भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आने वाले समय में अपने सबसे व्यस्त और महत्वाकांक्षी चरण की तैयारी कर रहा है। ISRO प्रमुख वी. नारायणन के अनुसार, संगठन अगले तीन वर्षों में अपने अंतरिक्ष यान उत्पादन को तीन गुना बढ़ाएगा। यह बड़ा विस्तार भारत में बढ़ते उपग्रह प्रक्षेपण, वैज्ञानिक मिशनों और भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों को समर्थन देने के लिए किया जा रहा है।
इस साल सात मिशन लॉन्च होंगे
ISRO इस वित्तीय वर्ष में सात और मिशन लॉन्च करेगा। इनमें संचार उपग्रह, पृथ्वी अवलोकन (earth-observation) उपग्रह, और PSLV तथा GSLV जैसे विभिन्न रॉकेटों से लॉन्च शामिल हैं।
लॉन्च की बढ़ती गति दिखाती है कि ISRO अब अधिक बार मिशन भेजने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें उद्योग जगत और निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है।
चंद्रयान-4 वर्ष 2028 में
ISRO ने घोषणा की है कि चंद्रयान-4 वर्ष 2028 में लॉन्च किया जाएगा।
यह भारत का पहला सैंपल-रिटर्न मिशन होगा, जिसमें चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानें लेकर पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। दुनिया में बहुत कम देशों ने ऐसा किया है, इसलिए यह मिशन भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
इस मिशन में कई तरह के अंतरिक्ष यान मिलकर काम करेंगे — जैसे ऑर्बिटर, लैंडर, एसेंट मॉड्यूल और रिटर्न मॉड्यूल।
भारतीय स्पेस स्टेशन 2028 तक
ISRO भारत का अपना स्पेस स्टेशन भी बना रहा है।
इसका पहला मॉड्यूल 2028 तक कक्षा (orbit) में भेजा जाएगा। इससे भारतीय अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहकर वैज्ञानिक प्रयोग कर सकेंगे।
मानव अंतरिक्ष उड़ान में प्रगति
ISRO गगनयान मिशन के तहत भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी कर रहा है।
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पहली बिना-मानव (uncrewed) टेस्ट फ्लाइट अगले दो वर्षों में होगी।
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पहला मानव मिशन 2027 के लिए तय किया गया है।
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ISRO ने दीर्घकालिक लक्ष्य रखा है कि 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर भेजे जाएं।
भारत का बढ़ता स्पेस सेक्टर
भारत का स्पेस सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है:
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450 से अधिक उद्योग ISRO के मिशनों में योगदान दे रहे हैं।
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330 से अधिक स्टार्टअप रॉकेट, उपग्रह और नई तकनीकें विकसित कर रहे हैं।
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सरकार चाहती है कि भारत की हिस्सेदारी वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में और बढ़े।
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का बड़ा बदलाव
बड़े मिशन, तेज़ लॉन्च गति और चंद्रमा व मानव अंतरिक्ष उड़ान के दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ, ISRO अगले दशक में एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़रेगा।
अंतरिक्ष यान उत्पादन को तीन गुना करना इन बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और भारत की कम-खर्च, उच्च-कुशल अंतरिक्ष तकनीक में नेतृत्व बनाए रखने का महत्वपूर्ण कदम है।