अमेरिका में एक भारतीय मूल के सांसद ने एक नया इमीग्रेशन बिल दोबारा पेश किया है, जिसका उद्देश्य हर साल जारी होने वाले H-1B वीज़ा की संख्या को दोगुना करना है। यह कदम उस समय आया है जब देश में स्किल्ड-वर्कर वीज़ा को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
बिल में क्या प्रस्ताव है
इस बिल में H-1B वीज़ा की सालाना सीमा 85,000 से बढ़ाकर लगभग 170,000 करने का प्रस्ताव दिया गया है।
H-1B प्रोग्राम अमेरिकी कंपनियों को टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च और मेडिकल जैसे क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञ कर्मचारियों को रखने की अनुमति देता है।
बिल पेश करने वाले सांसद का कहना है कि अमेरिकी उद्योगों को अभी गंभीर स्किल्ड वर्कर्स की कमी का सामना करना पड़ रहा है, और वीज़ा संख्या बढ़ाने से कंपनियाँ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी।
यह मुद्दा अभी क्यों महत्वपूर्ण है
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में इमीग्रेशन नियमों को लेकर कड़ा राजनीतिक माहौल बना हुआ है।
जहाँ कुछ लोग विदेशी कर्मचारियों पर नियंत्रण बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, वहीं कई अमेरिकी कंपनियों का कहना है कि उन्हें ज़रूरी भूमिकाएँ भरने के लिए अधिक skilled professionals की जरूरत है।
भारतीय पेशेवर H-1B वीज़ा धारकों का सबसे बड़ा समूह हैं, इसलिए इस प्रोग्राम में किसी भी बदलाव का भारतीय परिवारों और टेक सेक्टर पर बड़ा असर पड़ेगा।
समर्थन और चिंताएँ
समर्थक कहते हैं कि वीज़ा संख्या बढ़ने से इनोवेशन बढ़ेगा, अमेरिकी कंपनियों को विकास में मदद मिलेगी और टेक सेक्टर मजबूत होगा।
विरोध करने वालों का मानना है कि वीज़ा संख्या बढ़ने से स्थानीय अमेरिकी मजदूरों के नौकरी के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, और H-1B सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े नियम जरूरी हैं।
अब आगे क्या होगा
अब यह बिल कांग्रेस में जाएगा, जहाँ उस पर बहस और चर्चा होगी।
अगर यह पास होता है, तो यह H-1B सिस्टम में होने वाले सबसे बड़े बदलावों में से एक होगा।