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द राजा साब रिव्यू: उलझा निर्देशन, कॉपी किए सीन और कमजोर एक्ज़ीक्यूशन में फंसी प्रभास की हॉरर कॉमेडी

द राजा साब रिव्यू: उलझा निर्देशन, कॉपी किए सीन और कमजोर एक्ज़ीक्यूशन में फंसी प्रभास की हॉरर कॉमेडी

द राजा साब, प्रभास अभिनीत एक हॉरर कॉमेडी फिल्म, कागज़ पर काफी रोमांचक लगती थी। लेकिन हकीकत में यह फिल्म उलझी हुई, खराब एडिटिंग वाली और मौलिकता से दूर नजर आती है।

कहानी जो कहीं नहीं पहुंचती

शुरुआत से ही द राजा साब अपनी पकड़ बनाने में संघर्ष करती है। फिल्म हॉरर, कॉमेडी और फैंटेसी को संतुलित करने की कोशिश करती है, लेकिन इनमें से कोई भी तत्व सही तरीके से नहीं जुड़ पाता। कहानी बिखरी हुई लगती है और सीन बिना किसी स्पष्ट कनेक्शन के इधर-उधर जाते रहते हैं। डर या हंसी पैदा करने के बजाय फिल्म बार-बार फोकस खो देती है।

कई जगह ऐसा महसूस होता है कि फिल्म खुद तय नहीं कर पा रही कि वह क्या बनना चाहती है — डरावनी फिल्म, कॉमेडी या पारिवारिक मनोरंजन। यही भ्रम पूरे अनुभव को कमजोर कर देता है।

उलझा हुआ निर्देशन और स्पष्ट विज़न की कमी

द राजा साब की सबसे बड़ी समस्या इसका निर्देशन है। फिल्म को आगे बढ़ाने वाला कोई साफ विज़न नजर नहीं आता। सीन जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए हैं, जोक्स पुराने लगते हैं और हॉरर सीन डराने में नाकाम रहते हैं। फिल्म की रफ्तार असमान है, जिससे यह अपनी असली लंबाई से भी ज्यादा लंबी महसूस होती है।

कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे सिर्फ समय भरने के लिए जोड़े गए हों, कहानी को आगे बढ़ाने के लिए नहीं। निर्देशन की यह कमी पूरी फिल्म में साफ दिखाई देती है।

कॉपी किए गए और पहचाने हुए सीन

द राजा साब के कई सीन मशहूर हॉलीवुड हॉरर फिल्मों से काफी प्रेरित या कॉपी किए हुए लगते हैं। भूतिया घरों की सेटिंग से लेकर अनुमान लगाए जा सकने वाले जंप स्केयर तक, फिल्म कुछ नया दिखाने के बजाय पुराने फॉर्मूले पर चलती है। इससे फिल्म का असर कम हो जाता है और कहानी पहले से अनुमानित लगने लगती है।

दर्शकों को चौंकाने के बजाय, फिल्म हमें पहले देखी जा चुकी बेहतर फिल्मों की याद दिलाती है।

खराब एडिटिंग ने बिगाड़ा फ्लो

फिल्म की एडिटिंग भी इसकी एक बड़ी कमजोरी है। सीन अचानक कट जाते हैं, गाने बिना वजह आ जाते हैं और भावनात्मक पल अधूरे रह जाते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि जरूरी सीन या तो हटा दिए गए हैं या बहुत जल्दबाजी में निपटा दिए गए हैं, जिससे कहानी समझना मुश्किल हो जाता है।

अच्छी एडिटिंग फिल्म को संभाल सकती थी, लेकिन यहां यह उलझन और बढ़ा देती है।

प्रभास की परफॉर्मेंस में भावनाओं की कमी

प्रभास स्क्रीन पर अच्छे जरूर दिखते हैं, लेकिन उनकी परफॉर्मेंस में भावनात्मक गहराई की कमी साफ नजर आती है। उनका किरदार कमजोर तरीके से लिखा गया है, जिससे उन्हें अभिनय दिखाने का ज्यादा मौका नहीं मिलता। भावनात्मक या ड्रामेटिक सीन में उनके हाव-भाव सपाट रहते हैं, जिससे दर्शक उनसे जुड़ नहीं पाते।

यह पूरी तरह प्रभास की गलती नहीं लगती। कमजोर लेखन और निर्देशन उनकी ताकत को उभारने में असफल रहते हैं।

संगीत और तकनीकी पक्ष

बैकग्राउंड म्यूज़िक तेज़ जरूर है, लेकिन यादगार नहीं। गाने कहानी में कोई खास योगदान नहीं देते और फिल्म की गति को धीमा कर देते हैं। विज़ुअल इफेक्ट्स कहीं ठीक लगते हैं तो कहीं जल्दबाजी में बनाए गए और कमजोर नजर आते हैं।

अंतिम फैसला

द राजा साब एक निराशाजनक हॉरर कॉमेडी है, जो उलझे निर्देशन, खराब एडिटिंग, कॉपी किए गए सीन और कमजोर एक्ज़ीक्यूशन की वजह से असफल रहती है। बड़े स्टार और बड़े बजट के बावजूद फिल्म में मौलिकता और भावनात्मक गहराई की कमी साफ दिखती है।

हमारी रेटिंग: 5 में से 1.5

यह फिल्म शायद केवल कट्टर प्रशंसकों को पसंद आए। आम दर्शकों के लिए द राजा साब एक ऐसा मौका है जो अपनी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।

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