अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका को फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करने चाहिए। उनका कहना है कि पाकिस्तान, चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देश अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं, इसलिए अमेरिका पीछे नहीं रह सकता।
ट्रम्प ने दावा किया कि “अमेरिका ही एक बड़ा परमाणु देश है जो परीक्षण नहीं कर रहा,” और सुरक्षा बनाए रखने के लिए परीक्षण ज़रूरी हैं। उनके अनुसार, इससे अमेरिका की सैन्य क्षमता मजबूत बनी रहेगी।
पृष्ठभूमि
अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में पूर्ण परमाणु परीक्षण किया था। उसके बाद से अमेरिका केवल कंप्यूटर सिमुलेशन और सीमित तकनीकी जांच के जरिए अपने परमाणु हथियारों की क्षमता परखता है। विश्व में कई समझौते भी हैं जो परमाणु परीक्षण रोकने पर ज़ोर देते हैं।
ट्रम्प का तर्क
ट्रम्प का कहना है कि बिना परीक्षण के हथियार समय के साथ कमजोर हो सकते हैं। उनका मानना है कि अगर अमेरिका परीक्षण करेगा, तो दुनिया को पता चलेगा कि वह अभी भी सबसे मजबूत शक्ति है और अपने रक्षा सिस्टम को अपडेट रख रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले “सिस्टम टेस्ट” कर सकता है — यानी हथियारों के हिस्सों की जांच — लेकिन भविष्य में वास्तविक परीक्षण की भी ज़रूरत पड़ सकती है।
विशेषज्ञों की चिंता
कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने परीक्षण शुरू किए, तो अन्य देश भी अपने परीक्षण बढ़ा सकते हैं, जिससे वैश्विक तनाव और हथियारों की दौड़ बढ़ सकती है।
कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इससे दुनिया में शांति प्रयासों को नुकसान हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय संबंध और तनावपूर्ण हो सकते हैं।
दुनिया की नजर
अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन ट्रम्प के बयान ने दुनिया भर में चर्चा शुरू कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि यह केवल राजनीतिक बयान है या अमेरिका वास्तव में कोई कदम उठाएगा।