पार्टनरशिप को अब जॉइंट सर्टिफिकेशन, ग्लोबल स्किल्स
रिकग्निशन और भरोसेमंद असेसमेंट सिस्टम में ठोस और मापनीय परिणाम सुनिश्चित करने
के लिए समयबद्ध रोडमैप तैयार करने की दिशा में बदला जाना चाहिए।” - श्री जयन्त चौधरी
नई दिल्ली :
नई दिल्ली के कौशल
भवन में ऑस्ट्रेलिया-इंडिया एजुकेशन एंड स्किल्स काउंसिल (एआईएसईसी) की तीसरी बैठक के तहत चल रहे सहयोग के हिस्से के
तौर पर, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्किलिंग
पार्टनरशिप पर एक उच्च-स्तरीय राउंडटेबल बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में
भारत की ओर से एनसीवीईटी, एनएसडीसी, ग्रीन जॉब्स, डीजीटी, एनएसडीसी इंटरनेशनल के वरिष्ठ प्रतिनिधि और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स शामिल हुए, जबकि ऑस्ट्रेलिया
की ओर से जॉब्स एंड स्किल्स ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रेलियन माइनिंग एंड ऑटोमोटिव स्किल्स अलायंस और
एएसक्यूए के लीडर शामिल हुए।
अपने शुरुआती संबोधन में कौशल विकास और उद्यमशीलता
मंत्रालय की सचिव, सुश्री देवश्री मुखर्जी ने दोनों पक्षों के बीच संस्थागत स्तर पर बेहतर समन्वय
की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विनियामक ढाँचे के संदर्भ में एएसक्यूए और एनसीवीईटी जैसे संस्थानों, तथा भारत के
सेक्टर स्किल काउंसिल्स और जॉब्स और स्किल्स ऑस्ट्रेलिया के बीच और अधिक तालमेल को
महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने
व्यावसायिक शिक्षा की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के साझा संकल्प को रेखांकित करते हुए
द्विपक्षीय बैठक और 8 दिसम्बर 2025 को आयोजित तीसरे एआईईएससी स्किल्स सेशन के
दौरान चर्चा किए गए प्रमुख कार्य बिंदुओं का सार भी प्रस्तुत किया।
चर्चा में स्किल इकोसिस्टम को तेज़ी से हो रहे
टेक्नोलॉजी में बदलाव के साथ तालमेल बिठाने पर फोकस किया गया, जिसमें एआई से होने वाला बदलाव, इंडस्ट्री की बदलती ज़रूरतें
और अलग-अलग सेक्टर में प्रतिभा की कमी शामिल है। प्रतिभागियों ने बताया कि दोनों
देशों को ग्रीन सेक्टर, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-टेक और डिजिटल कामों के लिए अपनी वर्कफोर्स को तैयार करने में एक जैसी
चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इंडस्ट्री से जुड़े ट्रेनिंग मॉडल,
सीखने के आसान
तरीकों और प्रशिक्षक की क्षमता सुदृढ़ करने के महत्व पर जोर दिया।
माननीय कौशल विकास और
उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री, श्री जयन्त चौधरी ने कहा कि भारत
और ऑस्ट्रेलिया वैश्विक स्तर पर गतिशील और इंडस्ट्री-अलाइन्ड टैलेंट पूल विकसित
करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं। उन्होंने जॉइंट सर्टिफिकेशन,
ग्लोबल स्किल्स
रिकग्निशन और भरोसेमंद असेसमेंट सिस्टम में ठोस और मापनीय परिणाम सुनिश्चित करने
के लिए समयबद्ध रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ऑस्ट्रेलिया के स्किल्स एंड
ट्रेनिंग मिनिस्टर, माननीय एंड्रयू जाइल्स एमपी ने सहयोग को गहरा करने के ऑस्ट्रेलिया की
प्रतिबद्धता दोहराई साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ठोस परिणामों को लागू
करने और उन्हें प्रभावी रूप से धरातल पर उतारने के लिए आने वाली चुनौतियों का
उपयुक्त प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने आईटीआई,
एनएसटीआई और
टीएएफई संस्थानों के बीच संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने में दोनों देशों द्वारा की
गई प्रगति पर भी प्रकाश डाला।
दोनों पक्षों ने जॉइंट ट्रेनिंग पहल, ट्रेनर और असेसर
एक्सचेंज के आदान–प्रदान, तथा प्राथमिकता वाले जॉब रोल्स में कुशल उम्मीदवारों के प्लेसमेंट हेतु पायलट प्रोग्राम
को प्रोत्साहित करने के प्रति मजबूत समर्थन व्यक्त किया। प्रतिभागियों ने प्रगति की समीक्षा, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान–प्रदान तथा दीर्घकालिक
सहयोग को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए वार्षिक इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्किल्स बैठक शुरू
करने का भी समर्थन किया।
ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल ने भविष्य के लेबर
मार्केट ट्रेंड्स पर अपनी राय शेयर की, जिसमें हायर-स्किल्ड रोल्स की बढ़ती डिमांड, वर्कफोर्स में
तेज़ी से बदलाव के तरीके, और क्लीन एनर्जी, एग्री-फूड सिस्टम्स, और सर्विसेज़ से होने वाली ग्रोथ की बढ़ती ज़रूरत शामिल है। उन्होंने एआई के आर्थिक असर और इनोवेशन को सक्षम बनाने वाले
अडैप्टिव रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
भारत ने वीईटी इकोसिस्टम में चल रहे सुधारों के बारे में बताया, जिसमें मज़बूत इक्विवेलेंस
पाथवे, नेशनल स्किल्स
क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क में सुधार, और उभरते सेक्टर्स में सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस का विकास शामिल है।
स्किल्स एंड ट्रेनिंग की
डिप्टी सेक्रेटरी, सुश्री एना फेथफुल और कौशल विकास और
उद्यमशीलता मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार सुश्री अर्चना मायाराम ने बातचीत का
सारांश देते हुए स्किलिंग को आकांक्षी बनाने और एंगेजमेंट के लिए रेगुलर चैनल
बनाने के लिए दोनों देशों के साझा संकल्प के बारे में बताया।