बेंगलुरु: भारत की
ग्रामीण महिलाओं के पास मूल्यवान पारंपरिक कौशल और स्थानीय ज्ञान है। हालांकि, उनकी ये
क्षमताएं अक्सर कम आय वाले,
असंगठित और केवल बुनियादी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित आजीविका के साधनों
में ही सिमटकर रह जाती हैं। समाज में लंबे समय से चली आ रही पुरुष प्रधान सोच और
सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताएं,
महिलाओं के घर से बाहर आने-जाने पर पाबंदियां, वित्तीय जानकारी की कमी, डिजिटल सुविधाओं से जुड़ने में कठिनाइयां और बाजार तक पहुंच
में आने वाली व्यवस्थागत बाधाएं उनकी इन क्षमताओं को सफल, विस्तार की
संभावनाओं वाले और औपचारिक रूप से स्थापित व्यवसायों में बदलने की राह में रुकावट
बनती हैं।
कौशल आधारित उद्यमिता ग्रामीण महिलाओं को उनके पारंपरिक कौशल और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके सफल और आय अर्जित करने वाले व्यवसाय शुरू करने में सक्षम बनाती है। इस तरह यह कौशल सीखने और अपना उद्यम स्थापित करने के बीच की दूरी को कम करती है। महिलाओं की उद्यमशील क्षमताओं को मजबूत बनाकर, उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर और बाजार में उनकी भागीदारी बढ़ाकर यह आजीविका के टिकाऊ साधन विकसित करने, जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास को गति देने और परिवार से जुड़े फैसलों तथा सामुदायिक विकास में महिलाओं की भूमिका और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है।
इसी सोच को साकार करते हुए एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई), अहमदाबाद ने बेंगलुरु में अपने इको-एक्शन लर्निंग सेंटर (ईएलसी) की शुरुआत की है। इसके जरिए संस्थान उद्यमिता, तकनीक आधारित कौशल विकास और आजीविका के टिकाऊ अवसर उपलब्ध कराकर ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को और मजबूत कर रहा है। बेंगलुरु और मंचर स्थित केंद्रों में अब तक 2,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 600 से अधिक महिलाओं ने नए उद्यम शुरू किए हैं या अपने मौजूदा व्यवसायों का विस्तार किया है। यह पहल महिलाओं को अपने व्यावहारिक कौशल का उपयोग करके आय अर्जित करने वाले उद्यम स्थापित करने के नए अवसर प्रदान कर रही है।
इको-एक्शन लर्निंग सेंटर ग्रामीण महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण, जरूरी मशीनों और उपकरणों के इस्तेमाल की सुविधा, नई तकनीकों के उपयोग का प्रदर्शन और व्यवसाय चलाने के लिए लगातार सहयोग प्रदान करता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आजीविका के बेहतर और व्यावहारिक अवसरों की पहचान करने, बाजार में बिक्री के लिए तैयार उत्पाद विकसित करने और स्थानीय संसाधनों तथा बाजार की मांग के आधार पर अपने उद्यम स्थापित करने में मदद करना है।
इस पहल के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा, “ईडीआईआई में हमारा मानना है कि उद्यमिता ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है। इको-एक्शन लर्निंग सेंटर के जरिए हम महिलाओं को व्यावहारिक कौशल, तकनीक और उद्यम स्थापित करने के लिए जरूरी सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि वे अपनी क्षमताओं का उपयोग करके ऐसे व्यवसाय शुरू कर सकें, जो लंबे समय तक सफलतापूर्वक चल सकें।”
इस पहल के उद्देश्य और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए ईडीआईआई के सीएसआर पार्टनरशिप विभाग के निदेशक डॉ. रमन गुजराल ने कहा, “अब तक 2,000+ महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 600+ उद्यम शुरू किए गए हैं या उनका विस्तार किया गया है। ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि इको-एक्शन लर्निंग सेंटर (ईएलसी) के माध्यम से उद्यमिता किस तरह जमीनी स्तर पर बदलाव ला सकती है। ईडीआईआई का हमारा लक्ष्य इस पहल के प्रभाव को पूरे भारत में बढ़ाना और अधिक से अधिक महिलाओं के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर पैदा करना है।”
ईडीआईआई ने बेंगलुरु और मंचर में कुल 46 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनके तहत ग्रामीण महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड-प्रेस्ड तकनीक से तेल निकालने, सौर ऊर्जा से खाद्य पदार्थों को सुखाने, बेकरी उत्पाद बनाने और मशरूम की खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया है। इन केंद्रों में विशेष मशीनें, सोलर ड्रायर, हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से खेती करने और टिकाऊ तरीके से पशुओं के लिए चारा तैयार करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से व्यावहारिक कौशल विकास के साथ उद्यमिता का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि महिलाएं बाजार में बिक्री के लिए तैयार उत्पाद विकसित कर सकें और लंबे समय तक चलने वाले सफल व्यवसाय स्थापित कर सकें।
इस कार्यक्रम का प्रभाव बेंगलुरु की उद्यमी रूबा ट्रीसा की सफलता की कहानी में भी दिखाई देता है। ईडीआईआई के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के बाद उन्होंने रोमा केयर नाम से अपना ब्रांड शुरू किया, जिसके तहत हाथ से बने साबुन, हैंडवॉश, फिनाइल और घर की साफ-सफाई से जुड़े अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इको-एक्शन लर्निंग सेंटर (ईएलसी) के सहयोग से उन्होंने अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया, जबकि वीएक्ट ने उन्हें प्रदर्शनियों में भाग लेने, बाजार से जुड़ने और ई-कॉमर्स के अवसर तलाशने में मदद की।
इस पहल की एक अन्य लाभार्थी पुणे के बिघी की रहने वाली शुभांगी जयबीप लगड़ हैं, जिन्होंने मसालों से अधिक मूल्य वाले उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण लेने के बाद शुभ स्वाद मसाले नाम से अपना व्यवसाय शुरू किया। ईडीआईआई ने उन्हें जरूरी लाइसेंस प्राप्त करने और कानूनी नियमों तथा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दिया। इसकी मदद से उन्होंने घर से चलने वाले अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए स्थानीय बाजार में एक दुकान खोल ली। आज उनके इस उद्यम से हर महीने ₹15,000 से अधिक की आय होती है।
भविष्य की योजनाओं के तहत ईडीआईआई ने 2027-28 में इको-एक्शन लर्निंग सेंटर (ईएलसी) मॉडल का विस्तार चेन्नई तक करने की योजना बनाई है। इसके माध्यम से 2,000 महिलाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण और उद्यम स्थापित करने में सहयोग देने का लक्ष्य रखा गया है। संस्थान का उद्देश्य 2030 तक पूरे भारत में पांच इको-एक्शन लर्निंग सेंटर स्थापित करना और 10,000 से अधिक महिलाओं को सहयोग प्रदान करना है। इससे ग्रामीण महिलाओं को टिकाऊ व्यवसाय स्थापित करने के अधिक अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।