लॉयल्टी सदस्य आधार 2.64 करोड़ तक पहुंच गया। अकेले भारत में 1.67 करोड़ ओयो विजार्ड सदस्य हैं, जो ग्राहकों की संख्या के आधार पर भारत के प्रमुख ट्रैवल ब्रांडों में सबसे बड़ा लॉयल्टी कार्यक्रम बन गया है।

 

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने प्रिज़्म की रेटिंग आउटलुक को ‘स्टेबल’ से बढ़ाकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है और उसकी ‘बी’ जारीकर्ता क्रेडिट रेटिंग बरकरार रखी है। एजेंसी ने बेहतर लाभप्रदता, मजबूत नकदी सृजन और प्रस्तावित आईपीओ के बैलेंस शीट पर सकारात्मक प्रभाव को इसका कारण बताया है।

इसके अलावा, 4 जून को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) की दिल्ली पीठ ने प्रिज़्म पर लगाए गए 3,885 करोड़ रुपये के कर दावे को खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण ने कहा कि कंपनी की मूल इकाई को जारी किए गए अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयरों पर प्राप्त शेयर प्रीमियम को एंजेल टैक्स प्रावधान के तहत आय नहीं माना जा सकता। न्यायाधिकरण ने पाया कि शेयरों का मूल्यांकन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित मूल्यांकनकर्ताओं ने उचित पद्धति से किया था और कर अधिकारियों के पास उनके आकलन को खारिज करने का अधिकार नहीं है। यह फैसला आईपीओ से पहले प्रिज़्म के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है और इस अब निरस्त किए जा चुके प्रावधान के तहत प्रभावित अन्य स्टार्टअप कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है।

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