हैदराबाद के प्रमुख शिक्षण संस्थान, फिनिक्स ग्रीन्स स्कूल ऑफ लर्निंग ने गर्व के साथ घोषणा की है कि कक्षा 9वीं की छात्रा श्रुति लक्ष्मी मन्नेपल्ली ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में आयोजित प्रतिष्ठित '1M1B एक्टिवेट इम्पैक्ट समिट' में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह दुर्लभ उपलब्धि श्रुति को उन चुनिंदा युवा भारतीय नवोन्मेषकों (innovators) की श्रेणी में खड़ा करती है जो वैश्विक मंच पर सार्थक सामाजिक प्रभाव पैदा कर रहे हैं।
शिखर सम्मेलन (Summit) में श्रुति ने अपनी दृष्टि-स्वास्थ्य पहल “आई कैन डू वंडर्स” (Eye Can Do Wonders) प्रस्तुत की। यह प्रोजेक्ट बच्चों में दृष्टि दोष की शुरुआती पहचान के महत्वपूर्ण, लेकिन अक्सर अनदेखे किए जाने वाले मुद्दे को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। '1M1B फ्यूचर फाउंडेशन' के तहत विकसित इस पहल का उद्देश्य शुरुआती चरण में ही आंखों की समस्याओं की पहचान करना, समय पर आंखों की जांच सुनिश्चित करना, चश्मा जैसे सुधारात्मक उपाय प्रदान करना और बच्चों को उनकी पूरी सीखने की क्षमता तक पहुंचने के लिए सशक्त बनाना है।
अनुभवात्मक शिक्षा (experiential learning) और मेंटरशिप पर फिनिक्स ग्रीन्स के जोर को दर्शाते हुए, श्रुति का सफर केवल संयुक्त राष्ट्र तक ही सीमित नहीं है। वह एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी छात्रा हैं:
वे पिछले आठ वर्षों से कुचिपुड़ी का प्रशिक्षण ले रही हैं और अपना जूनियर डिप्लोमा पूरा करने के करीब हैं। उन्होंने शिल्प कला वेदिका और रवींद्र भारती जैसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक स्थलों पर प्रस्तुतियाँ दी हैं।
वे वीणा बजाती हैं और पिछले पांच वर्षों से कर्नाटक संगीत सीख रही हैं।
लेखन में उनकी रुचि के चलते उन्होंने स्कूल पत्रिका के लिए एक काल्पनिक कहानी “बोर्ड गेम्स ऑफ द गॉड्स” भी लिखी है।
वे 'बोवर्स 18 अंडर 18' प्रतियोगिता की फाइनलिस्ट हैं और अपने नवाचार प्रोटोटाइप “क्लीन बॉट” के लिए स्कूल टेकफेस्ट प्रतियोगिता की विजेता भी रही हैं।
अपनी खुशी साझा करते हुए, फिनिक्स ग्रीन्स स्कूल ऑफ लर्निंग की प्रिंसिपल, सुश्री अंजू शर्मा ने कहा: "संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर श्रुति की उपलब्धि प्रेरक और पूरी तरह से योग्य है। वह उस जिज्ञासा, रचनात्मकता और करुणा की भावना का प्रतिनिधित्व करती हैं जिसे हम फिनिक्स ग्रीन्स में विकसित करने का प्रयास करते हैं। बच्चों के नेत्र स्वास्थ्य जैसी वास्तविक समस्या को हल करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, उनकी परिपक्वता और सामाजिक भलाई के प्रति उनके जुनून को दर्शाती है।"
अपने अनुभव पर विचार करते हुए श्रुति ने साझा किया, “परिप्रेक्ष्य (perspective) में छोटा सा बदलाव भी एक बच्चे की दुनिया में अनंत संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।”
फिनिक्स ग्रीन्स स्कूल ऑफ लर्निंग एक ऐसा वातावरण तैयार करता है जहाँ छात्रों को न केवल परीक्षाओं के लिए बल्कि जीवन के लिए तैयार किया जाता है। श्रुति की यह उपलब्धि कल के सामाजिक रूप से जिम्मेदार वैश्विक नेता तैयार करने की स्कूल की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।