अमेरिका के नए NASA प्रशासक जेरेड आइज़ैकमैन ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका एक बार फिर चाँद पर इंसानों को भेजेगा। उन्होंने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इसे अमेरिका की अंतरिक्ष नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बताया।
सीनेट से पुष्टि के बाद पद संभालने वाले आइज़ैकमैन के अनुसार, चाँद पर वापसी न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से अहम है, बल्कि इससे भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, शोध और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
चाँद मिशन को लेकर क्या बोले NASA प्रमुख
चाँद मिशन को लेकर क्या बोले NASA प्रमुख
जेरेड आइज़ैकमैन ने कहा कि NASA का लक्ष्य केवल चाँद पर उतरना नहीं है, बल्कि वहाँ लंबे समय तक अमेरिका की मौजूदगी स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि चाँद पर किए जाने वाले मिशन वैज्ञानिक खोजों, आर्थिक अवसरों और रणनीतिक लाभों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी अंतरिक्ष कंपनियों के साथ साझेदारी और नई तकनीकों में निवेश जरूरी होगा।
आर्टेमिस प्रोग्राम और आगे की योजना
अमेरिका की चाँद पर वापसी की योजना NASA के Artemis (आर्टेमिस) प्रोग्राम के तहत चल रही है। इस प्रोग्राम के अंतर्गत कई चरणों में मिशन पूरे किए जाएंगे। अगले साल Artemis II मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद की परिक्रमा पर भेजा जाएगा। इसके बाद आने वाले मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद की सतह पर उतारने की योजना है। लंबी अवधि में NASA चाँद पर ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहता है, जो भविष्य में मंगल ग्रह जैसे गहरे अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी में मदद कर सके।
अमेरिका की अंतरिक्ष रणनीति के लिए क्या मायने
NASA प्रमुख के इस बयान से साफ है कि अमेरिका अंतरिक्ष अन्वेषण में फिर से वैश्विक नेतृत्व स्थापित करना चाहता है। चाँद पर वापसी का स्पष्ट लक्ष्य तय करके NASA अपने मिशनों की रफ्तार बढ़ाना चाहता है और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग को मजबूत करना चाहता है।
अगर यह योजना सफल होती है, तो यह Apollo मिशन के बाद पहली बार होगा जब अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री 50 से अधिक वर्षों के बाद चाँद की सतह पर कदम रखेंगे।