नई दिल्ली: ग्रेटर नोएडा स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट
टेक्नोलॉजी (बिमटेक) ने हाल ही में Erasmus+ द्वारा फंडेड KODECET (नॉलेज डेवलपमेंट फॉर सर्कुलर इकोनॉमी ट्रांजिशन) प्रोजेक्ट
के तहत दो रीजनल मल्टीप्लायर इवेंट्स सफलतापूर्वक आयोजित किए, जिनका फोकस
सर्कुलर इकोनॉमी एजुकेशन को आगे बढ़ाने और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 4 (Quality Education) के
अनुरूप इनोवेटिव पेडागॉजिकल प्रैक्टिसेज को प्रमोट करने पर रहा। इन इवेंट्स में
फैकल्टी मेंबर्स,
एकेडेमिक लीडर्स,
सीएसआर प्रोफेशनल्स,
सस्टेनेबिलिटी प्रैक्टिशनर्स,
इंडस्ट्री रिप्रेजेंटेटिव्स और डिजी-सस्टिच व KODECET प्रोजेक्ट
टीम्स के मेंबर्स शामिल हुए।
यह एक कोलैबोरेटिव प्लेटफॉर्म के रूप में सामने आया, जहां इस बात पर
चर्चा की गई कि सर्कुलर इकोनॉमी के प्रिंसिपल्स को हायर एजुकेशन करिकुलम और टीचिंग
प्रैक्टिसेज में सिस्टेमैटिक तरीके से कैसे इंटीग्रेट किया जा सकता है।
इवेंट में शामिल प्रतिनिधि को संबोधित करते हुए डायरेक्टर
बिमटेक डॉ. प्रबीना राजिब ने हायर एजुकेशन
की बदलती भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “हायर एजुकेशन का फ्यूचर इस बात में निहित है कि वह नॉलेज को
रिस्पॉन्सिबिलिटी के साथ कैसे अलाइन करता है। सर्कुलर इकोनॉमी एक मजबूत फ्रेमवर्क
प्रदान करती है,
जो स्टूडेंट्स को सिर्फ करियर्स के लिए ही नहीं बल्कि सस्टेनेबल सिस्टम्स और
सोसाइटी ट्रांसफॉर्मेशन में योगदान देने के लिए तैयार करती है।”
इवेंट की शुरुआत KODECET प्रोजेक्ट के ओवरव्यू से हुई, जो भारत, थाईलैंड और
यूरोप के संस्थानों को शामिल करने वाला एक इंटरनेशनल इनिशिएटिव है, जिसका उद्देश्य
करिकुलम डेवलपमेंट,
डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स और इंडस्ट्री एंगेजमेंट के माध्यम से कैपेसिटी
बिल्डिंग करना है। इवेंट की एक प्रमुख हाइलाइट KODECET का थ्री-कोर्स
फ्रेमवर्क रहा,
जो सर्कुलर इकोनॉमी एजुकेशन के लिए एक स्ट्रक्चर्ड अप्रोच प्रदान करता है। इस
फ्रेमवर्क में कॉन्सेप्चुअल फाउंडेशंस (“What & Why”), इम्प्लीमेंटेशन
और डिलीवरी (“How”),
और स्टेकहोल्डर-ड्रिवन सिस्टम लीडरशिप
(“With
Whom”) शामिल हैं।
KODECET
की नेशनल लीड डॉ. वीनू शर्मा ने कहा, “सर्कुलर इकोनॉमी एजुकेशन को फ्रैगमेंटेड टीचिंग से
स्ट्रक्चर्ड करिकुलम डिजाइन की ओर ले जाना जरूरी है।” सेशंस में हायर एजुकेशन की
भूमिका पर भी चर्चा हुई,
जिसमें रिस्पॉन्सिबल सिटिजनशिप, एथिकल लीडरशिप और सस्टेनेबिलिटी-ड्रिवन डिसीजन-मेकिंग को
बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
इंडस्ट्री एक्सपेक्टेशंस को हाइलाइट करते हुए बिमटेक के
सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड सीएसआर के प्रोफेसर और चेयरपर्सन डॉ. के.के. उपाध्याय
ने कहा, “आज
इंडस्ट्री को ऐसे प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है, जो
सस्टेनेबिलिटी को प्रैक्टिस में बदल सकें। इसके लिए एकेडेमिया और इंडस्ट्री के बीच
डीपर कोलैबोरेशन और सर्कुलर इकोनॉमी प्रिंसिपल्स को मेनस्ट्रीम मैनेजमेंट एजुकेशन
में इंटीग्रेट करना जरूरी है।”
इवेंट में इनोवेटिव टीचिंग मेथड्स को शामिल किया गया, जिसमें
केस-बेस्ड लर्निंग,
इंटरएक्टिव डिस्कशंस और एक्सपीरिएंशियल टूल्स जैसे सर्कुला गेम का उपयोग किया
गया, जिससे
पार्टिसिपेंट्स को थ्योरी और रियल-वर्ल्ड
कुल मिलाकर, यह मल्टीप्लायर इवेंट KODECET प्रोजेक्ट के
आउटकम्स के डिसेमिनेशन और स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट को मजबूत करने में सफल रहा। इसने
रिस्पॉन्सिबल मैनेजमेंट एजुकेशन और ग्लोबल एकेडेमिक कोलैबोरेशन के प्रति बिमटेक की
कमिटमेंट को और मजबूत किया।
KODECET
जैसे इनिशिएटिव्स के माध्यम से बिमटेक फ्यूचर-रेडी ग्रेजुएट्स तैयार करने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है,
जो सस्टेनेबिलिटी चैलेंजेज का समाधान करने और सर्कुलर तथा रीजेनेरेटिव इकोनॉमी
की दिशा में योगदान देने में सक्षम हैं।