बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ का ट्रेलर जारी, ‘ब्लीड इंडिया’ प्लॉट पर बड़ी बहस शुरू
आने वाली बॉलीवुड फिल्म धुरंधर का ट्रेलर रिलीज हो गया है, और यह काफी तीखा और विवादित नजर आ रहा है। ट्रेलर एक काल्पनिक जासूसी कहानी दिखाता है, लेकिन इसकी जड़ें पाकिस्तान से जुड़े एक वास्तविक राजनीतिक और सैन्य सिद्धांत से जुड़ी हुई हैं।
ट्रेलर में क्या दिखता है?
ट्रेलर की शुरुआत अर्जुन रामपाल से होती है, जो इसमें मेजर इक़बाल, एक आईएसआई (पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी) अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। वह एक विवादित कथन याद करते हैं:
“हज़ार चोटों से भारत को खून-खून कर दो।”
वह बताते हैं कि उन्होंने यह बात बचपन में सुनी थी, जब पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ज़िया-उल-हक़ ने इसे कहा था। “थाउज़ेंड कट्स स्ट्रैटेजी” का मतलब है लंबे समय तक चलने वाला, कम तीव्रता वाला संघर्ष — यानी सीधे युद्ध नहीं, बल्कि लगातार चोट पहुँचाना।
ट्रेलर में बहुत क्रूर दृश्य भी दिखाए गए हैं। एक यातना वाले सीन में एक आदमी के शरीर में नुकीली तारें घुसी हुई दिखाई जाती हैं।
दूसरी तरफ, आर. माधवन अजय सन्याल, एक भारतीय खुफिया अधिकारी बने हैं। वह कहते हैं कि भारत को “पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़ तक घुसना होगा।”
अक्षय खन्ना एक खतरनाक किरदार रहमान डकैत की भूमिका निभा रहे हैं।
संजय दत्त चौधरी असलम के रूप में दिखते हैं, जो अपराधी और उग्रवादी दोनों तरह की दुनिया से जुड़े हुए नजर आते हैं।
फिल्म के लेखक और निर्देशक आदित्य धर हैं, जो इससे पहले उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक बना चुके हैं।
धुरंधर 5 दिसंबर 2025 को रिलीज होगी।
क्यों है यह ट्रेलर चर्चा में?
यह ट्रेलर वास्तविक ऐतिहासिक बयानबाज़ी और राजनीतिक तनाव को कहानी में जोड़ता है। “ब्लीड इंडिया” स्ट्रैटेजी को कहानी के केंद्र में रखकर फिल्म एक गंभीर और विवादित मुद्दे को छू रही है।
यह सिर्फ एक आम स्पाई-थ्रिलर नहीं है — इसमें जासूसी, राजनीति और भारत–पाकिस्तान तनाव का गहरा मिश्रण है।
इसके बहुत ग्राफिक और हिंसक दृश्य भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
रिएक्शन
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कुछ लोग ट्रेलर की स्केल और विज़न की तारीफ कर रहे हैं, इसे “वर्ल्ड-क्लास” कह रहे हैं।
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कुछ लोग इसकी हिंसा की आलोचना कर रहे हैं। कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी ने इसकी तुलना “ISIS क्लिप्स” से कर दी।
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फिल्ममेकर सुपर्ण एस. वर्मा ने फिल्म का बचाव किया और कहा कि भारतीय फिल्मों को हिंसा के लिए ज्यादा जज किया जाता है, जबकि विदेशी फिल्मों में ऐसे दृश्य “कला” माने जाते हैं।