सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही उस समय बाधित हो गई जब विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (मोशन ऑफ थैंक्स) पर अपना जवाब नहीं दे सके।
जैसे ही प्रधानमंत्री बोलने के लिए खड़े हुए, कई विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में आ गए। शोरगुल और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी।
लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से बार-बार व्यवस्था बनाए रखने और प्रधानमंत्री को बोलने देने की अपील की। इसके बावजूद हंगामा जारी रहा, जिसके चलते सदन को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा।
विपक्षी सांसदों ने कहा कि वे सरकार की विभिन्न नीतियों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं और अहम मुद्दों पर जवाब की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती, तब तक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।
वहीं सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से कहा गया कि धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब संसदीय चर्चा का अहम हिस्सा होता है और इसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए।
धन्यवाद प्रस्ताव एक औपचारिक बहस होती है, जिसमें राष्ट्रपति के अभिभाषण के आधार पर सरकार की नीतियों और कामकाज पर चर्चा की जाती है। प्रधानमंत्री का जवाब आमतौर पर इस बहस का समापन करता है।
लगातार व्यवधान के कारण प्रधानमंत्री निर्धारित समय पर अपना जवाब पूरा नहीं कर सके। संसदीय अधिकारियों ने कहा कि अगली बैठक में चर्चा को दोबारा शुरू करने की कोशिश की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।