जयपुर के एक स्कूल में कक्षा 4 की 9 साल की बच्ची की आत्महत्या के मामले में CBSE की जांच ने गंभीर लापरवाही, लंबा चला बुलिंग का दौर और कई बार मदद की पुकार के बावजूद मिली अनदेखी को सामने लाया है।
रिपोर्ट ने पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
18 महीनों तक चली बदतमीज़ी और बुलिंग को किसी ने नहीं रोका
CBSE की रिपोर्ट के अनुसार बच्ची को लगभग डेढ़ साल तक लगातार बुल किया गया।
वह कई बार शिक्षकों से शिकायत करती थी कि कुछ बच्चे गंदी भाषा बोलते हैं और उसे परेशान करते हैं।
लेकिन उसकी शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय, कई बार उसे “समझौता करने” को कहा गया।
आखिरी 45 मिनट में 5 बार मदद की कोशिश – लेकिन कोई सुनने वाला नहीं
दिल दहला देने वाली जांच का हिस्सा
घटना वाले दिन बच्ची ने सिर्फ 45 मिनट में पांच बार अपनी टीचर से मदद मांगी।
रिपोर्ट में दावा है कि टीचर ने उसकी चिंताओं को समझने के बजाय उसे डांटा, जिससे बच्ची और ज्यादा परेशान हो गई।
CCTV फुटेज में दिखा कि कुछ बच्चों ने डिजिटल स्लेट पर कुछ अनुचित लिखा था।
बच्ची ने इसे हटाने की गुज़ारिश की, लेकिन उसकी बात अनसुनी कर दी गई और वह अपमानित महसूस कर रही थी।
स्कूल की सुरक्षा और प्रबंधन में गंभीर खामियां
स्कूल की सुरक्षा और प्रबंधन में गंभीर खामियां
CBSE रिपोर्ट में कई बड़ी चूकें सामने आईं:
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प्रशिक्षित काउंसलर की कमी
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CCTV की निगरानी में लापरवाही
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ऊपरी मंजिलों पर असुरक्षित रेलिंग
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शिकायतों पर कोई लिखित कार्रवाई नहीं
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एंटी-बुलिंग गाइडलाइंस का पालन नहीं
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बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन
रिपोर्ट ने इन सबको “गंभीर लापरवाही” बताया है।
स्कूल पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
CBSE ने स्कूल को शो-कॉज नोटिस जारी किया है।
स्कूल को 30 दिनों के भीतर जवाब देना होगा, वरना उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है, जिसमें CBSE मान्यता रद्द होना भी शामिल है।
देश भर के स्कूलों के लिए चेतावनी
यह मामला बताता है कि छोटे बच्चे भी गंभीर भावनात्मक तनाव झेलते हैं, और स्कूलों के लिए यह जरूरी है कि वे हर शिकायत को गंभीरता से लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण संदेश है।